आधार और UDISE की तकनीकी गड़बड़ी से मराठी स्कूलों के अस्तित्व पर संकट, क्या है पूरा मामला
महाराष्ट्रः सरकारी रिकॉर्ड में आधार और यूडीआईएसई-प्लस की तकनीकी खामियों के कारण हजारों छात्र लापता बताए जा रहे हैं, जबकि वे स्कूल जा रहे हैं.


Published : January 9, 2026 at 8:41 PM IST
मुंबई: महाराष्ट्र में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. आधार और 'यूडीआईएसई प्लस' (UDISE Plus) शैक्षिक पंजीकरण प्रणालियों में गंभीर खामियों के कारण सरकारी रिकॉर्ड से हजारों छात्र 'गायब' हो गए हैं. डर है कि इसका सीधा असर मराठी माध्यम के स्कूलों पर पड़ेगा, क्योंकि छात्रों की दर्ज संख्या में कमी आने से स्कूलों को बंद करने के फैसले लिए जा सकते हैं.
इस सिस्टम की विसंगतियों के कारण, कई छात्र जो वास्तव में स्कूलों में मौजूद हैं, वे आधिकारिक रिकॉर्ड में दिखाई नहीं दे रहे हैं. नतीजतन, शिक्षकों के पदों में कटौती की जा रही है, कुछ जगहों पर कक्षाएं बंद की जा रही हैं और कुछ स्कूलों पर तो पूरी तरह बंद होने का खतरा मंडरा रहा है.
सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?
यूडीआईएसई प्लस (UDISE Plus) की 2023-24 की राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में लगभग 97.7 प्रतिशत छात्रों ने अपना आधार नंबर उपलब्ध करा दिया है. इसका मतलब है कि ज्यादातर छात्रों ने अपने आधार नंबर दे दिए हैं. हालांकि, 2025 तक महाराष्ट्र के यूडीआईएसई प्लस पोर्टल पर उपलब्ध डेटा एक अलग ही तस्वीर पेश करता है.
- यूडीआईएसई प्लस में पंजीकृत कुल छात्र: 2,14,68,288
- आधार जानकारी जमा की गई: 2,09,69,529
- इनमें से वैध आधार (सत्यापित): 2,03,21,408
- अवैध आधार: 5,78,433
- आधार नहीं दिया गया: 4,98,759
- सत्यापन प्रक्रिया के अधीन: 69,688
स्कूल में मौजूद, लेकिन कागजों पर गायब
यूडीआईएसई प्लस सिस्टम में अनिवार्य आधार सत्यापन के कारण, कई छात्रों के रिकॉर्ड 'अवैध', 'नहीं दिया गया' या 'सत्यापन के अधीन' जैसी श्रेणियों में फंसे हुए हैं. नतीजा यह है कि भले ही ये छात्र नियमित रूप से कक्षाओं में आ रहे हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इन्हें स्कूल से बाहर दिखाया जा रहा है. इससे इन छात्रों को 'आउट ऑफ स्कूल' (स्कूल न जाने वाले) माने जाने का खतरा पैदा हो गया है. इसका सीधा असर स्कूलों के नामांकन आंकड़ों पर पड़ रहा है, जिससे शिक्षकों की भर्ती, सरकारी अनुदान, मध्याह्न भोजन योजना (मिड-डे मील), छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षिक सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं.
वैध आधार कार्ड न होने से क्या समस्या है?
शिक्षा विभाग के संभागीय उप निदेशक राजेश कंकाल ने एक अजीब तर्क देते हुए कहा, "कई स्कूलों में कुल छात्रों में से केवल पांच प्रतिशत के पास ही अपडेटेड आधार कार्ड नहीं हैं. इसलिए, मुझे नहीं लगता कि अनुदान प्राप्त स्कूलों को बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा." इसके अलावा, कंकाल ने आधिकारिक बयान देते हुए कहा, "चूंकि आधार कार्ड होना अनिवार्य है, इसलिए स्कूलों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे छात्रों से आधार कार्ड की मांग करें."
शिक्षा अधिकारी की प्रतिक्रिया
राज्य के एक वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "यू-डीआईएसई प्लस (U-DISE Plus) केवल एक डेटा एकत्र करने वाली प्रणाली है. लेकिन अगर इस प्रणाली की तकनीकी खामियां सीधे स्कूलों को प्रभावित कर रही हैं, तो यह एक गंभीर मामला है. जो छात्र वास्तव में कक्षा में मौजूद है, उसे 'स्कूल से बाहर' (out of school) दिखाया जाना नीतिगत विफलता है. सरकार को इस मामले को तुरंत सुधारना चाहिए.
प्रिंसिपल का आक्रोश
गोवंडी स्थित जागृति विद्यामंदिर स्कूल के प्रिंसिपल राजन महाडेश्वर ने अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए कहा, "हमारे स्कूल में 430 छात्र व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहते हैं. लेकिन यूडीआईएसई प्लस (UDISE Plus) सिस्टम में केवल 380 ही दिखाई दे रहे हैं. शेष 50 छात्र 'अवैध आधार' या 'लंबित सत्यापन' के कारण फंसे हुए हैं. कल सरकार कहेगी कि छात्र कम हैं, फिर कक्षाएं बंद कर दी जाएंगी, शिक्षकों की संख्या कम कर दी जाएगी और अंततः स्कूल ही बंद हो जाएगा. यह केवल एक तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि मराठी माध्यम के स्कूलों के अस्तित्व का सवाल है."
शिक्षा कार्यकर्ताओं की चेतावनी
शिक्षा के अधिकार आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता रोहन वाडकर ने कहा, "यह सिर्फ आंकड़ों की गड़बड़ी नहीं है. ऐसा लगता है कि यह गरीब, ग्रामीण और मराठी माध्यम के छात्रों को बाहर करने का एक तरीका है. जिनके पास स्मार्टफोन नहीं हैं, जिनके पास दस्तावेजों की कमी है, या जिनके नामों की स्पेलिंग में अंतर है, उन्हें इस सिस्टम से बाहर फेंका जा रहा है. आज यह आधार और यूडीआईएसई की गड़बड़ी है, कल स्कूल बंद होंगे और परसों शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे- यह पूरी तरह से एक 'चेन रिएक्शन' है."
शिक्षक संघों, अभिभावक संघों और शिक्षा कार्यकर्ताओं ने सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- आधार-यूडीआईएसई की अनिवार्यता या 'फ्लैग' सिस्टम को तुरंत रद्द किया जाए
- स्कूल में छात्र की व्यक्तिगत उपस्थिति को ही प्राथमिकता दी जाए
- स्कूल स्तर पर आधार अपडेट करने के लिए मुफ्त शिविर आयोजित किए जाएं
- इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्कूल को बंद न किया जाए
- किसी भी छात्र को रिकॉर्ड में 'स्कूल से बाहर' घोषित न किया जाए
एडमिशन से इनकार करना अवैध
केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आधार कार्ड न होने के कारण किसी भी छात्र को स्कूल में प्रवेश देने से मना नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, स्कूल में दाखिले के लिए आधार अनिवार्य नहीं है. हालांकि, 'यूडीआईएसई प्लस' (UDISE Plus) के तकनीकी क्रियान्वयन के कारण, वास्तविकता में छात्रों का शैक्षिक भविष्य खतरे में पड़ रहा है.
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