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तेलंगाना: पिता के अनुशासन से तीनों बेटे बने डॉक्टर, अब युवाओं के प्रेरणास्रोत

एक रिटायर्ड ऑफिसर ने अपने तीन बेटों को अनुशासन, कड़ी मेहनत और पढ़ाई के प्रति लगन जैसे अच्छे संस्कार दिए जिससे वे डॉक्टर बन गए.

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सरकारी स्कूल में पढ़कर पिता के अनुशासन से तीनों बेटे बने डॉक्टर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 11, 2026 at 2:44 PM IST

3 Min Read
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ममाद: अक्सर कहा जाता है कि सफलता महान लोगों से सीखने से मिलती है लेकिन आदिलाबाद जिले के नेरादिगोंडा के तीन भाइयों के लिए प्रेरणा उन्हें अपने ही घर में मिली. अपने पिता के समर्पण को देखकर और एक-दूसरे को मोटिवेट करके, तीनों अलग-अलग फील्ड में गैजेटेड ऑफिसर बन गए.

पशुपालन विभाग के रिटायर्ड ऑफिसर फजल अहमद और उनकी पत्नी अप्सरी बेगम ने अपने तीन बेटों, मुख्तार अहमद, विकार अहमद और मुश्ताक अहमद को अनुशासन, कड़ी मेहनत और पढ़ाई के प्रति लगन जैसे अच्छे संस्कार दिए. तीनों भाइयों ने अपने पैतृक गांव के सरकारी स्कूल से क्लास 10 तक की पढ़ाई पूरी की.

अपने पिता की सच्ची सेवा और सादे जीवन को देखकर, भाइयों ने पक्के इरादे से उच्च शिक्षा की ओर बढ़ने का फैसला किया. आज, जब लोग उन्हें एक साथ देखते हैं, तो वे गर्व से कहते हैं कि एक ही घर में एक पशु चिकित्सक, एक पौधों का डॉक्टर और एक इंसानों का डॉक्टर रहते हैं.

तीन बेटे, सभी गैजेटेड ऑफिसर

अभी निर्मल में बसे हुए तीनों भाई सरकारी पदों पर काम कर रहे हैं. सबसे बड़े बेटे मुख्तार अहमद ने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए बीवीएससी की पढ़ाई की. दूसरे प्रयास में एग्जाम पास करने के बाद वह वेटरनरी ऑफिसर बन गए. अब नरसपुर (जी) में पोस्टेड मुख्तार कहते हैं कि उन्होंने ध्यान से प्लानिंग करके और धीरे-धीरे काम करके अपना लक्ष्य हासिल किया.

दूसरा बेटा, विकार अहमद, सारंगापुर में एग्रीकल्चर ऑफिसर है. अपने पिता और बड़े भाई से प्रेरणा लेकर, उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद एजीबीएससी में एडमिशन लिया. अपनी पढ़ाई में बेहतरीन होने के लिए जाने जाने वाले विाकर ने जल्द ही एईओ भर्ती परीक्षा पास कर ली और बाद में एओ के पद पर प्रमोशन पाया. विकार कहते हैं कि उनके पिता के सब्र और उनके भाई की लगन ने सफलता की राह में उनकी मदद की.

सबसे छोटे, मुश्ताक अहमद, निर्मल मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं. एमबीबीएस और एनेस्थीसिया में एमडी पूरा करने के बाद उन्होंने अपना मेडिकल करियर शुरू किया. मुश्ताक कहते हैं कि अपने भाइयों को अनुशासन से पढ़ाई करते देखकर उन्हें बड़ा लक्ष्य रखने की प्रेरणा मिली. अपने पिता और भाई-बहनों के मार्गदर्शन से उन्होंने धीरे-धीरे अपना सपना पूरा किया.

माता-पिता को गर्व

फजल अहमद और अप्सरी बेगम के लिए अपने बेटों को जिम्मेदार ऑफिसर बनते देखना सबसे बड़ा इनाम रहा है. उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि मजबूत पारिवारिक मूल्य, अनुशासन और आपसी प्रोत्साहन शानदार सफलता दिला सकते हैं. नेरादिगोंडा में अहमद परिवार अब छात्रों और माता-पिता दोनों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गया है.

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