ममता बनर्जी का बड़ा एक्शन, पार्टी विरोधी गतिविधियों पर दो MLA को पार्टी से निकाला
पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने विधायक संदीपन साहा और रिताब्रता बनर्जी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है.

Published : June 1, 2026 at 3:40 PM IST
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को अपने दो विधायकों संदीपन साहा और रिताब्रता बनर्जी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निकाल दिया.
इन विधायकों को पार्टी से निकालने का आदेश मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के राज्य सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह कहने के कुछ मिनट बाद आया कि दोनों ने राज्य विधानसभा में ‘फर्जी सिग्नेचर’ मामले के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी, जहां टीएमसी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में समर्थन दिया था.
Two Trinamool Congress MLAs, Sandipan Saha and Ritabrata Banerjee, expelled for anti-party activities pic.twitter.com/kVCC85aR6z
— Press Trust of India (@PTI_News) June 1, 2026
दोनों विधायक को भेजे गए एक मैसेज में कहा गया, “ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के ध्यान में यह बात आई है कि एआईटीसी द्वारा मनोनीत उम्मीदवार के तौर पर चुने जाने के बावजूद, आप पार्टी के अधिकृत नेतृत्वद्वारा बुलाई गई बैठक में बार-बार शामिल नहीं हुए हैं और खुद को पार्टी-विरोधी कामों में शामिल पाया है.”
पार्टी उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया, “यह भी देखा गया है कि आपने ऐसी गतिविधियों में भाग लिया है और ऐसे बयान दिए हैं जो एआईटीसी के हितों के लिए हानिकारक हैं.” मामले पर उचित विचार-विमर्श के बाद, पत्र में कहा गया कि, “एआईटीसी के सक्षम प्राधिकारी ने आपको तत्काल प्रभाव से पार्टी की (प्राथमिक) सदस्यता से निष्कासित करने का निर्णय लिया है."
फर्जी सिग्नेचर विवाद है क्या?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा सचिवालय को एक पत्र भेजकर पार्टी की ओर से विभिन्न पदों के लिए नाम प्रस्तावित किए. इस पत्र में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नयना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्रा को उपनेता तथा कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया था.
इस प्रस्ताव पर विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने टीएमसी एमएलए के हस्ताक्षरों वाली सूची मांगी थी. वहीं जांच के दौरान कुछ हस्ताक्षरों में कथित तौर पर असंगतियां सामने आईं जिसके बाद मामला गंभीर हो गया.
साथ ही हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर सवाल उठने के बाद इसकी जांच सीआईडी को सौंप दी गई. वहीं जांच को आगे बढ़ाते हुए सीआईडी ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. इस टीम का नेतृत्व डीआईजी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं जबकि इसमें एक डीएसपी और दो इंस्पेक्टर भी शामिल हैं. एसआईटी कथित फर्जी हस्ताक्षरों और उससे जुड़े मामले की जांच कर रही है.
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