सोनीपत की स्वीटी किन्नर बनी मिसाल, डेयरी फार्म से खूब कर रही कमाई, 10 से ज्यादा लोगों को दे रहीं रोजगार
सोनीपत की स्वीटी किन्नर आज डेयरी फार्म चलाकर दूसरों के लिए मिसाल बन चुकी हैं.

Published : March 1, 2026 at 10:50 PM IST
|Updated : March 1, 2026 at 10:56 PM IST
सोनीपतः एक वक्त था जब स्वीटी घर-घर जा कर बधाई मांगने का काम करती थी, लेकिन समय बदला और स्वीटी ने कुछ अलग करने की सोची ओर पशु पालन करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई. स्वीटी आज के समय में करीब 90 दुधारू पशुओं की मदद से स्वीटी प्रधान डेयरी फार्म की मालकिन है. उनकी कहानी काफी ज्यादा प्रेरणादायक है.
दूध बेचने का काम शुरू किया : स्वीटी भी कभी कई किन्नरों की तरह घर-घर जाकर बधाई मांगने का काम करती थी. वे किन्नर समाज की रोहतक गद्दी पर बैठी थी और किन्नरों की प्रधान है. लेकिन उसने कुछ अलग करने की ठानी और बधाई मांगने का काम छोड़ पशु पालन करते हुए दूध बेचने का काम शुरू किया.
स्वीटी के पास 90 दुधारू पशु : स्वीटी ने बताया कि पशु पालन का काम उनके गुरू करते थे. वे गुरु का काम देखा करती थी. उनके निधन के बाद स्वीटी ने काम को नये सिरे से आगे बढ़ाया. चंद भैंसों से शुरू इस कारोबार को स्वीटी काफी आगे बढ़ा चुकी है. आज के समय में करीब 90 दुधारू पशु उनके पास हैं. इन भैंसों का दूध बेच कर वो अच्छा-खासा मुनाफा कमाने के साथ साथ इज्जत का जीवन जी रही हैं.
स्वीटी रोजाना सुबह 3 बजे जगती हैं : स्वीटी ने बताया कि वो रोज सुबह 3 बजे उठती है और पूरा दिन काम में लगी रहती है. काम खत्म कर वो रात को करीब 11 बजे सोती है. उसने अपने डेयरी फार्म 200 गज की जगह से शुरुआत की थी, आज वो करीब 2 हजार गज में फैला हुआ है.
10 से ज्यादा लोगों को मिल रहा है रोजगारः स्वीटी ने बताया कि वह अपने व्यापार के साथ लोगों को रोजगार देने का भी काम कर रही हैं. वर्तमान में 10 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रही है. उसके डेयरी में रोजाना एक से दो क्विंटल दूध का उत्पादन होता है. डेयरी में शुद्धता और स्वच्छता को ध्यान में रखती है. इस कारण डेयरी फार्म पर ग्राहकों की कमी नहीं होती है.
देसी नस्ल की पशुओं को पालेंः स्वीटी ने बताया कि जहां भी पशुओं का मेला लगता हैं, वे जरूर जाती हैं. उनके पास मुर्रा नस्ल से लेकर कई अन्य अच्छी नस्ल की भैसें भी हैं. वे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में लगने वाले पशु मेले में जा चुकी है. वहीं स्वीटी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी अपने घरों में देसी गाय और भैंस जरूर रखें और अपने बच्चों को शुद्ध दूध दें, ताकि वे मिलावटी दूध पीने से बचें.

