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पलामू में जंगलों का होगा सर्वे, तैयार किया जाएगा वर्किंग प्लान, नीलगाय से निपटने के लिए भी बनेगी योजना

पलामू के जंगलों का सर्व होना है. इस दौरान नीलगाय से निपटने के लिए खास योजना बनाई जाएगी.

survey of forests will be conducted in Palamu
पलामू के जंगल (ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 2, 2026 at 5:07 PM IST

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पलामू: झारखंड के पलामू जिले के जंगलों में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक सर्वे किया जाएगा. इस सर्वे के जरिए इन संसाधनों का आंकड़ा जुटाया जाएगा. सरकार जंगलों के लिए एक वर्किंग प्लान तैयार कर रही है. इस प्लान के तैयार होने से पहले पलामू के जंगलों का सर्वे होना है. इस वर्किंग प्लान और सर्वे में जंगलों और वन्यजीवों को बचाने के लिए जरूरी संसाधनों का भी आकलन किया जाएगा.

2025-26 में होने वाले इस सर्वे से पहले, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने 2023 में पलामू के जंगलों से जुड़ा डाटा जारी किया था. फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के डेटा के अनुसार, पलामू क्षेत्र में जंगल का इलाका 2.36 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है. नया सर्वे के दौरान जल स्रोतों, वन्यजीवों, पेड़ों, पौधों, नदियों और जंगल की कुल स्थिति जानी जाएगी. सर्वे के लिए बड़ी संख्या में वन कर्मियों को तैनात करने की योजना है.

जानकारी देते संवाददाता नीरज कुमार (ईटीवी भारत)

नीलगाय से निपटने के लिए तैयार होगी योजना

जंगलों के सर्वे के दौरान नीलगाय से प्रभावित इलाकों में विशेष आंकड़ें जुटाए जाएंगे. जो इलाके नीलगाय से प्रभावित हैं, उन इलाकों में प्राकृतिक जल स्रोतों का सर्वे किया जाएगा. साथ ही कृत्रिम जल स्रोतों के संभावनाओं का भी आकलन किया जाएगा. जंगलों में मौजूद घास और उसकी स्थिति के बारे में जानकारी ली जाएगी.

survey of forests will be conducted in Palamu
नीलगायों का झुंड (ईटीवी भारत)

पलामू के इलाके में नीलगाय एक बड़ी चुनौती है. सोन, कोयल, अमानत समेत कई नदियों के तट वाले इलाके में नीलगाय से किसान परेशान हैं. नीलगाय से परेशान कई किसान खेती छोड़ चुके हैं. इससे संबंधित मामला लोकसभा में भी उठाया जा चुका है. नीलगाय जल स्रोत और घास वाले इलाके में अधिक मौजूद रहते हैं. इस सर्वे के माध्यम से एक वर्किंग प्लान तैयार किया जाएगा ताकि नीलगाय के लिए जंगल वाले इलाके में ही घास और पानी उपलब्ध हो जाए.

"भारत सरकार से मंजूरी मिलने के बाद वन विभाग का काम शुरू होता है. एक नया वर्किंग प्लान तैयार किया जाना है. इस नए वर्किंग प्लान के लिए जंगल का सर्वे किया जाएगा. इस सर्वे से पता चलेगा कि जंगल कैसा है, प्लांटिंग कैसी है. वाटर बॉडी और ग्रासलैंड का भी सर्वे होगा. इस सर्वे से इंसान और नीलगाय के बीच टकराव को सुलझाने के लिए एक योजना तैयार की जाएगी." - कुमार सत्यम, DFO, पलामू

survey of forests will be conducted in Palamu
नीलगाय (ईटीवी भारत)

2024-25 में नीलगाय के कारण सरकार ने दिया 62 लाख मुआवजा

पलामू के हुसैनाबाद, हैदरनगर, मोहम्मदगंज, पांडू, बिश्रामपुर, मेदिनीनगर समेत कई इलाके के लोग नीलगाय से परेशान हैं. इन इलाकों में 1.54 लाख हेक्टेयर जमीन पर लगने वाली फसल नीलगाय से प्रभावित है. हाल के दिनों में 586 किसानों ने नीलगाय से होने वाले नुकसान के बारे में सरकार को जानकारी दी है. 2024-25 में नीलगाय से होने वाले नुकसान के कारण सरकार ने पलामू के इलाके में 62.7 लाख रुपये मुआवजा दिया है. सरकार फसलों के नुकसान के मामले में प्रति हेक्टेयर 10,833 से अधिकतम 21,666 रुपए मुआवजा देती है. झारखंड गठन के बाद से इस इलाके में नीलगाय के कारण 10 लोगों की जान भी गई है जबकि 20 लोग जख्मी हुए हैं.

"नीलगाय को लेकर हम काफी परेशानी हैं, नीलगाय फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैंं और पल भर में खेती को चट कर जा रहे हैं. कई लोग परेशान होकर खेती छोड़ चुके हैं." - सूरज कुमार, किसान, नावाबाजार

"नीलगाय से कोई भी फसल नहीं बच रही है. रात में झुंड के झुंड आते हैं, भगाने से भी नीलगाय नहीं भागते हैं." - राजकुमारी देवी, किसान, छत्तरपुर

survey of forests will be conducted in Palamu
किसानों के खेत (ईटीवी भारत)

पलामू में है 650 वर्ग किलोमीटर खुला जंगल

पलामू जिले में 1,158 वर्ग किलोमीटर में जंगल फैले हुए हैं, जिसमें से 650 वर्ग किलोमीटर खुला जंगल है. खुले जंगल का इलाका चिंता का विषय है. हालांकि, पिछले कुछ सालों में जंगल का इलाका 2.23 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है. पलामू के जंगलों में कई तरह के पेड़ पाए जाते हैं, जिनमें साल, पलाश और महुआ शामिल हैं. पलामू के जंगलों में हिरण और नीलगाय बड़ी संख्या में पाए जाते हैं, जबकि हाथी और तेंदुए जैसे जंगली जानवर भी पलामू टाइगर रिजर्व से पलामू इलाके में आते हैं. इन जंगलों में स्पॉटेड हिरण (चीतल) सबसे ज्यादा पाए जाने वाला जानवर है.

Ranchi Accident
कार की तस्वीर (ईटीवी भारत)

बरसात के पानी पर निर्भर हैं जंगल और जीव

पलामू के जंगल और उनमें रहने वाले जीव बारिश के पानी पर निर्भर हैं. मार्च और अप्रैल की शुरुआत में ही जंगल जल संकट से जूझने लगता है. बरसात के दिनों में जल स्रोतों में पानी जमा रहता है, लेकिन बारिश खत्म होने के बाद पानी बह जाता है. जंगल में कोई बड़ी झील या तालाब नहीं है. कई बार हिरण पानी की तलाश में जंगल से भटककर गांवों में आ जाते हैं. पानी की तलाश में गांव पहुंचे हिरण का शिकार किया जा रहा है. सर्वे के दौरान जल स्रोतों का विशेष आकलन किया जाएगा. ताकि इसपर रोक लगाई जा सके.

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