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हिसार में हाइड्रोजन ड्रोन किया गया लॉन्च, कृषि दर्शन एक्सपो में बताई गई खूबियां, किसानों को मिलेगा फायदा

हिसार में चल रहे कृषि दर्शन एक्सपो में हाइड्रोजन ड्रोन को लॉन्च किया गया है.

HISAR FARMERS FAIR
हिसार में हाइड्रोजन ड्रोन किया गया लॉन्च (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 15, 2026 at 1:55 PM IST

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हिसारः टीटीसी हिसार में तीन दिवसीय कृषि दर्शन एक्सपो में शनिवार को हाइड्रोजन ड्रोन लॉन्च किया गया है. इस दौरान हरियाणा के कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा और राज्य सभा सदस्य सुभाष बराला ने मेले में हाइड्रोजन ड्रोन के बारे में जानकारी ली. टीटीसी के डायरेक्टर मुकेश जैन ने ड्रोन के बारे में जानकारी दी. बड़ी संख्या में किसानों ने भी स्टॉल पर जाकर ड्रोन के बारे में जानकारी ली.

ड्रोन की खासियतः हिसार टीटीसी मेले में आए गो ग्रीन कंपनी के अधिकारी कुणाल प्रताप सिंह ने बताया कि जल्द ही मार्केट में इंडिया का पहला हाइड्रोजन ड्रोन उपलब्ध होगा. इसमें तीन किलो हाइड्रोजन यूज़ किया जाता है और तीन घंटे आसमान में उड़कर ये फसलों पर स्प्रे करने में सक्षम है. वहीं बैटरी वाले ड्रोन को 3 घंटे में कई बार चार्ज करना पड़ता है. हाइड्रोजन ड्रोन की प्रमुख विशेषताएं पारंपरिक बैटरी ड्रोन की तुलना में 3 घंटे तक लगातार उड़ान भरने करने की क्षमता है. ये फ्यूल सेल आधारित, शून्य-उत्सर्जन और पर्यावरण अनुकूल है.

हिसार में हाइड्रोजन ड्रोन किया गया लॉन्च (Etv Bharat)

छिड़काव में लगता है कम पानीः इससे पारंपरिक तरीकों की तुलना में 90 प्रतिशत तक पानी की बचत संभव है. परंपरागत दवा छिड़काव के अनुपात में इसमें काफी कम पानी लगता है. इस ड्रोन में मात्र दस लीटर पानी एक एकड़ में लगता है. ये हाइड्रोजन ड्रोन दस से पचास किलो दवा डाल कर उड़ सकता है. किसान मार्केट में स्वयं खरीद सकते हैं. कई छोटे-छोटे किसान मिलकर भी ड्रोन खरीद सकते हैं.

इन ड्रोनों को चलाने के लिए 5 दिवसीय ट्रेनिंग अनिवार्यः अभी देश में हजारों किसान बैटरी आधारित ड्रोन का उपयोग करते हैं. इसे चलाने के डीजीसीए प्रमाणित संस्थानों से 5 दिनों की ट्रेनिंग अनिवार्य है. खेती में मजदूरों की समस्या को ड्रोन आसानी से ठीक कर देगा.

माइनस 40 से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान में कार्य करने में सक्षमः मल्टी स्पेक्ट्रल सेंसर युक्त ड्रोन से कीट, रोग, फसल स्वास्थ्य और पोषण की कमी का समय रहते पता लगाया जा सकता है. ड्रोन के उपयोग से किसान रसायनों के सीधे संपर्क में आने से बचते हैं, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी कम होता है. माइनस 40 से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान में कार्य करने में यह ड्रोन सक्षम है.

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