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चंडीगढ़ का अनोखा "टाइम बैंक"... यहां पैसा नहीं बल्कि जमा होता है समय, जानें लेन-देन का पूरा प्रोसेस

चंडीगढ़ में टाइम बैंक है. यहां पैसा नहीं बल्कि समय जमा किया जाता है, आईए जानते हैं पूरा प्रोसेस ...

Chandigarh Time Bank
चंडीगढ़ का अनोखा "टाइम बैंक" (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 26, 2026 at 4:35 PM IST

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Updated : February 26, 2026 at 5:13 PM IST

6 Min Read
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चंडीगढ़ से नगमा सिंह की रिपोर्ट

चंडीगढ़: चंडीगढ़ का “टाइम बैंक” इन दिनों चर्चा मैं है. जी हां, ये एक ऐसा बैंक है, जहां पैसा नहीं बल्कि समय जमा किया जाता है. दरअसल, आज के बदलते दौर में कई बुजुर्ग ऐसे हैं, जो घर में अकेले रहते हैं या रोजमर्रा के कामों के लिए किसी सहारे की आवश्यकता महसूस करते हैं. ऐसे में यह पहल उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है. इस व्यवस्था की खास बात यह है कि इसमें पैसे का लेन-देन नहीं होता, बल्कि “समय” जमा किया जाता है. जो सदस्य बुजुर्गों की सेवा में अपना समय देते हैं, वही समय उनके खाते में दर्ज हो जाता है और जरूरत पड़ने पर वे या उनका परिवार उस समय का लाभ ले सकते हैं.

ऐसे काम करता है ‘टाइम बैंक’ मॉडल: बैंक के सदस्यों की मानें तो इस पहल के तहत सदस्य अपने इलाके के आधार पर जुड़े रहते हैं. जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की मदद करते हैं. सेवा देने वाले सदस्य का समय डिजिटल पासबुक में दर्ज होता है. जब उन्हें या उनके परिजनों को सहायता की जरूरत होती है, तो वे उस जमा समय का उपयोग कर सकते हैं. संस्था का उद्देश्य साफ है-समाज में सहयोग और संवेदनशीलता की भावना को बढ़ावा देना. “समय दीजिए, सेवा पाइए” के संदेश के साथ यह मॉडल लोगों को निस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित करता है.

जानें लेन-देन का पूरा प्रोसेस (ETV Bharat)

सुरक्षा और पारदर्शिता को प्राथमिकता: टाइम बैंक में सुरक्षा को सबसे अधिक अहमियत दी गई है. सेवा देने और लेने वाले दोनों का पंजीकृत सदस्य होना अनिवार्य है. सदस्यता के लिए फोटो और पहचान पत्र की केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी होती है. जांच के बाद ही सदस्यता को मंजूरी मिलती है. किसी भी सेवा से पहले संबंधित सदस्य की जानकारी बुजुर्ग या उनके परिवार को दे दी जाती है. सेवा पूरी होने के बाद फीडबैक लिया जाता है. यदि किसी सदस्य के खिलाफ अनुचित व्यवहार की शिकायत मिलती है, तो उसकी सदस्यता तुरंत रद्द कर दी जाती है. संस्था में जाति, धर्म या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता.

Chandigarh Time Bank Model
“समय दीजिए, सेवा पाइए” (ETV Bharat)

मदद पाने की पूरी प्रक्रिया: जरूरतमंद सदस्य सबसे पहले वेबसाइट पर लॉगिन कर सहायता का अनुरोध दर्ज करता है या व्हाट्सएप ग्रुप अथवा एडमिन को फोन पर जानकारी देता है. एडमिन अनुरोध को रिकॉर्ड कर संबंधित पिनकोड क्षेत्र के इच्छुक सदस्य को सेवा के लिए नामित करता है. सेवा देने वाला सदस्य तय समय पर पहुंचकर मदद करता है. काम पूरा होने के बाद सेवा का समय डिजिटल पासबुक में दर्ज हो जाता है. सदस्यों को छोटे-छोटे समूहों में जोड़ा जाता है और हर महीने बैठक कर आपसी परिचय और भरोसे को मजबूत किया जाता है.

