पर्यटकों की संख्या बढ़ी लेकिन कमाई घटी, क्या बोधगया में चौपट हो जाएगा होटल कारोबार?
बोधगया में होटल बिजनेस की हालत खस्ता है, दुकानदार भी परेशान हैं. आरोप विदेशी बौद्ध मठों पर लग रहे हैं. पढ़ें पूरी खबर..

Published : December 27, 2025 at 5:14 PM IST
रिपोर्ट: सरताज़ अहमद
गयाजी: बौद्ध धर्मावलंबियों के तीर्थ स्थल बोधगया में पर्यटन उद्योग संकट में है. दिसंबर से फरवरी महीने तक बोधगया में पर्यटन का पीक सीजन माना जाता है. रोजाना देश-विदेश से पर्यटक पहुंच भी रहे हैं लेकिन फिर भी होटल व्यवसाय, रेस्टोरेंट व्यवसाय, टूर एंड ट्रेवल समेत कई तरह के व्यवसायों में भारी गिरावट आई है. इस कारण मठों के परिसर का व्यवसायिक इस्तेमाल होना भी बताया जाता है. बीते कई सालों से बोधगया होटल एसोसिएशन समेत कई व्यापारिक संगठनों की ओर से ये मसला उठाया जा रहा है.
क्या है आरोप?: होटल एसोसिएशन और अन्य व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि विदेशी मठ अपने परिसर में अतिथिशाला के नाम पर होटल और गेस्ट हाउस संचालित कर रहे हैं, जिसका असर स्थानीय होटल कारोबारियों और ट्रैवल एजेंसियों पर पड़ रहा है. होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष जय सिंह कहते हैं कि हर दिन विदेशी पर्यटक बोधगया आ रहे हैं, ये सही है लेकिन वो बोधगया में स्थित विभिन्न देशों की मंदिरों मठों तक ही सीमित हो जाते हैं.
जय सिंह उदाहरण के साथ समझाते हुए कहते हैं, 'मेरे निरंजना होटल में 55 कमरे हैं लेकिन इस सीजन 2025 में सभी कमरे एक साथ फूल नहीं हुए हैं. आज भी 20 ही कमरे बुक हैं. ऐसे में घाटे का अनुमान लगाया जा सकता है कि अगर बोधगया होटल और गेस्ट हाउस में 1000 कमरे हैं तो 900 खाली पड़े हुए हैं. ये कोई आम शहर नहीं है, ये एक अंतर्राष्ट्रीय स्थल है.'
एडवाइजरी बोर्ड के नियम का पालन नहीं: जय सिंह कहते हैं कि 15-20 वर्ष पूर्व बोधगया टेंपल एडवाइजरी बोर्ड ने निर्णय लिया था कि नियमानुसार मठों को सिर्फ जरूरत के अनुसार ही कमरे बनाने हैं, लेकिन अधिकतर ने अपने यहां 700 से 1000 कमरे बना लिए हैं. जिसमें होटल रिसोर्ट जैसी सभी उच्च सुविधाएं उपलब्ध हैं. ऐसे में जो विदेशों से पर्यटक आते हैं, वो वहीं पर अपने देश के मठों में ठहर जाते हैं. होटलों या गेस्ट हाउस तक तो वो पहुंचते ही नहीं हैं. यह एडवाइजरी बोर्ड बोधगया मंदिर बीटीएमसी का है, इसमें कई देशों के प्रतिनिधि हैं.

अनुमानित 200 करोड़ का घाटा: जय सिंह के अनुसार तीन महीने के पर्यटन सीजन में बोधगया के स्थानीय व्यवसाय जिसमें होटल, रेस्टोरेंट, फुटपाथी दुकानदारों, ट्रेवल एजेंसी और सभी प्रकार के व्यवसाय को 200 करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा है, क्योंकि बौद्ध मठों के गेस्ट हाउस में विदेशी पर्यटकों के ठहरने, खाने और घूमने की पूरी व्यवस्था एक ही परिसर में मिल जाती है. इससे वह स्थानीय होटल, टैक्सी, गाइड और बाजार में खर्च नहीं करते. परिणाम स्वरुप यहां सैंकड़ों करोड रुपये का घाटा हो रहा है.

