क्या कोरोना जितना ही खतरनाक है H1N1? झारखंड में तेजी से बढ़ रहा प्रकोप, ऐसे करें स्वाइन फ्लू से बचाव
झारखंड में स्वाइन फ्लू का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. डॉक्टरों ने बचाव और इलाज के बारे में जानकारी दी है. रिपोर्ट- उपेंद्र कुमार.

Published : August 29, 2026 at 8:59 PM IST
रांची: झारखंड में स्वाइन फ्लू का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में संदिग्ध मरीजों से लिए गए आठ सैंपल में स्वाइन फ्लू (H1N1) की पुष्टि हुई है. इसके चलते, सभी सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेज और जिला सर्विलांस पदाधिकारियों को अलर्ट रहने और संक्रमण पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही, लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की जा रही है. डॉक्टरों के अनुसार, इससे घबराने की जरूरत नहीं है, बस सावधानी बरतने की जरूरत है.
आखिर क्या है H1N1
H1N1, इन्फ्लुएंजा ए वायरस का एक सबटाइप होता है. वर्ष 2009 में इसी वायरस के कारण वैश्विक महामारी सामने आई थी. बाद में ए(H1N1) वायरस मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरसों में शामिल होकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में नियमित रूप से फैलता रहा. ऐसे में H1N1 की पुष्टि का मतलब यह नहीं है कि 2009 जैसी कोई नई महामारी शुरू हो गई है.
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, मौसमी इन्फ्लुएंजा (स्वाइन फ्लू) एक संक्रामक श्वसन बीमारी है और इसके अधिकांश मरीज लगभग एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ उच्च-जोखिम वाले लोगों में बीमारी गंभीर हो सकती है.
रांची के प्रख्यात इंटरनल रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमालय झा बताते हैं कि इस संक्रमण से बचने के लिए वहीं उपाय करने होते हैं जो कोरोना महामारी के दौरान अपनाए गए थे, जैसे - मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग और संक्रमित रोगियों को आइसोलेट करना. H1N1 का नाम सुनते ही घबराने की जरूरत नहीं है. उन्होंने बताया कि यह संक्रमण कोरोना जैसा घातक और गंभीर नहीं है. इन्फ्लुएंजा वैक्सीन में H1N1 वायरस के स्ट्रेन का एंटीजन होता है, जो स्वाइन फ्लू से सुरक्षा प्रदान करता है.
2009 में आई थी महामारी
वे बताते हैं कि 2009 की महामारी के दौरान यह वायरस मुख्य रूप से सूअर से सूअर और फिर सूअर से इंसान में फैलता था, इसलिए इसे स्वाइन फ्लू कहा जाने लगा. अब यह इंसान से इंसान में फैल रहा है, इसलिए इसे सिर्फ सूअर से फैलने वाला समझना सही नहीं है.

इन्फ्लुएंजा ए H1N1 वायरस से संक्रमित होने पर संक्रमित व्यक्ति को बुखार, पूरे शरीर में तेज दर्द, गले में खराश, उल्टी, पेट में दर्द जैसे लक्षण उभरते हैं. डॉ. झा बताते हैं कि एडवांस रूप में संक्रमित व्यक्ति को निमोनिया हो जाता है, यहां से बीमारी खतरनाक रूप ले सकती है. निमोनिया होने पर कर्ब-65 स्कोरिंग की जाती है. अगर स्कोर 3 या उससे ज्यादा है तो मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है.
उन्होंने बताया कि H1N1 संक्रमण बुजुर्गों और बच्चों में सबसे ज्यादा होता है. इसके अलावा डायबेटिक, क्रॉनिक डिजीज के मरीजों को संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है क्योंकि इनके इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाते हैं, ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
डॉ. हिमालय झा कहते हैं कि स्वाइन फ्लू का इलाज लक्षण आधारित होता है. अगर निमोनिया हो गया है तब एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ती है. शुरुआती कॉम्प्लिकेशन नहीं है तो एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती है. बुखार होने पर पैरासिटामोल, सर्दी के लिए एंटी एलर्जी दिया जाता है.
कैसे फैलता है H1N1
H1N1 मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बोलने या सांस लेने के दौरान निकलने वाले छोटे कणों के जरिए फैल सकता है. संक्रमित हाथों के जरिए आंख, नाक या मुंह छूने पर भी संक्रमण का खतरा रहता है. बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों में संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ सकती है.

