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किसी विदेशी संस्था ने पहली बार किसी यूनिवर्सिटी में खोला बौद्ध अध्ययन केंद्र, जानें सबकुछ

किसी विदेशी संस्था ने पहली बार किसी भारतीय यूनिवर्सिटी बौद्ध अध्ययन केंद्र खोला है. त्ज़ू ची फाउंडेशन ताइवान ने बीएचयू में बौद्ध अध्ययन केंद्र खोला.

Buddhist Studies at BHU
ताइवान के त्ज़ू ची फाउंडेशन ताइवान ने बीएचयू में बौद्ध अध्ययन केंद्र खोला. (ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 30, 2026 at 9:50 AM IST

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वाराणसी: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग में पहला “त्ज़ू ची महायान बौद्ध प्रैक्टिस सेंटर" खुला है. यह भारत में बौद्ध अध्ययन एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग के क्षेत्र में बड़ा कदम है. किसी विदेशी बौद्ध संस्था द्वारा प्रायोजित यह भारत का प्रथम बौद्ध केंद्र है.

इस दौरान त्ज़ू ची फाउंडेशन ने पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के विद्यार्थियों हेतु 10 पूर्ण छात्रवृत्तियों की भी घोषणा भी की है.

Buddhist Studies at BHU
त्ज़ू ची फाउंडेशन ताइवान ने बीएचयू में बौद्ध अध्ययन केंद्र खोला. (ईटीवी भारत)

केंद्र का संयुक्त उद्घाटन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी एवं विश्वप्रसिद्ध बौद्ध संस्था त्ज़ू ची फाउंडेशन की उपाध्यक्ष पी यू लिन द्वारा कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सुषमा घिल्डियाल की उपस्थिति में किया गया.

पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के तत्वावधान में तथा त्ज़ू ची फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से स्थापित यह केंद्र बौद्ध दर्शन, करुणा, माइंडफुलनेस, मानवीय मूल्यों एवं अंतर-सांस्कृतिक शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने हेतु कार्य करेगा.

कुलपति ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह केंद्र वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा बौद्ध विरासत एवं मूल्यों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

Buddhist Studies at BHU
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग में पहला “त्ज़ू ची महायान बौद्ध प्रैक्टिस सेंटर" खुला . (ईटीवी भारत)

उपस्थित विशिष्ट अतिथियों ने समकालीन समाज में शांति, सद्भाव एवं मानव कल्याण के लिए बौद्ध शिक्षाओं की महत्ता पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में बताया गया कि किसी अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्था के सहयोग से किसी भारतीय विश्वविद्यालय में स्थापित यह अपने प्रकार का प्रथम बौद्ध केंद्र है.

केंद्र के माध्यम से थेरवाद एवं महायान बौद्ध साहित्य के प्रकाशन, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, व्याख्यानमालाओं, ध्यान कार्यक्रमों तथा विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा.

त्ज़ू ची फाउंडेशन की उपाध्यक्ष पी यू लिन ने “अमितार्थसूत्र के अनन्त धम्म एवं अनन्त कल्याणमय जीवन तथा आज के विश्व में दुःख और विभाजन के प्रति बौद्ध धर्म का उत्तर” विषय पर चर्चा की.

अपने व्याख्यान में उन्होंने बताया कि किस प्रकार बौद्ध धर्म की करुणा, मैत्री एवं मानव सेवा की शिक्षाएँ वर्तमान विश्व की पीड़ा एवं विभाजन का समाधान प्रस्तुत करती हैं.
इस अवसर पर सैकड़ों विदेशी छात्र, भिक्षु, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की तथा महायान बौद्ध शिक्षाओं का लाभ प्राप्त किया.