Chandigarh Time Bank Model
सेवा के बदले मिलता है समय (ETV Bharat)

तीन तरह की मिलती है सेवा: टाइम बैंक के तहत तीन प्रमुख प्रकार की सहायता दी जाती है. पहला, घर पर अकेले रहने वाले बुजुर्गों को समय देकर उनका अकेलापन दूर करना. दूसरा, उन्हें डॉक्टर, डेंटिस्ट, मंदिर, पार्क या अन्य जरूरी कार्यों के लिए साथ ले जाना. तीसरा, अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में सहायक के रूप में देखभाल करना. इन सेवाओं के माध्यम से बुजुर्गों को न केवल सहारा मिलता है, बल्कि उन्हें भावनात्मक संबल भी मिलता है.

Chandigarh Time Bank Model
सेवा कर जमा कर सकते हैं अपना टाइम (ETV Bharat)

निःशुल्क मिलती है सदस्यता: इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई सदस्यता शुल्क नहीं लिया जाता और न ही सेवा के बदले कोई पैसा दिया या लिया जाता है. एडमिन भी बिना किसी भुगतान के अपनी सेवाएं देते हैं. संस्था का मानना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल समाज में सहयोग की भावना को बढ़ाना और बुजुर्गों को सम्मानजनक सहारा देना है.

Chandigarh Time Bank Model
टाइम बैंक के कर्मचारी (ETV Bharat)

जानें क्या कहते हैं संस्था के फाउंडर: संस्था के फाउंडर पी.सी. जैन ने कहा कि, "जरूरत पड़ने पर सदस्य वेबसाइट, व्हाट्सएप ग्रुप या एडमिन को फोन करके मदद मांग सकते हैं. सेवा पूरी होने पर दिए गए समय की एंट्री सदस्य के खाते में दर्ज हो जाती है. इसका मकसद सिर्फ एक है, बुजुर्गों को सहारा देना और समाज में सहयोग की भावना को बढ़ाना. समय दीजिए, सेवा पाइए’ का संदेश लोगों को आगे आने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है."

एक घटना जिसने सोच बदल दी: टाइम बैंक से जुड़े अरुणेश अग्रवाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि, "मैं एक घटना के बाद इस पहल से जुड़ा. एक बुजुर्ग व्यक्ति ने मुझसे मदद मांगी थी, लेकिन उस समय मैं दूसरे शहर में था. मैंने अपने परिचितों को उस व्यक्ति के बारे में बताया, पर कोई भी मदद के लिए उनके घर नहीं पहुंचा. अंत में मैं खुद अंबाला से वापस आया, उन्हें अस्पताल लेकर गया और समय रहते उनका इलाज करवाया. उस घटना ने मुझे पूरी तरह बदल दिया. आज मैं कई लोगों की मदद के लिए खुद उनके पास पहुंच जाता हूं."

चंडीगढ़ में बढ़ रहा कारवां: टाइम बैंक ऑफ इंडिया के सदस्य और चंडीगढ़ में इसकी देखरेख कर रहे आई.डी. सिंह ने बताया, "चंडीगढ़ में यह पहल 2019 में शुरू हुई थी. उस समय केवल पांच लोग इस बैंक के सदस्य बने थे. आज करीब 450 लोग इससे जुड़ चुके हैं. सदस्य अपने समय की मांग करते हैं और उन्हें समय उपलब्ध करवाया जाता है. लोगों में इस अनोखी पहल के प्रति उत्साह बढ़ रहा है और अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ रहे हैं."

समाज को जोड़ती अनोखी पहल: टाइम बैंक की यह पहल न केवल बुजुर्गों को सहारा दे रही है, बल्कि समाज में आपसी विश्वास और सहयोग की भावना भी मजबूत कर रही है. बिना किसी आर्थिक लेन-देन के केवल समय के आदान-प्रदान पर आधारित यह मॉडल सामाजिक जिम्मेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभर रहा है. “समय दीजिए, सेवा पाइए” का संदेश अब चंडीगढ़ से आगे अन्य शहरों तक पहुंचने लगा है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में और भी लोग इस नेक काम से जुड़ेंगे.

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Last Updated : February 26, 2026 at 5:13 PM IST