सामान्य फ्लू और H1N1 में फर्क
चिकित्सक बताते हैं कि सिर्फ लक्षण देखकर यह निश्चित करना मुश्किल है कि किसी व्यक्ति को H1N1 है या कोई दूसरा वायरल संक्रमण. कई श्वसन वायरस एक जैसे लक्षण पैदा करते हैं लेकिन फ्लू में आमतौर पर अचानक बुखार, सूखी या तेज खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक थकान, नाक बहना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, संक्रमण के बाद स्वाइन फ्लू के लक्षण आम तौर पर 1–4 दिनों में दिखाई देने लगते हैं.
इन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत
H1N1 संक्रमण हर व्यक्ति में गंभीर नहीं होता, लेकिन कुछ कोमॉर्बिड समूहों में जोखिम अधिक रहता है. इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, अस्थमा, हृदय या फेफड़ों की बीमारी जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोग, मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति, कम प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज, स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इन समूहों को गंभीर इन्फ्लुएंजा के लिए अधिक जोखिम वाला मानता है.
बीमारी के गंभीर होने के लक्षण
डॉ. हिमालय झा बताते हैं कि सिर्फ हल्की खांसी या बुखार में घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जब सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, बहुत ज्यादा कमजोरी, लगातार बिगड़ती हालत, असामान्य सुस्ती या पानी की कमी जैसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है. वहीं बच्चों में सांस लेने में कठिनाई, बहुत ज्यादा सुस्ती, नीला पड़ना या गंभीर डिहाइड्रेशन जैसे संकेत विशेष रूप से चिंताजनक माने जाते हैं.

स्वाइन फ्लू H1N1 का इलाज
H1N1 एक वायरल संक्रमण है, इसलिए सामान्य रूप से एंटीबायोटिक इसका इलाज नहीं है. संक्रमण के बाद ज्यादातर मामलों में हल्के आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ सेवन से बीमारी खुद ठीक हो जाती है. डॉक्टर की सलाह के अनुसार लक्षणों का उपचार किया जाता है. वहीं गंभीर बीमारी या हाई-रिस्क मरीजों में डॉक्टर अपने अनुभव के आधार पर एंटीवायरल मेडिसिन्स देते हैं. इन दवाओं का लाभ बीमारी के शुरुआती दौर में, खासकर लक्षण शुरू होने के पहले 48 घंटे में शुरू करने से अधिक हो सकता है.
स्वाइन फ्लू से बचाव के उपाय
स्वाइन फ्लू से बचने का सबसे आसान तरीका है कि आप नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोएं और बिना धुले हाथों से अपनी आंखों, नाक या मुंह को न छुएं. इसके अलावा, खांसते या छींकते समय अपने मुंह को टिश्यू या अपनी कोहनी से ढकें और इस्तेमाल किए गए टिश्यू को सही तरीके से फेंक दें. मास्क पहनना भी फायदेमंद होता है.
अगर किसी में संक्रमण की पुष्टि होती है, तो उन्हें कुछ दिनों के लिए आइसोलेट रखें. बुखार, खांसी या फ्लू जैसी बीमारी के लक्षण होने पर स्कूल, काम या भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने से संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिलती है.
साथ ही, अपने कमरे में हवा के आने-जाने का अच्छा इंतजाम रखें. बंद और भीड़-भाड़ वाली जगहों की तुलना में अच्छी वेंटिलेशन संक्रमण फैलने के जोखिम को कम करने में मदद करती है. इसके अलावा, टीकाकरण के बारे में डॉक्टर से सलाह लें. इन्फ्लूएंजा का टीका मौसमी फ्लू से बचने और गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने के सबसे असरदार उपायों में से एक है. यह स्वास्थ्य कर्मियों और ज्यादा जोखिम वाले समूहों के लोगों के लिए खास तौर पर जरूरी है.
स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार
झारखंड में स्वाइन फ्लू के केस मिलने को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी सिविल सर्जनों को एहतियातन कदम उठाने की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य विभाग में संयुक्त सचिव दिनेश कुमार यादव ने बताया कि पैनिक होने की नहीं बल्कि जागरूक होने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि विभाग सीजनल इन्फ्लुएंजा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.
रांची के सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने कहा कि रांची में कुछ लोगों में H1N1 वायरस के संक्रमण मिलने की जानकारी उन्हें भी मिली है. इसके आलोक में मुख्यालय से मिले दिशा निर्देशों के अनुसार सदर अस्पताल में 10 बेडेड आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है. अस्पताल में दवा की भी कोई कमी नहीं है. उन्होंने कहा कि उनकी अपील होगी कि स्वाइन फ्लू को लेकर पैनिक न हों और इसके प्रसार को रोकने के लिए जरूरी उपाय अपनाएं.
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