ETV Bharat / bharat

क्या बाजार में तेजाब की खुलेआम बिक्री पर लगनी चाहिए रोक? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

साल 2013 के सुरक्षा दिशा-निर्देशों के बावजूद बाजार में तेजाब की आसान पहुंच पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है.

Supreme Court on Acid Sale Ban
सांकेतिक तस्वीर. (IANS)
author img

By Sumit Saxena

Published : August 31, 2026 at 8:07 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से इस बात पर जवाब मांगा है कि क्या तेजाब की खुदरा बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए या इसके नियमों को और सख्त किया जाना चाहिए. कोर्ट ने यह कदम तेजाब की आसान उपलब्धता को लेकर जताई गई चिंताओं के बीच उठाया है, जो कि खुले बाजार में बिक्री पर रोक लगाने के लिए साल 2013 में जारी किए गए दिशा-निर्देशों के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहा है.

यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने आया. मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील सौरभ कृपाल ने तर्क दिया कि स्वयंसेवकों द्वारा किए गए एक सर्वे में पाया गया है कि तेजाब अभी भी आसानी से खरीदा जा सकता है और इस पर "व्यावहारिक रूप से कोई नियामक नियंत्रण" नहीं है.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सब सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने 2013 के फैसले में तय किए गए सुरक्षा उपायों के बावजूद हो रहा है. वरिष्ठ वकील ने सुझाव दिया कि तेजाब की बिक्री को नियंत्रित करने के बजाय इसकी खुदरा बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी जानी चाहिए. उन्होंने दलील दी कि औद्योगिक उद्देश्यों के लिए तेजाब की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन घरेलू या खुदरा उपयोग में इसकी जगह बाजार में पहले से उपलब्ध अन्य वैकल्पिक क्लीनिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.

पीठ ने एसिड अटैक सर्वाइवर (तेजाब हमले से पीड़ित) शाहीन मलिक द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, खुदरा तेजाब बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाले एक नए आवेदन पर नोटिस जारी किया. पीठ ने कहा कि उसे सूचित किया गया है कि साल 2013 में कुछ दिशा-निर्देश तय किए गए थे, जो अब लगभग अप्रचलित हो चुके हैं और उनका पालन नहीं किया जा रहा है.

पीठ ने कहा, "केंद्र सरकार को इस बात का भी जवाब देना होगा कि तेजाब की खुदरा बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए, या विकल्प के तौर पर, क्या ऐसी बिक्री को बेहद सख्त नियामक उपायों के अधीन अनुमति दी जानी चाहिए. जिन राज्य सरकारों ने अब तक इस संबंध में नियम नहीं बनाए हैं, वे ऐसा करें."

पीठ ने टिप्पणी की कि इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है और दो मुख्य चिंताएं रेखांकित कीं. पीठ ने कहा, "पहला यह कि क्या तेजाब की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध होना चाहिए या फिर बेहद सीमित और अत्यधिक नियंत्रित प्रणाली होनी चाहिए और दूसरा, एसिड अटैक के तुरंत बाद किए जाने वाले प्राथमिक उपचार और प्रतिक्रिया के बारे में जागरूकता की कमी."

पीठ ने केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छह हफ्ते के भीतर "एसिड अटैक पीड़ितों के लिए उचित पुनर्वास उपाय" तैयार करने का भी निर्देश दिया है. पीठ ने केंद्र सरकार से एक मॉडल योजना बनाने और इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्यों को जरूरी सहायता प्रदान करने पर विचार करने को कहा. पीठ ने कहा कि इन पुनर्वास योजनाओं में एसिड अटैक पीड़ितों को मुआवजा देने, पुनर्वास करने, चिकित्सा सहायता और उच्च स्तर तक मुफ्त शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था होनी चाहिए.

पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी कहा कि वे "दर्ज किए गए एसिड अटैक के मामलों, उन मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई है या नहीं, और कितने मामले अभी भी ट्रायल या अपील के चरण में लंबित हैं, इस संबंध में पूरी जानकारी दें."

इस साल जुलाई में, केंद्र सरकार ने सर्वोच्च अदालत को सूचित किया था कि सरकार ने 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' में बदलाव किए हैं, ताकि उन एसिड अटैक पीड़ितों को भी इस कानून का लाभ मिल सके जिन्हें जबरन तेजाब पिलाए जाने के कारण अंदरूनी चोटें आई हैं.

इसे भी पढ़ेंः