ETV Bharat / bharat

तेलंगाना पंचायत चुनाव: खूब बहाया पैसा, कई बिजनेसमैन और रियल एस्टेट कारोबारी बने सरपंच

तेलंगाना में हाल में हुए ग्राम पंचायत चुनावों में सरपंच बनने के लिए कई रियल एस्टेट कारोबारियों और रेत व्यापारियों ने खूब पैसा लुटाया.

Telangana Panchayat Elections 2025 Many Real Estate Agents and Businessmen Elected as Sarpanch
तेलंगाना पंचायत चुनाव: खूब बहाया पैसा, कई बिजनेसमैन और रियल एस्टेट कारोबारी बने सरपंच (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Hindi Team

Published : December 20, 2025 at 2:30 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

हैदराबाद: तेलंगाना में हाल ही में हुए ग्राम पंचायत चुनावों में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की. कांग्रेस ने आधे से अधिक सरपंच पदों पर कब्जा जमाया. खास बात यह है कि सरपंच पदों के लिए कई रियल एस्टेट और रेत व्यापारी भी चुने गए हैं.

वैसे तो सरपंच का पद... कभी एक प्रतिष्ठित पद था जिसपर गांव में प्रभाव रखने वाले और जनता की सेवा करने वाले निर्वाचित होते थे. लेकिन समय के साथ, अब इस पद पर पैसे वालों का कब्जा होता जा रहा है. आरोप लग रहा है कि तेलंगाना ग्राम पंचायत चुनावों में कई जगहों पर रियल एस्टेट और रेत के व्यापारियों ने इस पद को हथियाने के लिए वोटरों को रिश्वत दी है.

मेदक जिले के दो हजार से ज्यादा मतदाताओं वाले एक गांव में, एक कैंडिडेट जो पिछले दो चुनाव लड़कर हार गया था, उसे लोगों की हमदर्दी मिली. पूरे गांव को लगा कि इस बार उसकी जीत पक्की है. उस गांव में, जहां तीन कैंडिडेट चुनाव लड़ रहे थे, एक ऐसा आदमी जिसके जीतने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन वह जीत गया. गांव में अफवाह है कि इस आदमी ने, जिसने रियल एस्टेट के कारोबार से बहुत पैसा कमाया था, पोलिंग से एक रात पहले हर वोट का दाम तय किया और रिजल्ट को अपने पक्ष में कर लिया.

इसी तरह आदिलाबाद जिले में, पेंगंगा नदी बेसिन (Penganga River Basin) से सटे कुछ गांवों में रेत के व्यापारियों को सरपंच चुना गया है. पहले जो सरपंच थे, उन्होंने इस धंधे को अपनी कमाई का जरिया बना लिया था और करोड़पति बन गए थे. इस बार भी कुछ रेत व्यापारी इसी पैटर्न पर चुनाव मैदान में उतरे, उन्हें लगा कि यह पद हासिल करने से उनके गैर-कानूनी धंधे को समर्थन मिलेगा. उन्होंने चुनाव में खूब खर्च किया और चुनाव जीत गए.

करीमनगर जिले में भी, गोदावरी और मनेरू नदी बेसिन के किनारे बसे गांवों में, रेत का कारोबार करने वाले और अमीर लोग ही सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि खूब पैसा खर्च करने के अलावा, कुछ गांवों में जहां उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, वहां सरपंच की सीट नीलामी से खरीदी गई.

इसी प्रकार, निजामाबाद जिले में, कुछ गांवों में सरपंच का चुनाव जीतने के लिए कुछ व्यापारियों ने 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक खर्च किए. आर्मूर मंडल की कुछ बड़ी पंचायतों में हर वोट पर 3,000 रुपये तक खर्च किए गए. नंदीपेट और बालकोंडा मंडल में, कुछ गांवों में बिजनेसमैन जीते.

राज्य के लगभग सभी जिलों में यही हाल है. खासकर रियल एस्टेट से जुड़े व्यापारियों ने सरपंच बनने के लिए लाखों रुपये खर्च किए. कुछ जगहों पर, भले ही उन्होंने सीधे चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उन्होंने सरपंच के तौर पर अपनी जीत पक्की करने के लिए अपने पसंदीदा उम्मीदवारों पर पैसे खर्च किए.

लोगों ने धनी उम्मीदवारों को नकारा
कुछ पंचायतों में वोटरों ने यह मानकर वोट किया कि सबकुछ सिर्फ पैसा ही नहीं है; उन्होंने ऐसे उम्मीदवारों पर भरोसा जताया, जो गांव के लोगों की सेवा करे. करीमनगर जिले के 2,400 वोटरों वाले एक गांव में, लोगों ने एक युवक को अपना सरपंच चुना, जिसके पास ज्यादा पैसे नहीं थे. यहां, विरोधी उम्मीदवारों के बहुत ज्यादा खर्च करने के बावजूद, उन्हें मनचाहा नतीजा नहीं मिला.

यह भी पढ़ें- तेलंगाना पंचायत चुनाव 2025 में कांग्रेस का दिखा दम, बीआरएस दूसरे और BJP थर्ड नंबर पर रही