ऑटो चालक की बेटी ने तोड़ी सामाजिक बेड़ियां, बनीं अपने समाज की पहली महिला वकील
अपने चाचा के कानूनी संघर्षों को करीब से देखने के बाद, उसने अन्याय का सामना कर रहे लोगों की मदद के लिए वकालत को चुना.


Published : February 28, 2026 at 7:41 PM IST
केशव एम
मैसूर: कर्नाटक के खानाबदोश (nomadic) समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए, वी. अरुणा कानून की डिग्री हासिल करने वाली पहली महिला बन गई हैं. कामचलाऊ शेड में मिट्टी के तेल के दीये की रोशनी में पढ़ाई करने से लेकर अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) की तैयारी तक का उनका सफर, दृढ़ संकल्प और सामाजिक बदलाव की एक प्रेरणादायक कहानी है.
मैसूर के एकलव्य नगर की रहने वाली अरुणा एक खानाबदोश समुदाय से आती हैं. बचपन से ही असमानता को करीब से देखा. अपने पिता और चाचा की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर, उन्होंने कानून के क्षेत्र में करियर बनाने का लक्ष्य रखा.
कानून की पढ़ाई ही क्यों की
उनका यह फैसला एक बेहद व्यक्तिगत अनुभव से जुड़ा था. अरुणा ने याद किया कि कैसे उनके चाचा को एक कानूनी मामले में बार-बार अदालत के चक्कर लगाने पड़ते थे. उस प्रक्रिया से परेशान होकर, उनके चाचा ने एक बार उनसे कहा था कि अगर वह वकील होतीं, तो इस कठिन समय में उनकी मदद कर पातीं. उन शब्दों ने अरुणा के मन पर गहरा प्रभाव डाला.
अपने पिता और भाइयों के प्रोत्साहन से, अरुणा ने अपने समुदाय के उन लोगों की मदद करने के लिए कानून की पढ़ाई करने का संकल्प लिया जो इसी तरह की कठिनाइयों का सामना कर रहे थे. उनके पिता वेंकटेश एक ऑटो-रिक्शा चालक हैं और मां मंगला एक गृहिणी हैं. आर्थिक तंगहाली के बावजूद, इस परिवार ने किसी भी संस्था से मदद मांगे बिना अपनी बेटी की शिक्षा का पूरा समर्थन किया.
सेना में जाना चाहती थी
बचपन में अरुणा आर्मी में शामिल होना चाहती थीं. लेकिन अपनी प्री-यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद और अपने चाचा के कानूनी संघर्षों को करीब से देखने के बाद, उसने अन्याय का सामना कर रहे लोगों की मदद के लिए वकालत को चुना.
अरुणा ने कहा, "मैं कभी सेना में जाना चाहती थी. लेकिन अपने चाचा के संघर्ष को देखने के बाद और अपने पिता और भाई की इच्छा का मान रखते हुए, मैंने समाज सेवा के लिए वकील बनने का फैसला किया. अब मेरा लक्ष्य हाई कोर्ट का जज बनना है."
बिना बिजली के पढ़ाई की
अरुणा ने कक्षा 1 से 10वीं तक की अपनी स्कूली शिक्षा एकलव्य नगर के गोमालैंड इलाके में एक मवेशी शेड जैसे घर में पूरी की. वहां बिजली न होने के कारण वह मिट्टी के तेल के दीये की रोशनी में पढ़ती थीं. जब वह पीयूसी में थीं, तब जाकर उनके परिवार को 'जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूअल मिशन' (JNNURM) योजना के तहत घर मिला और पहली बार उन्होंने बिजली की रोशनी का अनुभव किया.
उन्होंने अपनी पीयूसी की पढ़ाई 'महारानी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज' से की, 'महारानी आर्ट्स कॉलेज' से स्नातक पूरा किया और 2025 में 'विद्यावर्धक लॉ कॉलेज' से कानून की डिग्री हासिल की.
AIBE की तैयारी और बड़े लक्ष्य
अरुणा वर्तमान में 7 जून 2026 को होने वाली 'ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन' (AIBE) की तैयारी कर रही हैं. इस परीक्षा को पास करने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट सहित किसी भी अदालत में वकील के रूप में अभ्यास (प्रैक्टिस) कर सकेंगी.
हाल ही में, राज्य सरकार ने सिविल जज परीक्षा के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे. अरुणा इसके लिए आवेदन नहीं कर सकीं क्योंकि पात्रता मानदंडों के अनुसार कम से कम तीन साल का लीगल प्रैक्टिस होना अनिवार्य है. वह अब इस आवश्यकता को पूरा करने में जुटी हैं. भविष्य में इस परीक्षा में बैठने की योजना बना रही हैं.
समुदाय की बड़ी उपलब्धि
उनकी मां मंगला ने अपनी बेटी की इस कामयाबी पर गर्व जताते हुए कहा, "हमारे खानाबदोश समुदाय में बहुत कम लोग उच्च शिक्षा प्राप्त कर पाते हैं. अपनी बेटी को लॉ ग्रेजुएट (वकील) बनते देखना हमारे लिए बहुत बड़ी खुशी की बात है."
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