थान सिंह की पाठशाला: जहां सीखी थी जमीन पर बैठकर वर्णमाला, वहां आज साक्षी बनीं शिक्षिका
"थान सिंह की पाठशाला" आज कई गरीब बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रही है. देखिए संवाददाता धनंजय वर्मा की रिपोर्ट

Published : June 2, 2026 at 2:29 PM IST
|Updated : June 2, 2026 at 3:03 PM IST
नई दिल्ली: पुरानी दिल्ली के लाल किले के पास एक मंदिर में चलने वाली "थान सिंह की पाठशाला" आज कई गरीब बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रही है. इसी पाठशाला में कभी जमीन पर बैठकर वर्णमाला और गिनती सीखने वाली 18 वर्षीय साक्षी अब छोटे बच्चों को पढ़ाकर उनमें शिक्षा की अलख जगा रही हैं. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली साक्षी अब 10वीं पास कर 11वीं कक्षा में पहुंच चुकी हैं और आईपीएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं.
2015 से थान सिंह की पाठशाला है संचालित : ईटीवी भारत से विशेष बातचीत में साक्षी ने बताया कि वह वर्ष 2015 से थान सिंह की पाठशाला में पढ़ने आ रही हैं. फिलहाल उनकी गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं. ऐसे में वह अपने से छोटे बच्चों को पढ़ा रही हैं. उन्होंने बताया कि वह पाठशाला की सबसे पुरानी छात्राओं में शामिल हैं. ऐसे में बच्चे उनकी बात आसानी से मानते हैं और उन्हें छोटे बच्चों को पहाड़े, गिनती, वर्णमाला, एबीसीडी और गणित-अंग्रेजी पढ़ाने में बेहद अच्छा लगता है.
माता सुंदरी कॉलेज से यहां पढ़ाने आती हैं शिक्षिकाएं : साक्षी ने बताया कि माता सुंदरी कॉलेज से आने वाली शिक्षिकाएं रोज दोपहर करीब तीन बजे तक पहुंच जाती हैं और बच्चों को पढ़ाती हैं. वह खुद सबसे पहले पहुंचकर बच्चों को बैठाना और पढ़ाई शुरू करवाना शुरू कर देती हैं. उन्होंने कहा कि थान सिंह की पाठशाला ने उनकी जिंदगी बदल दी. हालांकि 10वीं कक्षा में उम्मीद के मुताबिक अंक नहीं आए, लेकिन अब उन्होंने आगे बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प लिया है.




पाठशाला की दिल्ली में चार शाखाएं : थान सिंह ने बताया कि आज थान सिंह की पाठशाला की चार शाखाएं संचालित हो रही हैं. इनमें लाल किले के पास, त्रिलोकपुरी, गीता कॉलोनी व यमुना खादर की पाठशालाएं शामिल हैं. यहां माता सुंदरी कॉलेज समेत अन्य कॉलेजों के वॉलंटियर्स बच्चों को पढ़ाने आते हैं. बच्चों से किसी प्रकार की फीस नहीं ली जाती. समाजसेवा के तहत मिलने वाले सहयोग से किताबें, कॉपी व पेन बच्चों को उपलब्ध कराए जाते हैं. गुरुद्वारा शीशगंज से रोज बच्चों के लिए लंगर भी आता है.

बच्चियों के नाम बनाई पाठशाला की ट्रस्ट: थान सिंह ने बताया कि उन्होंने थान सिंह की पाठशाला नाम से एक ट्रस्ट बनाया है, लेकिन वह खुद इसके सदस्य तक नहीं हैं. ट्रस्ट में स्कूल की बच्चियां ही सदस्य हैं. उनका उद्देश्य बच्चियों को शिक्षित कर समाज में सशक्त बनाना है. उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों को जरूर पढ़ाएं. जो बच्चे पढ़ना चाहते हैं उन्हें अवसर दें और जो नहीं पढ़ना चाहते, उन्हें प्रेरित करें, क्योंकि शिक्षा ही समाज में बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम है.
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