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Success Story: बैंक की नौकरी छोड़ी, आज लाखों में कमाई, प्रेरक है अविनाश की सफलता की कहानी

बिहार के अनुराग की सक्सेस स्टोरी दिलचस्प है. नौकरी छोड़ने के बावजूद स्वरोजगार के जरिये वह सालाना 20-25 लाख की कमाई कर रहे हैं. पढ़ें..

Success Story
नौकरी छोड़कर बत्तख पालन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : December 30, 2025 at 5:25 PM IST

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रिपोर्ट: विवेक कुमार

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले अनुराग ठाकुर ने साबित कर दिया कि 'जहां चाह वहां राह' है. नौकरी में मन नहीं लगा तो उन्होंने स्वरोजगार को अपनाया और आज अपने फैसले से खुश हैं. दोस्त के साथ मिलकर दो साल पहले उन्होंने बत्तख पालन का काम शुरू किया था. कड़ी मेहनत और सच्चे इरादे ने कम वक्त में ही सफलता का स्वाद चखा दिया. आज वह सफल युवा उद्यमी हैं. अपनी नई पहचान से वह बेहद खुश हैं.

अनुराग की सक्सेस स्टोरी: जिले के मुसहरी प्रखंड के द्वारिका नगर के रहने वाले अनुराग और उनके बचपन के मित्र दीपांकर कुमार उर्फ हर्ष ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच स्पष्ट हो और मेहनत करने का जज्बा हो तो खेती और पशुपालन भी किसी कॉरपोरेट नौकरी से कम नहीं है. दोनों दोस्तों ने पढ़ाई और नौकरी के तयशुदा रास्ते को छोड़कर बत्तख पालन को अपनाया और आज लाखों रुपये की सालाना आमदनी के साथ कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.

अनुराग की सक्सेस स्टोरी (ETV Bharat)

नौकरी छोड़ी, स्वरोजगार से जुड़े: अनुराग एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उन्होंने अर्थशास्त्र से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2023 में एक प्राइवेट बैंक में नौकरी जॉइन की. बैंक में उन्हें करीब 30 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था. कुछ समय तक उन्होंने पूरी शिद्दत और ईमानदारी के साथ नौकरी भी की लेकिन इसी दौरान उनको महसूस हुआ कि नौकरी से वह खुश नहीं हैं. इतनी सैलेरी से वह अपने सपने नहीं पूरे कर पाएंगे. लिहाजा उन्होंने अपने दम पर कुछ करने का मन बना लिया.

duck farming In muzaffarpur
बत्तख पालन (ETV Bharat)

बत्तख पालन शुरू किया: 25 साल के अनुराग बताते हैं कि मोतीपुर इलाके में किसी काम से जाने के क्रम में उनकी नजर एक बत्तख फार्म पर पड़ी. वहां रुककर उन्होंने फार्म संचालक से विस्तार से बातचीत की. उसी दिन उन्होंने तय कर लिया कि अब नौकरी नहीं करेंगे, बल्कि खुद का फार्म खोलकर दूसरों को रोजगार देंगे.

दोस्त के मिलकर शुरू किया काम: इसके बाद उन्होंने अपने बचपन के दोस्त हर्ष से इस योजना को साझा किया. उस समय हर्ष दिल्ली में बीबीए की पढ़ाई कर रहे थे. अनुराग की योजना से प्रभावित होकर हर्ष ने भी पढ़ाई बीच में छोड़ दी और मुजफ्फरपुर लौट आए. दोनों दोस्तों ने मिलकर 60 हजार रुपये सालाना के दर पर 16 कट्ठा जमीन लीज पर ली और लगभग तीन हजार बत्तख के चूजे खरीदे. एक चूजे की कीमत करीब 60 रुपये पड़ी.

duck farming In muzaffarpur
बत्तख पालन बना मुनाफे वाला व्यवसाय (ETV Bharat)

मेहनत रंग लाई, कमाई होने लगी: वे बताते हैं कि शुरुआत में चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन सही देखभाल और तकनीक के इस्तेमाल से फार्म तेजी से आगे बढ़ा. चार महीने बाद बत्तख अंडा देना शुरू कर देती है. फिलहाल उनके फार्म से प्रतिदिन करीब 1300 अंडों का उत्पादन हो रहा है, जिसे सीधे बाजार में बेचा जाता है. एक अंडे की कीमत 13 रुपये है, जिससे रोजाना लगभग 16 हजार रुपये की आमदनी हो रही है.

बत्तख पालन से कैसे होती है कमाई?: अनुराग ठाकुर बताते हैं कि एक बत्तख साल में कम से कम 300 दिन अंडा देती है और करीब तीन साल तक उत्पादन करती है. इसके बाद बत्तख को मांस के लिए बेच दिया जाता है, जिससे अतिरिक्त आय होती है. खास बात ये है कि फार्म में बत्तख पालन के साथ-साथ मछली पालन भी किया जा रहा है, जिससे फार्म का खर्च निकल जाता है.

duck farming In muzaffarpur
बत्तख पालन (ETV Bharat)

कितनी कमाई होती है?: इस सवाल पर अनुराग कहते हैं कि सालाना 20 से 25 लाख रुपये की आमदनी हो जाती है. इस हिसाब से देखें तो प्रति माह करीब 2 लाख की कमाई होती है. इसके साथ ही इस फार्म से छह लोगों को नियमित रोजगार मिल रहा है. वे कहते हैं कि आगे इसे व्यापक स्तर पर करने की योजना है.

युवाओं से क्या अपील करेंगे?: अनुराग कहते हैं कि जो युवा बेरोजगार हैं या अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं हैं, उनको स्वरोजगार से जुड़ना चाहिए. बत्तख पालन वैसे लोगों के लिए अच्छा विकल्प बन सकता है. वे कहते हैं यदि कोई व्यक्ति बत्तख फार्म की शुरुआत में करीब 10 लाख रुपये का निवेश करता है तो चार महीने बाद से ही वह हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपये तक की कमाई कर सकता है.

duck farming In muzaffarpur
बत्तखों के झुंड के बीच अनुराग ठाकुर (ETV Bharat)

"आज से दो साल पहले एक आदमी को बत्तख पालन करते देखा तो उनसे इस बारे में विस्तार से पूछा. मुझे अच्छा लगा और मैंने नौकरी छोड़कर स्वरोजगार का फैसला ले लिया. परिवार से बात की तो सभी लोगों ने हौसला बढ़ाया. सालाना 20 लाख से अधिक की कमाई हो जाती है. पहले लोग बैंक कर्मचारी के रूप में जानते थे लेकिन अब कहीं जाते हैं तो लोग जानते हैं कि खुद का फार्म है. आगे इस फार्म को और बड़ा रूप का प्लान है."- अनुराग ठाकुर, बत्तख पालक सह युवा उद्यमी

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