EVM में नहीं, अब वोटर लिस्ट से हो रही 'वोट चोरी'! ECI से मुलाकात के बाद बरसे अभिषेक बनर्जी
अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को भारत निर्वाचन आयोग से मुलाकात की.


Published : December 31, 2025 at 6:54 PM IST
संतू दास
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच, वरिष्ठ पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को यहां भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने मतदाता सूची के शुद्धिकरण के उद्देश्य से किए जा रहे इस अभ्यास के संचालन और कार्यान्वयन को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं.
चुनाव आयोग के मुख्यालय में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह और विवेक जोशी के साथ हुई यह बैठक दो घंटे से अधिक समय तक चली. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े तमाम मुद्दों से अवगत कराया. उन्होंने चुनाव आयोग को एक पत्र भी सौंपा, जिसमें इन मुद्दों पर जोर देते हुए चुनाव निकाय से इस मामले की जांच करने की मांग की गई.
मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित अपने पत्र में टीएमसी ने लिखा, "हम पश्चिम बंगाल में चल रही 'विशेष गहन पुनरीक्षण' प्रक्रिया के संबंध में गहरी चिंता के साथ आपको लिख रहे हैं, जिसने निष्पक्षता, आनुपातिकता और तटस्थता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्पष्टीकरण मांगने के बार-बार के प्रयासों के बावजूद, हमारे आवेदनों का कोई जवाब नहीं मिला है और एसआईआर के कार्यान्वयन में परेशान करने वाले पैटर्न तेजी से स्पष्ट होते जा रहे हैं."

SIR में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए पत्र में कहा गया, "एसआईआर प्रक्रिया के बीच में ही चुनाव आयोग ने पिछली तारीख से 'तार्किक विसंगतियां' नामक एक नई श्रेणी पेश कर दी. इसके तहत पिता के नाम में मिलान न होना, कथित तौर पर असामान्य वंशावली मैपिंग और माता-पिता, बच्चों या दादा-दादी के बीच संदिग्ध आयु अंतर जैसे आधारों पर 1.36 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया है. इन श्रेणियों का ज़िक्र तब नहीं किया गया था जब 27 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर एसआईआर प्रक्रिया की घोषणा की गई थी. इनकी जानकारी केवल 16 दिसंबर को अनौपचारिक रूप से दी गई, जो कि ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन का दिन था."
पार्टी ने दावा किया कि इस पूरी प्रक्रिया में 80,000 बीएलओ (BLO), 8,000 बीएलओ सुपरवाइजर, 4,000 एईआरओ (AERO), 300 ईआरओ (ERO) और 23 डीईओ (DEO) शामिल थे. ऐसे में चुनाव आयोग के लिए तार्किक रूप से यह असंभव है कि उसने उसी दिन 7.66 करोड़ मतदाताओं के डेटा का विश्लेषण कर लिया हो और विसंगतियों की यह सूची तैयार कर ली हो.
टीएमसी ने कहा कि उनके संज्ञान में यह बात भी आई है कि कई मामलों में बूथ लेवल एजेंटों (BLAs) को इन सुनवाइयों के दौरान मौजूद रहने की अनुमति नहीं दी जा रही है. पार्टी ने तर्क दिया कि यदि चुनाव वाले दिन मतदान के समय बीएलए को पोलिंग स्टेशन के भीतर रहने की जिम्मेदारी दी जाती है और उन्हें गणना फॉर्म के वितरण और हस्ताक्षर के दौरान मौजूद रहने की अनुमति है, तो उन्हें इन सुनवाइयों से बाहर रखने का कोई ठोस आधार नहीं है.

