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आंध्र-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर एनकाउंटर में टॉप नक्सली कमांडर हिडमा समेत 6 ढेर

सुरक्षा बलों को मंगलवार को बड़ी सफलता मिली. आंध्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर एक एनकाउंटर में कुख्यात नक्सली कमांडर हिडमा को मार गिराया.

ENCOUNTER IN ALLURI MAOISTS KILLED
टॉप नक्सली कमांडर हिडमा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : November 18, 2025 at 11:55 AM IST

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Updated : November 18, 2025 at 2:24 PM IST

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मारेडुमिली (आंध्र प्रदेश) : सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में मंगलवार को बड़ी सफलता मिली. सुरक्षा बलों ने आंध्र-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर एनकाउंटर में कुख्यात नक्सली कमांडर हिडमा समेत 6 माओवादियों को मार गिराया. बताया जा रहा है कि हिडमा दर्जनों बड़े मामलों का मास्टरमाइंड था. वह अपराधों का पर्याय बन गया था.

नक्सल विरोधी अभियान में मंगलवार को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेडुमिली वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में कम से कम छह माओवादी मारे गए. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मृतकों में टॉप माओवादी नेता और केंद्रीय समिति के सदस्य मादवी हिडमा भी शामिल है.

आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के एसपी अमित बरदार ने बताया कि मुठभेड़ सुबह साढ़े छह बजे से सात बजे के बीच मारेदुमिल्ली मंडल के जंगली इलाके में हुई. उन्होंने बताया, 'पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं ने एक संयुक्त अभियान चलाया. अल्लूरी जिले में आज (मंगलवार) हुई मुठभेड़ में छह माओवादी मारे गए.'

हिडमा कौन था?

माडवी हिडमा उर्फ ​​संतोष का जन्म छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुरवती गाँव में हुआ था. वह माओवादियों के बीच तेजी से आगे बढ़ा और बस्तर व दंतेवाड़ा दल का एक महत्वपूर्ण सदस्य बन गया. हिडमा कम उम्र में ही माओवादी केंद्रीय समिति में शामिल हो गया था और गुरिल्ला हमलों में एक प्रमुख रणनीतिकार के रूप में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता था. हिडमा को पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी का कमांडर बनाया गया और बाद में वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य भी बन गया.

हिडमा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सबसे कम उम्र का सदस्य था और इस पद को धारण करने वाला बस्तर क्षेत्र का एकमात्र आदिवासी था. उसके सिर पर 50 लाख रुपये का इनाम रखा गया था. हिडमा कम से कम 26 घातक हमलों के लिए जिम्मेदार है, जिसमें 2017 का सुकमा हमला और 2013 का झीरम घाटी नरसंहार शामिल है, जिसमें छत्तीसगढ़ के प्रमुख कांग्रेस नेताओं सहित 27 लोग मारे गए थे.

वह 2010 के दंतेवाड़ा हमले में भी शामिल था, जिसके परिणामस्वरूप 76 सीआरपीएफ जवान मारे गए थे. 2021 के सुकमा-बीजापुर मुठभेड़ में भी वह शामिल था, जिसमें 22 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे. आईजी सुंदरराज ने कहा कि उन्हें 31 मार्च, 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने के अपने लक्ष्य को पूरा करने की उम्मीद है और पिछले 20 महीनों में 2200 से अधिक नक्सली मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं.

एएनआई से बात करते हुए पी सुंदरराज ने कहा, "पिछले कुछ दशकों से वामपंथी उग्रवाद न केवल बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए बल्कि देश के बड़े हिस्से के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती रहा है. पिछले कुछ साल बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के लिए बहुत निर्णायक रहे हैं. पिछले दो सत्रों में, हमने बस्तर क्षेत्र में 450 से अधिक नक्सली शव बरामद किए हैं. इस अवधि में, बसवराजू और अन्य जैसे शीर्ष नक्सली कैडरों के शव बरामद किए गए. पिछले कुछ महीनों में, केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के सदस्यों और अन्य संभागीय समिति के सदस्यों सहित 300 से अधिक माओवादी कैडरों ने हिंसा छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है.

छत्तीसगढ़ में एक और मुठभेड़

छत्तीसगढ़ में एक अलग घटना में मंगलवार सुबह एर्राबोर इलाके में हुई मुठभेड़ में एक माओवादी मारा गया. अधिकारियों के अनुसार सुरक्षाकर्मियों ने इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया है. जिला पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि मुठभेड़ अभी भी जारी है.

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Last Updated : November 18, 2025 at 2:24 PM IST