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प्रोफेसर की नौकरी छोड़ी, आज मछली पालन से कर रहे छप्परफाड़ कमाई

प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर नालंदा के कवींद्र कुमार मौर्या आज मछली पालन कर रहे हैं और लाखों कमा रहे हैं. जानें उनकी Success Story.

Rich from fish farming
नालंदा के कवींद्र कुमार मौर्या बने बड़े मछली कारोबारी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : January 11, 2026 at 12:16 PM IST

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Updated : January 11, 2026 at 1:16 PM IST

5 Min Read
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रिपोर्ट: महमूद आलम

नालंदा: प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर बिजनेस का रिस्क लेने वाले नालंदा के किसान कवींद्र कुमार मौर्या (65) की पहचान आज बड़े मछली कारोबारी के रूप में हो रही है. उनकी सफलता की कहानी बहुत ही दिलचस्प है. शुरू में कवींद्र ने परंपरागत खेती की तरफ रुख किया, लेकिन मौसम की मार के कारण फसलों को नुकसान हो रहा था. मुनाफे की कमी आड़े आने लगी, तब उन्होंने दूसरा नया रिस्क लिया जो कामयाब हुआ, जिसके कारण आज वह दूसरे किसानों को प्रशिक्षण के साथ इसके फायदे बता रहे हैं. विस्तार से जानें किसान कवींद्र की सफलता की कहानी.

प्रोफेसर से बने मछली पालक: नूरसराय प्रखंड अंतर्गत चरुईपर गांव निवासी कवींद्र कुमार मौर्य कुशवाहा सोमारी त्रिलोकी कॉलेज (केएसटी) के प्रोफेसर थे. लेकिन शुरू से वह कुछ अलग करना चाहते थे और उनको खेती-बाड़ी में ज्यादा रुचि थी. इसलिए उन्होंने पढ़ाने का काम छोड़कर पारंपरिक खेती का रूख किया.

देखें रिपोर्ट (ETV Bharat)

लाखों की कमायी: सब्जी की खेती में कवींद्र को मौसम की मार का सामना करना पड़ा. आलू, टमाटर, प्याज की फसलें खराब हो गईं. तब उन्होंने परंपरागत खेती छोड़कर मछली पालन को अपना हथियार बनाया है. आज वह 4 एकड़ में मछली पालन कर एक सीजन में 5 लाख रुपए तक की कमाई कर रहे हैं. उनका मानना है कि अगर युवा पूरी निष्ठा से इस व्यवसाय को समय दें, तो सालाना 15 लाख रुपए तक कमा सकते हैं.

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ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

आपदा को बनाया अवसर: कवींद्र कुमार ईटीवी से बात कर बताते हैं कि पहले वे सब्जी की खेती करते थे, लेकिन कभी मुनाफा होता तो कभी नुकसान होता था. साल 2000 के आसपास बिजली की भारी किल्लत थी. खेत में एक गड्ढा था, जहां रबी और खरीफ की फसलें अक्सर डूब जाती थी. उन्होंने इसी आपदा को अवसर में बदला और गड्ढे को जलाशय का रूप देकर मछली पालन शुरू किया. शुरुआत एक बीघे से हुई, जो आज बढ़कर 4 एकड़ तक फैल चुकी है.

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तालाब में छह तरह की मछलियां (ETV Bharat)

आंध्र प्रदेश में ली थी ट्रेनिंग : मछली पालन में वैज्ञानिक तरीके अपनाने की प्रेरणा उन्हें 2006 में मिली थी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की पहल पर 40 किसानों के दल को ट्रेनिंग के लिए आंध्र प्रदेश भेजा गया था, जिसमें कवींद्र भी शामिल थे. वहां से लौटने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. पंतनगर से फिशरी ग्रेजुएट आर.के. सिन्हा ने भी उनकी काफी मदद की.

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ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

"एक मछली को एक किलो तक तैयार करने में करीब 70 रुपये का खर्च आता है. मैं तालाब में छह तरह की मछलियां पालता हूं, रेहू, कतला, नैनी (भारतीय) और सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प (विदेशी) शामिल हैं. चारे के लिए बाजार के महंगे फीड के अलावा राइस ब्रान, खल्ली, गुड़ और यीस्ट का मिश्रण तैयार करते हैं, जिससे पानी में प्लवक (Plankton) बनता है. यह मछलियों के लिए सुपाच्य भोजन है."- कवींद्र कुमार मौर्य, प्रगतिशील किसान, नूरसराय

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नालंदा के किसान कवींद्र कुमार मौर्या (ETV Bharat)

तालाब के चारों ओर सोलर फेंसिंग: नीलगाय और चोरी की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए उन्होंने तकनीक का सहारा लिया है. तालाब के चारों ओर सोलर फेंसिंग लगाई गई है. इसमें हल्का करंट दौड़ता है, जिससे न तो नीलगाय और सूअर खेत में घुसते हैं और न ही कोई चोर आने की हिम्मत करता है. इसके कारण वह निश्चित होकर व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं.

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ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

"कृषि के क्षेत्र में जो नई पीढ़ी अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, तो उनके लिए मछली पालन कम लागत में ज्यादा मुनाफे का सौदा है. मैंने सब्जी की खेती छोड़कर इसे अपनाया और आज खुशहाल जीवन जी रहा हूं. इसमें नुकसान की संभावना बहुत कम है."-कवींद्र कुमार मौर्य, प्रगतिशील किसान, नूरसराय

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2006 में आंध्र प्रदेश में ली मछली पालन की ट्रेनिंग (ETV Bharat)

प्रोफेसर से मछली पालन का सफर: किसान कवींद्र कुमार खुद भी वनस्पति विज्ञान से M.Sc की पढ़ाई किए हुए हैं और कॉलेज में भी बच्चों को पढ़ा चुके हैं. उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि उनके बच्चे आज उच्च पदों पर हैं. उनके दो बेटे हैं और दोनों इंजीनियर हैं. बड़ा बेटा मैकेनिकल ब्रांच से इंजीनियरिंग के बाद गृह मंत्रालय में सेवारत है, जबकि छोटा बेटा सिविल इंजीनियरिंग कर इंफोसिस जैसी निजी कंपनी में काम कर रहा है. वह शुरु से चाहते थे, कि उन्हें मेहनत कम करना पड़े इसलिए शिक्षण कार्य भी छोड़ दिया था.

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ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

जनरल विधि से मछली पालन: कवींद्र मछली पालन सामान्य विधि से करते हैं. खेत का चयन कर उसकी नियमित गहराई 7 से 9 फीट रखते हैं जिसमें 5 फ़ीट गहराई में पानी रहनी चाहिए. तालाब को साफ रखने के लिए चूना, तीसी के खल्ली का घोल बनाकर नियमित रूप से साल में दो बार तालाब में डालना पड़ता है. महुआ खली, चूना, गोबर खाद, जाल, पानी की जांच किट और मछली आहार जैसी चीज़ों का प्रयोग किया जाता है, जिससे पानी और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और मछलियों का अच्छा उत्पादन होता है.

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Last Updated : January 11, 2026 at 1:16 PM IST