JPSC परीक्षा में अनियमितताओं की CBI जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, छात्रों की नजरें दिल्ली पर
JPSC परीक्षा में अनियमितताओं की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी. राजेश कुमार सिंह की रिपोर्ट.

Published : August 24, 2026 at 7:51 AM IST
रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है. झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2025 (14वीं JPSC) में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर आज, सोमवार 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई होने जा रही है. याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है.
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने दिल्ली से फोन पर ईटीवी भारत को बताया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी. इस परीक्षा के तहत 103 पदों पर नियुक्ति होनी है, लेकिन विवाद के बीच JPSC ने अगले आदेश तक मेंस परीक्षा को स्थगित कर दिया है.
छात्रों की आवाज अब SC तक पहुंची: देवगन
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर छात्रों से एकजुटता दिखाने की अपील की है. उन्होंने लिखा कि झारखंड के छात्रों की आवाज अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है. देवगन के मुताबिक JPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका की पहली सुनवाई आज होने जा रही है.
उन्होंने इसे केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों के भविष्य की लड़ाई बताया है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत और उम्मीदें प्रतियोगी परीक्षाओं से जोड़ रखी है. देवगन ने दिल्ली और आसपास रहने वाले झारखंड के छात्रों से अपील की है कि वे 24 अगस्त को अधिक से अधिक संख्या में सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर छात्रों की एकजुटता और उनकी आवाज का समर्थन करें.
क्या है JPSC प्रारंभिक परीक्षा विवाद
याचिका में 19 अप्रैल को संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा हुई थी. इसका रिजल्ट 2 जुलाई 2026 को जारी हुआ था. लेकिन इससे पहले ही परीक्षा विवादों में आ गई. इसकी प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं. इनमें सबसे अहम मुद्दों में से एक कथित तौर पर एक अभ्यर्थी के पास मौजूद OMR शीट की कार्बन कॉपी का सामने आना है. इस दस्तावेज को लेकर यह दावा किया गया कि उसमें अभ्यर्थी द्वारा किए गए प्रश्नों की संख्या और उसके अगले चरण के लिए योग्य होने के बीच कथित विसंगति दिखाई देती है.
पूरी परीक्षा प्रक्रिया की जांच की मांग
याचिकाकर्ता का तर्क है कि मामले को केवल किसी एक अभ्यर्थी या किसी एक केंद्र तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए. याचिका में परीक्षा की पूरी श्रृंखला की जांच की मांग की गई है. इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने और छपाई से लेकर उसके सुरक्षित भंडारण, परिवहन और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की प्रक्रिया शामिल है.
इसके अलावा परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र वितरण, OMR शीट के संग्रह और सुरक्षित रखे जाने, स्कैनिंग, मूल्यांकन तथा अंतिम परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया की भी जांच की मांग की गई है. जांच के जरिए यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि कथित गड़बड़ी यदि हुई है तो वह किसी एक स्तर तक सीमित थी या फिर उसका स्वरूप व्यापक और प्रणालीगत था.
CID जांच के बावजूद CBI जांच की मांग
मामले में झारखंड CID पहले ही कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केस दर्ज कर चुकी है. प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों से 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच पेपर-I और पेपर-II की OMR कार्बन कॉपी जमा कराने को भी कहा गया था. याचिका में कहा गया है कि इन कार्बन कॉपियों का मिलान मूल OMR शीट और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड से किया जा सकता है. इसके बावजूद याचिकाकर्ता ने जांच CBI को सौंपने की मांग की है. इसके पीछे दलील यह है कि मामले की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर सार्वजनिक भरोसा कायम रहना जरूरी है.
आंदोलन के बीच सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई ऐसे समय हो रही है, जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन करीब 26 दिनों तक चला. 19 अगस्त को राज्य सरकार द्वारा 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और 23 अन्य परीक्षाओं की जांच कराने के फैसले के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया गया था. अभ्यर्थियों ने सरकार को अपनी बाकी मांगों पर कार्रवाई के लिए दो महीने का समय दिया है. हालांकि छात्रों ने साफ किया है कि आंदोलन को स्थायी रूप से समाप्त नहीं किया गया है. उनकी प्रमुख मांगों में स्वतंत्र CBI जांच भी शामिल है.
राज्य सरकार के कई फैसलों पर HC लगा चुका है रोक
इसी बीच झारखंड हाई कोर्ट ने 20 अगस्त को सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत 11वीं और 13वीं JPSC तथा फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षाओं को रद्द करने और उनके आधार पर हुई नियुक्तियों से जुड़े फैसले लिए गए थे. हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है. इसके बाद 21 अगस्त को हाई कोर्ट ने CDPO और JSSC-CGL नियुक्तियों से संबंधित सरकार के आदेश पर भी रोक लगाई.
परीक्षा स्थगित होने का भी मुद्दा
याचिका में JPSC द्वारा संयुक्त सिविल सेवा मुख्य लिखित परीक्षा 2025 को स्थगित किए जाने का भी उल्लेख किया गया है. यह परीक्षा 25 से 27 जुलाई के बीच प्रस्तावित थी. इसके अलावा JPSC ने 22 जुलाई की प्रेस विज्ञप्ति में वर्ष 2026 के कैलेंडर में शामिल बाकी परीक्षाओं को भी अगले आदेश तक स्थगित कर दिया था.
याचिकाकर्ता ने JPSC और JSSC की पूर्व की विवादित परीक्षाओं का भी संदर्भ दिया है. इनमें प्रश्नपत्र लीक से जुड़े आरोपों का उल्लेख है. याचिका में 2024 की JSSC-CGL परीक्षा से संबंधित सामग्री और राज्य CID की कथित जांच में करीब 150 में से लगभग 120 प्रश्नों के परीक्षा से पहले लीक होने के दावे का भी जिक्र किया गया है. हालांकि याचिका में साफ किया गया है कि इन पुराने मामलों को मौजूदा परीक्षा में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता के तौर पर देखा जाना चाहिए.
इधर, नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के बाद से खुशी-खुशी आंदोलन समाप्त करने वाले छात्र इस बात से नाराज हैं कि हाई कोर्ट में सरकार के फैसलों पर रोक लग रही है, लेकिन सरकार अपनी तरफ से दलील पेश नहीं कर रही है. इसके विरोध में छात्रों ने मुख्यमंत्री के पुतला दहन का कार्यक्रम रखा, जो विवादों में रहा. इस दौरान रांची, गिरिडीह, हजारीबाग और गढ़वा में झड़प हुई. कई प्राथमिकी दर्ज हुई.
सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा का आरोप है कि भाजपा छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति कर रही है. भाजपा आरोप लगा रही है कि सरकार छात्रों को बांटकर राजनीति कर रही है. वहीं आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि सरकार ने उनके साथ धोखेबाजी की है. इधर आंदोलन के दौरान कई दिनों तक आमरण अनशन पर रहे जेएलकेएम नेता देवेंद्र महतो 24 अगस्त से भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा निकालने जा रहे हैं. इसकी शुरुआत शिबू सोरेन के पैतृक गांव रामगढ़ के नेमरा से हो रही है.
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