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'ब्रिटिश काल के नियम छोड़ें': कोस्ट गार्ड के रिटायरमेंट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को सख्त नसीहत

पीठ ने कहा कि अब समय आ गया है जब सेवा शर्तों और सेवानिवृत्ति की आयु से जुड़े नियमों पर पुनर्विचार किया जाए.

Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट (IANS)
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By Sumit Saxena

Published : February 28, 2026 at 5:07 PM IST

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सशस्त्र बलों के जवानों की सेवानिवृत्ति की आयु और सेवा शर्तों से जुड़े ब्रिटिश काल के पुराने नियमों से आगे बढ़ने को कहा है. कोर्ट ने सुझाव दिया कि "अत्यधिक कुशल" कोस्ट गार्ड अधिकारियों को परिभाषित करने के मानदंडों के पुनर्मूल्यांकन के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने पर विचार किया जाए.

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने की. पीठ केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो दिल्ली हाई कोर्ट के पिछले साल के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी जिसमें 'कोस्ट गार्ड रूल्स, 1986' के नियम 20 को रद्द कर दिया गया था.

इन नियमों के अनुसार, कमांडेंट और उससे नीचे के रैंक के अधिकारी 57 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते थे, जबकि कमांडेंट से ऊपर के अधिकारी 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर रिटायर होते थे.

बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगाने का फैसला किया है, जिसमें कहा गया था कि भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के सभी रैंकों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु समान रूप से 60 वर्ष होनी चाहिए.

पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से कहा कि अब समय आ गया है जब सेवा शर्तों और सेवानिवृत्ति की आयु से जुड़े नियमों पर पुनर्विचार किया जाए. सुनवाई के दौरान यह तर्क दिया गया कि कोस्ट गार्ड का काम अन्य बलों से पूरी तरह अलग है, क्योंकि उन्हें समुद्र में नौसेना की तरह बहुत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिसके लिए युवाओं की अधिक आवश्यकता होती है. इस पर बेंच ने कहा कि सरकार ब्रिटिश काल में बनाए गए ढांचों से बंधी नहीं रह सकती.

कोर्ट ने टिप्पणी की कि आज तटरक्षक बल की बदलती भूमिका उस कल्पना से कहीं आगे है जो पहले कभी की गई थी, फिर भी वर्तमान सेवानिवृत्ति की आयु अभी भी पुराने ढर्रों को ही दर्शाती है. पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि एक आधुनिक और "अत्यधिक कुशल" बल में अनुभव बहुत महत्वपूर्ण होता है. कोर्ट ने सरकार को चेतावनी दी कि सेवा शर्तें तय करते समय उनका नजरिया बहुत अधिक "रूढ़िवादी या ठहरा हुआ" नहीं होना चाहिए.

केंद्र सरकार के वकील ने तर्क दिया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने कोस्ट गार्ड (जो रक्षा मंत्रालय के अधीन आता है) की तुलना ITBP, CRPF, CISF और SSB जैसे अन्य बलों से करके गलती की है. उन्होंने दलील दी कि सशस्त्र बलों में सेवानिवृत्ति की आयु को भर्ती की उम्र के साथ बहुत सोच-समझकर जोड़ा गया है ताकि सेवा की एक निश्चित अवधि सुनिश्चित की जा सके. केंद्र के वकील ने इस बात पर भी जोर दिया कि ये मामले सरकारी नीति के दायरे में आते हैं.

शुक्रवार को पारित अपने आदेश में पीठ ने कहा: "नोटिस जारी किया जाए, जिसका जवाब 13 अप्रैल 2026 तक दिया जाना चाहिए... यदि कोई जवाबी हलफनामा हो, तो वह चार सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए. उसके बाद प्रत्युत्तर हलफनामा दो सप्ताह के भीतर जमा किया जाए."

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा, "इस बीच, हाई कोर्ट के विवादित फैसले के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी. हालांकि, हम भारत सरकार को निर्देश देते हैं कि वह कोस्ट गार्ड की सेवा शर्तों, विशेष रूप से भर्ती और सेवानिवृत्ति की आयु पर पुनर्विचार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की संभावना पर विचार करे, जिसकी रिपोर्ट इस अदालत को सौंपी जाएगी."

बता दें कि हाई कोर्ट ने अपने फैसले में आदेश दिया था कि भारतीय तटरक्षक बल के सभी रैंक के अधिकारियों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु समान रूप से 60 वर्ष होनी चाहिए और अलग-अलग रैंक के लिए अलग-अलग रिटायरमेंट उम्र तय करने वाले नियम को रद्द कर दिया था.

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