"एक-एक देश का 20 से 30 टेंपल के नाम पर गेस्ट हाउस खोल लिया है. उसके कारण 10 हजार टूरिस्ट तो उनके ही मंदिर-मठ में रह जाते हैं. हमलोगों के साथ-साथ सरकार को भी घाटा है. चूकि इनको टैक्स लगना नहीं है, इनकम टैक्स देना नहीं है. दूसरा जो भी विदेश मुद्रा दान में मिलता है, फिर उसी कंट्री में चला जाता है. सरकार को जांच करना चाहिए. लगभग सीजन में 200 करोड़ का घाटा है."- जय सिंह अध्याय, अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन, बोधगया
विकास हुआ तो व्यापारिक संगठन बढ़े: हालांकि बोधगया के व्यापारिक संगठनों के आरोप पर मोनेस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐसे आरोप निराधार हैं. हम ये नहीं कह रहे हैं कि पूरी तरह सभी एक तरह के होंगे. हो सकता है कि एक दो लोगों की गलती भी कर रहे हो लेकिन इसके कारण सभी मठों को शक की नजर से ना देखा जाए.

निगमा मोनेस्ट्री के इंचार्ज खेंपू सोनम फोर्बु नेगी कहते हैं कि जितने लोग भी आते हैं, वह यहीं बोधगया से खरीदारी करते हैं. वह अपने साथ अपने घरों से कोई सामान लेकर नहीं आते. जो आते हैं, वह अगर मॉनेस्ट्री मंदिरों में भी रहते हैं तो वो खाने-पीने का सामान बोधगया से ही खरीद कर लेते हैं. यह सारी चीजों को भी जोड़ना होगा. एकतरफा आकलन नहीं कर सकते.
बोधगया के विकास में मंदिरों का योगदान: खेंपू सोनम फोर्बु नेगी कहते हैं अगर व्यापार नहीं बढ़ता तो बोधगया का विकास नहीं होता. बोधगया में तो काफी विकास हुआ है. अगर विकास नहीं होते और अर्थव्यवस्था घाटे में होती तो इतने सारे होटल कैसे और क्यों बनते? इसके प्रमाण यही है कि यहां के होटल का व्यापार भी अच्छा खास चलता है. अगर मंदिरों की संख्या बढ़ी है तो होटल भी बढ़े हैं.
"यहां व्यापार में कोई कमी नहीं है. आप इस तरह समझ सकते हैं कि जो भी बाहर से आएंगे वह तो यहीं से खाने पीने के समान खरीदारी करेंगे. अगर मठ में भी खाने-पीने की व्यवस्था होती है तो मठ भी यहीं बोधगया और गया से खरीदारी करता है. ऐसे में अर्थव्यवस्था कैसे घाटे में है?"- खेंपू सोनम फोर्बु नेगी, इंचार्ज, निगमा मोनेस्ट्री

एक देश के कई मॉनेस्ट्री: बोधगया होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष जय सिंह हैं. ऐसे में उन्होंने बताया कि वह वो व्यापार में घाटे और कुछ संवेदनशील बातों को लेकर सरकार को पत्र लिखेंगे. वो बोधगया में एक देश के कई मॉनेस्ट्री के होने पर भी सवाल खड़े करते हैं. वे कहते हैं, 'बोधगया मंदिर एडवाइजरी बोर्ड में तय हुआ था कि एक देश का एक से दो मॉनेस्ट्री मंदिर का ही निर्माण होगा लेकिन यहां एक-एक देश की 20 से 25 मॉनेस्ट्री यानी के मठ के निर्माण हो चुके है.'
जय सिंह के मुताबिक थाईलैंड की 20 और बर्मा की 20 से अधिक मंदिर मठ हैं. वे आरोप लगाते हैं कि मंदिरों के नाम पर गेस्ट हाउस चलाए जा रहे हैं. बोधगया में छोटे-बड़े मिलाकर 100 से कम मठ नहीं होंगे. अगर एक वक्त में 10000 से अधिक भी श्रद्धालु आते हैं तो मठों के पास एक वक्त में इतने लोगों को ठहराने की व्यवस्था है.
'सरकार को भी हो रहा है नुकसान': वहीं, टूरिस्ट गाइड संघ के अध्यक्ष और गेस्ट हाउस के मालिक राकेश कुमार कहते हैं कि इससे सरकार को भी काफी नुकसान हो रहा है, क्योंकि मॉनेस्ट्री को टैक्स देने नहीं होते हैं. इसके साथ ही जो भी विदेशी मुद्रा इन्हें दान में मिलता है, वह पैसे फिर उन्हीं के देशों में वापस चले जाते हैं. यहां कई बैंकों के फॉरेन एक्सचेंज काउंटर थे, जो बंद हो गए हैं. जाहिर है यह सरकार के लिए बड़ा वित्तीय घाटा है.

