हजारीबाग में चाय की खेती, उत्पादकों की सूची में अब जुड़ेगा झारखंड का भी नाम
हजारीबाग में चाय की खेती की जा रही है. अब वह दिन दूर नहीं जब लोग झारखंड की चाय का मजा लेंगे.

Published : January 4, 2026 at 1:51 PM IST
हजारीबाग: चाय एक ऐसा पेय है, जिसके साथ लाखों लोगों का दिन शुरू होता है. वह दिन दूर नहीं जब हजारीबाग की चाय के साथ आपकी दिनचर्या की शुरुआत होगी. जिले के डेमोटांड़ स्थित कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में बड़े पैमाने पर चाय की खेती हो रही है. यहां ऑर्गेनिक चाय का स्वाद लोगों को मिल रहा है. वर्तमान में केंद्र की चाय कई घरों तक पहुंच रही है. चाय प्रेमी सीधे अनुसंधान केंद्र से इसे प्राप्त कर सकते हैं. निकट भविष्य में यहां टी प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की तैयारी चल रही है, जिससे इसका व्यापारिक लाभ भी किसानों को मिल सकेगा.
भारत का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश, अब झारखंड भी होगा शामिल
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है. उत्तर-पूर्व भारत के पहाड़ी इलाकों में अनुकूल वातावरण के कारण चाय का उत्पादन बड़े स्तर पर होता है, जिसमें असम और पश्चिम बंगाल सबसे आगे हैं. अब झारखंड के हजारीबाग का नाम भी चाय की खेती के लिए जाना जाएगा. जिला मुख्यालय से महज 11 किलोमीटर दूर डेमोटांड़ कृषि पर्यटन केंद्र में चाय की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है.
शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के तहत केवल 2 एकड़ जमीन पर चाय की खेती शुरू की गई थी. जब यह स्पष्ट हो गया कि यहां की मिट्टी चाय की खेती के लिए उपयुक्त है, तो रकबा बढ़ाकर 22 एकड़ कर दिया गया.
विशेषज्ञ बोले: टांड की बंजर जमीन पर लाभकारी है चाय की खेती
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, गोरिया कर्मा के वरिष्ठ वैज्ञानिक पंकज कुमार सिन्हा का कहना है कि छोटे स्तर पर चाय की खेती घाटे का सौदा हो सकती है. शौकिया तौर पर लोग इसे कर सकते हैं, लेकिन 10 से 15 एकड़ टांड (बंजर) जमीन पर चाय की खेती हजारीबाग में लाभकारी साबित हो सकती है. हजारीबाग की मिट्टी चाय की खेती के लिए पूरी तरह उपयुक्त है. कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में बड़े पैमाने पर इसका सफल प्रदर्शन हो रहा है.

22 एकड़ में लगे दो लाख से अधिक पौधे, उम्र 100 साल तक
कृषि अनुसंधान केंद्र में टीवी-25 और टीवी-26 वैरायटी के चाय के पौधे लगाए गए हैं. पूरे 22 एकड़ क्षेत्र में दो लाख से अधिक पौधे हैं. ये पौधे सिलीगुड़ी, नागराकाटा, दार्जिलिंग और बतासी से मंगवाए गए हैं.

चाय की खेती यहां वर्ष 2002 में शुरू हुई थी. शुरुआत में 19 डिसमिल जमीन पर 5000 पौधे लगाए गए थे. बाद में रकबा बढ़ाकर लगभग 2 एकड़ में 13,000 पौधे लगाए गए. इस वर्ष 20 एकड़ भूमि पर लगभग दो लाख पौधे रोपे गए हैं. इन चाय के पौधों की आयु लगभग 100 वर्ष तक होती है. एक बार खेती लग जाने के बाद केवल ट्रिमिंग की जरूरत पड़ती है.

यहां पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती हो रही है. वर्तमान में यहां की चाय का उपयोग मुख्य रूप से लेमन टी के रूप में हो रहा है. आने वाले दिनों में टी लीफ प्रोसेसिंग मशीन से चाय तैयार की जाएगी, जिससे इसका व्यापारिक महत्व और बढ़ जाएगा.

सब्जियों के बाद अब चाय से भी पहचान बनाएगा हजारीबाग
हजारीबाग देश भर में सब्जियों की खेती के लिए प्रसिद्ध है. अब वह समय दूर नहीं जब चाय की खेती के लिए भी यह क्षेत्र जाना जाएगा. यहां की चाय जल्द ही लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाएगी.
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