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बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल की भागीदारी जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, पॉलिसी में बदलाव से पहले बार काउंसिल ऑफ इंडिया को एजी, एसजी से सलाह लेनी चाहिए.

SC: BCI must consult AG, SG before policy moves
सुप्रीम कोर्ट (ANI)
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By Sumit Saxena

Published : September 2, 2026 at 3:27 PM IST

2 Min Read
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को कोई भी नीतिगत फैसले लेने से पहले अटॉर्नी जनरल (AG) और सॉलिसिटर जनरल (SG) से सलाह लेनी चाहिए.

यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की बेंच के सामने आया. बेंच बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल की कानूनी मान्यता को चुनौती देने वाली और उन्हें पद से हटाने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.

बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध है कि वे दो हफ्ते के अंदर स्टेट बार काउंसिल (SBCs) में दो महिला सदस्यों का सह-विकल्प पूरा करें. बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के को-ऑप्शन (सह-विकल्प) पूरा करने के एक हफ्ते के अंदर स्टेट बार काउंसिल (SBCs) को अपनी नई बनावट के बारे में बताना होगा.

बेंच ने कहा कि नई बनी स्टेट बार काउंसिल (SBCs) को अपनी बनावट के अधिसूचना के तीन हफ्ते के अंदर अपने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, दूसरे पदाधिकारियों (ऑफिस बेयरर्स) और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए एक प्रतिनिधि का चुनाव करना होगा.

बेंच ने कहा कि नए बने स्टेट बार काउंसिल (SBCs) को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने कानूनी तौर पर तय पदाधिकारियों का चुनाव करें, जिसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए उनके प्रतिनिधि भी शामिल हैं, और यह काम उनकी बनावट के अधिसूचित होने की तारीख से दो हफ्ते के अंदर करें.

बेंच ने कहा कि सभी राज्य बार काउंसिल को अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया जाता है. ये अनुपालन रिपोर्ट मिलने के बाद, बेंच एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 4 के तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पुनर्गठन से जुड़े मुद्दे पर विचार करेगी.

बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा लिए गए किसी भी नीतिगत फैसले के बारे में, बेंच ने कहा कि फैसला लेने से पहले अटॉर्नी जनरल (AG) और सॉलिसिटर जनरल (SG) को सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए. बेंच ने कहा कि वह 17 सितंबर को इन मामलों पर विचार करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि सह-विकल्प और नए राज्य बार काउंसिल की बनावट के नोटिफिकेशन पर निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं.

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