"मॉनेस्ट्री के नाम पर यह व्यवसाय का कार्य कर रहे हैं, इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए. कई बार इसके लिए सरकार से मांग भी की गई है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. सरकार को चाहिए कि इसकी जांच करें. मेरी नजर में यह कार्य अवैध है, ऐसे में इसकी जांच होनी चाहिए."- राकेश कुमार, गेस्ट हाउस मालिक सह अध्यक्ष, टूरिस्ट गाइड संघ
पर्यटक से कमाई का फॉर्मूला?: राकेश कुमार कहते हैं कि बोधगया में पर्यटकों की मौजूदगी के बावजूद स्थानीय बाजार और सरकारी राजस्व को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है. उदाहरण देते हुए वो कहते हैं कि यदि कोई विदेशी पर्यटक 5 दिन तक होटल में ठहरता है तो वह औसतन 80 हजार से एक लाख रुपये खर्च करता है. इसमें होटल, भोजन, परिवहन, शॉपिंग, गाइड सेवा और टिकट शुल्क आदि शामिल होते हैं. जिससे सरकार को सीधे तौर पर लगभग 20 से 25 हजार रुपये टैक्स और अन्य शुल्क के रूप में प्राप्त होते हैं और बाकी पैसे स्थानीय बाजार में सर्कुलेट होते हैं.
मॉनेस्ट्री में ठहरते हैं गरीब श्रद्धालु: निगमा मॉनेस्ट्री के गुरुजी खेनपु ओहेन तेनजिन कहते हैं मॉनेस्ट्री धर्मशालाओं में तो जितने भी श्रद्धालु या भिक्षु आते हैं, वह हमारी अपनी संस्था के लोग होते हैं. उनसे किसी तरह का चार्ज नहीं लिया जाता है. हमारे यहां जो लोग आते हैं, वो ज्यादा अमीर नहीं होते हैं. जिसके पास पैसा होगा, वह मंदिरों में क्यों ठहरेगा?
"देश-विदेश से जितने भी लोग आते हैं, उनमें जिनके पास पैसे हैं वह होटल में ही ठहरते हैं. जिनके पास पैसे कम हैं, वही मंदिर मॉनेस्ट्री में ठहरते हैं. वह अगर ठहरते हैं तो दान-दक्षिणा के रूप में कुछ पैसे दे देते हैं, बस इतना ही है. हम होटल को या फिर यहां की अर्थव्यवस्था को क्यों नुकसान पहुंचाएंगे?"- खेनपु ओहेन तेनजिन, निगमा मॉनेस्ट्री
'हम पर आरोप निराधार': खेनपु ओहेन तेनजिन कहते हैं कि निगमा मॉनेस्ट्री के निर्माण को 37 साल हो गए हैं. जब यहां इसका निर्माण हो रहा था, तब बोधगया में चंद ही गेस्ट हाउस होंगे. तंबू लगा कर भिक्षु रहते थे. हमने यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत होते देखा है. आज सैंकड़ों होटल और गेस्ट हाउस हैं. अगर मंदिरों का निर्माण हुआ है तो होटल भी बड़े स्तर पर बने हैं, यहां सभी लोग स्थानीय लोगों को साथ लेकर चलते हैं.
2016 में हुई थी जांच: होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष जय सिंह कहते हैं कि तत्कालीन बीटीएमसी अध्यक्ष और गया जिला पदाधिकारी कुमारी रवि ने 2016 में जांच कराई थी. जांच रिपोर्ट भी सरकार को दी गई थी लेकिन सरकार की तरफ से इस पर ध्यान नहीं दिया गया. जब जांच हुई थी तब यहां मॉनेस्ट्री के व्यावसायिक इस्तेमाल की बात को सही पाया गया था. उस समय यह भी पाया गया था कि इन मॉनेस्ट्री में आने-जाने वालों का ब्यौरा भी नहीं रखा जाता था. उस समय मॉनेस्ट्री को नोटिस भी जारी हुआ था लेकिन आगे फिर कुछ नहीं हुआ.
मामले से डीएम अनभिज्ञ: जिला पदाधिकारी सह बीटीएमसी के अध्यक्ष शशांक शुभंकर अर्थव्यवस्था घाटे में चलने के आरोपों के सवाल पर कहते हैं कि किसी भी सर्वे जांच में इस तरह की बात प्रमाणित नहीं हुई है. पर्यटक तो बड़ी संख्या में आ रहे हैं, व्यवस्थाएं भी सही तरह से संचालित हो रही हैं. वहीं, मॉनेस्ट्री में व्यवसायिक कार्य संचालित होने के आरोपों से जुड़े सवाल पर डीएम कहते हैं कि अगर ऐसी शिकायत आएगी तो जरूर कार्रवाई करेंगे.
"होटल या व्यवसाय के घाटे में चलने का दावा कोई सर्वे में प्रमाणित नहीं हुआ है. पर्यटक तो बड़ी संख्या में आ रहे हैं और इसकी कोई स्पेसिफिक शिकायत मिलेगी तो देखेंगे. मठ में पर्यटकों के ठहरने की कोई शिकायत मेरी जानकारी में नहीं है."- शशांक शुभंकर, गया डीएम सह अध्यक्ष, बीटीएमसी
सिर्फ मोंक भिक्षु को ठहराएं: इस घाटे को दूर करने के लिए व्यापारिक संगठन से जुड़े लोग बताते हैं कि सिर्फ बौद्ध भिक्षु मोंक को मॉनेस्ट्री में ठहराना चाहिए. जो विदेशों से पर्यटक आते हैं, उन्हें वहां नहीं ठहराना चाहिए. अन्य देशों का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि अगर हम दूसरे देशों में जाते हैं तो वहां अपने मंदिरों के धर्मशालाओं में नहीं ठहरते हैं. सरकार को यहां इस पर विचार करने की आवश्यकता है.
'अवैध कारोबार बंद होना चाहिए': राकेश कुमार कहते हैं कि हम लोग सभी तरह के टैक्स चुकाते हैं, वहीं यह मॉनेस्ट्री टैक्स से भी बच जाती हैं. अगर उन्हें होटल की तरह ही व्यवसाय चलाना है तो वह इसके लिए लाइसेंस लें. जब तक वह लाइसेंस नहीं लेंगे, तब तक तो हम लोग इनके इस कार्य को अवैध कारोबार ही मानेंगे.
फूटपाथ दुकानदार भी नाराज: हालांकि बोधगया मंदिर के मुख्य द्वार वाले रास्ते पर सड़क किनारे दुकान लगाने वालों की शिकायत मॉनेस्ट्री से ज्यादा स्थानीय नगर परिषद से है. एक फुटपाथी दुकानदार सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि हमारी शिकायत स्थानीय प्रशासन से है. जब पर्यटन का सीजन आता है, तब नगर परिषद बोधगया की ओर से हम लोगों को हटाने के लिए अभियान चलता है, जबकि पर्यटक सीजन में विदेशी व्यापारियों के लिए जैसे रिफोजी मार्केट, तिब्बत मार्केट, नेपाली मार्केट के लिए अलग से जगह दी जाती है, जिसकी वजह से हम लोगों के यहां से बहुत कम ही पर्यटक समान खरीदते हैं, इससे हम लोगों को बड़ा घाटा होता है.

