करूर भगदड़ मामला: द्रमुक की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार, सीएम विजय को राहत
करूर भगदड़ की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पिछली सरकार द्वारा दर्ज एफआईआर में मुख्यमंत्री का नाम आरोपी के तौर पर नहीं है.

Published : July 7, 2026 at 1:38 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की करूर भगदड़ के पीड़ितों के परिजनों से प्रस्तावित मुलाकात पर सवाल उठाने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कझगम (द्रमुक) को मंगलवार को फटकार लगाई और राज्य के मंत्रियों पर गवाहों को प्रभावित करने का आरोप लगाने वाली उसकी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया.
कोर्ट ने कहा कि पिछली सरकार द्वारा दर्ज एफआईआर में मुख्यमंत्री का नाम आरोपी के तौर पर नहीं है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस के वी विश्वनाथन और आलोक अराधे की बेंच ने की. डीएमके महासचिव की ओर से सीनियर एडवोकेट रंजीत कुमार पेश हुए.
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय, राज्य के मंत्री आधव अर्जुन और दूसरे आरोपियों को करूर भगदड़ के बारे में सार्वजनिक तौर पर बयान देने से रोकने की मांग वाली आवेदन पर विचार करने से मना कर दिया.
सीबीआई करूर भगदड़ मामले की जांच कर रही है. आवेदन में जांच लंबित रहने के दौरान पीड़ितों के परिवारों के साथ उनकी बातचीत को विनियमित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई थी.
न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने द्रमुक से पूछा कि अदालत कार्यपालिका के प्रमुख (मुख्यमंत्री) की यात्रा पर कैसे कोई नियम बना सकती है. द्रमुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार पेश हुए. बेंच ने उनसे पूछा कि भगदड़ पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात करना गवाहों को प्रभावित करना कैसे हुआ.
मुख्यमंत्री विजय का भगदड़ के पीड़ित परिवारों से 10 जुलाई को मुलाकात का कार्यक्रम है. बेंच ने कुमार से कहा कि द्रमुक चाहे तो अपनी याचिका वापस लेकर कानून के तहत किसी अन्य उपाय पर विचार कर सकता है, या अदालत इसे खारिज कर देगी. इसके बाद कुमार ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया.
अदालत ने याचिका को वापस लिया मानते हुए खारिज कर दिया. द्रमुक सचिव आर एस भारती ने यह याचिका दायर कर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री, राज्य के मंत्री आधव अर्जुन तथा मामले के अन्य आरोपियों को इस प्रकरण पर सार्वजनिक बयान देने से रोकने और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पूरी होने तक पीड़ित परिवारों से उनके संपर्क को विनियमित करने का अनुरोध किया था.
याचिका में उन मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया गया था, जिनमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री करूर जाकर मृतकों के परिजनों और घायलों को सरकारी आदेश, अनुकंपा नियुक्तियां तथा अन्य सरकारी सहायता प्रदान करेंगे.
भारती ने अपनी याचिका में कहा कि इस मामले में जिन लोगों के खिलाफ प्रारंभिक आरोपपत्र दाखिल किया गया था, उनमें से कई वर्ष 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री बन चुके हैं.
पिछले साल 13 अक्टूबर को अदालत ने करूर भगदड़ की घटना की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे. इस हादसे में 41 लोगों की मौत हुई थी. अदालत ने कहा था कि इस घटना ने पूरे देश के जनमानस को झकझोर दिया है और इसकी निष्पक्ष तथा स्वतंत्र जांच आवश्यक है.
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