टीएमसी ने आगे कहा, "कल, हालांकि 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' (तार्किक विसंगति) के मामले केवल एईआरओ लॉगिन में ही दिख रहे हैं, लेकिन इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम में अब भी गंभीर खामियां हैं. कल लिस्ट अपलोड होने के बाद वहां चार 'ड्रॉपडाउन' विकल्प दिए गए हैं. हियरिंग नोटिस जेनरेट करें (Generate Hearing Notices), डीईओ को भेजें (Send to DEO), सही पाया गया (Found Ok), अयोग्य पाया गया (Found Ineligible). जब किसी मामले को 'सही पाया गया' के रूप में मार्क किया जाता है और संबंधित विकल्प चुना जाता है, तो वह मामला बंद हो जाना चाहिए. हालांकि, मामला बंद करने के बजाय, सिस्टम स्वचालित रूप से सुनवाई का नोटिस जेनरेट कर देता है, जो कि बिल्कुल वैसा ही परिणाम है जैसा 'हियरिंग नोटिस जेनरेट करें' विकल्प चुनने पर होता है."
पार्टी ने दावा किया कि इसके अतिरिक्त, यदि कोई एईआरओ किसी मामले को 'अयोग्य' मार्क कर देता है, तो ईआरओ को सूचित किए बिना ही संबंधित मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा. यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 (RP Act 1950) की धाराओं 13B और 14-23 में निर्धारित प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है.
सॉफ्टवेयर में एक "तार्किक और कार्यात्मक खराबी" का संकेत देते हुए टीएमसी ने कहा, "इस मुद्दे का बिना किसी देरी के समाधान किया जाना चाहिए. ऐसी खामियों की मौजूदगी यह साबित करती है कि वर्तमान में उपयोग किया जा रहा सॉफ्टवेयर इस पहलू पर दोषपूर्ण है. साथ ही, चुनाव आयोग ने खुद 24 नवंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में स्वीकार किया है कि यह सॉफ्टवेयर 'डी-डुप्लीकेशन' के मोर्चे पर भी दोषपूर्ण या अक्षम है."
पार्टी ने कहा, "यह चौंकाने वाली बात है कि बड़े पैमाने पर SIR एक्सरसाइज न सिर्फ BLOS, EROs और AEROs जैसे अलग-अलग अधिकारियों के लिए बिना किसी पब्लिक गाइडलाइन के की जा रही है, बल्कि ECI खराब ऐप्स का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे वोटरों को बेवजह नोटिस जारी करके वोटरों को वोट देने से पहले कभी नहीं रोका जाएगा. इससे भी ज़्यादा चिंता की बात यह है कि वोटरों को सेंट्रली जेनरेटेड नोटिस जारी करके कानूनी तौर पर तय ERO और AERO रूट को दरकिनार किया जा रहा है."
इसके अलावा, इसने सीनियर सिटिजन, PwDs और बीमार वोटरों पर पड़ने वाली "मुश्किलों", "चुनिंदा टारगेटिंग" और घुसपैठ के आरोपों पर भी चर्चा की गयी.
इसमें कहा गया, "अगर SIR का मकसद गैर-कानूनी घुसपैठियों का पता लगाना, उन्हें वोटर लिस्ट से हटाना और उनका कानूनी तरीके से देश निकाला पक्का करना था, तो यह साफ नहीं है कि बांग्लादेश या म्यांमार के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले दूसरे राज्यों में ऐसा प्रोसेस क्यों नहीं किया गया. पश्चिम बंगाल को खास तौर पर निशाना बनाया गया है, जिससे यह गंभीर चिंता पैदा हो रही है कि इस काम का मकसद आम बंगाली वोटरों को परेशान करना, डराना और बेइज्जत करना हो सकता है."
TMC ने आगे कहा, "पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से लगभग 58 लाख वोटर्स के नाम पहले ही हटा दिए गए हैं, फिर भी इलेक्शन कमीशन ने यह नहीं बताया है कि इनमें से कितने नाम हटाए गए हैं, जिसमें विदेशी नागरिक शामिल हैं, वही कैटेगरी जिसे SIR टारगेट करने का दावा करता है."
पार्टी ने ज़ोर देकर कहा कि इन कामों का कुल असर, सेलेक्टिव टारगेटिंग, कम टाइमलाइन, गुमराह करने वाले दावे, ज़्यादा जांच और ट्रांसपेरेंसी की कमी, पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया की फेयरनेस और इम्पार्शियलिटी पर भरोसे को कम करती है.
टीएमसी ने चुनाव आयोग से मांग की कि 'तार्किक विसंगतियों' के तहत चिह्नित मतदाताओं की विधानसभावार, बूथवार और श्रेणीवार सूची सार्वजनिक जांच के लिए प्रकाशित की जाए, क्योंकि यह काम उसी दोषपूर्ण सॉफ्टवेयर द्वारा किया गया है (जैसा कि चुनाव आयोग ने 24 नवंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दावा किया था).
साथ ही, उन्होंने मांग की कि चिकित्सा समस्याओं या गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर-घर जाकर या टेलीफोनिक सत्यापन की सुविधा दी जाए. टीएमसी ने मतदाता सूची से हटाए गए विदेशी नागरिकों की सही संख्या बताने और माइक्रो-ऑब्जर्वर की चुनिंदा तैनाती व अलग-अलग समयसीमा के लिए स्पष्ट स्पष्टीकरण देने की भी मांग की है.
मीडिया को संबोधित करते हुए, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इन मुद्दों की जानकारी देते हुए कहा, "लोकतंत्र से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. बंगाल के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रहेगी - जनविरोधी भाजपा और उसके सहयोगी चुनाव आयोग के सामने एक इंच भी समर्पण नहीं किया जाएगा." उन्होंने आरोप लगाया कि "वोट चोरी ईवीएम में नहीं हो रही है, बल्कि यह मतदाता सूची में हो रही है."
इसे भी पढ़ेंः