स्पष्ट नीति बनाने की है मांग: बोधगया के विभिन्न व्यापारिक संगठनों की सरकार और जिला प्रशासन से मांग है कि बोधगया में मंदिर आधारित आवास व्यवस्था पर स्पष्ट नीति बननी चाहिए, ताकि यहां के लोगों का भी कारोबार चले. उन्हें भी फायदा हो, जिससे सरकार के राजस्व को नुकसान नहीं पहुंचे. हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब बोधगया का होटल उद्योग घाटे में जाने का दावा कर रहा है. इससे पहले भी इस तरह की बातें सामने आ चुकी हैं.
कितने श्रद्धालु आए इस साल?: बीटीएमसी के अनुसार इस बार जनवरी 2025 से अबतक 3138644 श्रद्धालु बोधगया महाबोधि मंदिर का दर्शन कर चुके हैं. इसमें पुरुष श्रद्धालुओं की संख्या 1810542 है, जबकि महिलाओं की तादाद 1328102 है. इसमें देश-विदेश दोनों के श्रद्धालु भिक्षु उपासक और बौद्ध अनुयाई हैं. सिर्फ दिसंबर महीने में ही देखें तो 26 दिसंबर 2025 तक 2 लाख 67 हजार 306 श्रद्धालु बोधगया का विजेट कर चुके हैं, ये संख्या और बढ़ेगी. वहीं, होटल एसोसिएशन के अनुसार बोधगया में 170 से अधिक होटल, गेस्ट हाउस और रिसॉर्ट हैं.
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