विदेशी सब्जी उगाकर हुए मालामाल, आज करोड़ों रुपए कमा रहा हरियाणा का लाल
कुरुक्षेत्र के किसान बिनवंत सिंह ने 18 लाख रुपए की नौकरी छोड़ी और आज वे आइसबर्ग लेट्यूस की खेती से करोड़ों रुपए कमा रहे हैं.

Published : January 10, 2026 at 5:45 PM IST
|Updated : January 11, 2026 at 5:57 PM IST
कुरुक्षेत्र : हरियाणा के कुरुक्षेत्र के किसान बिनवंत सिंह ने आज से करीब 23 साल पहले 18 लाख रुपए की नौकरी छोड़कर आइसबर्ग लेट्यूस की खेती शुरू की और वे आज करोड़ों रुपए कमा रहे हैं.
बिनवंत सिंह बने मिसाल : कुरुक्षेत्र के गौरीपुर गांव के किसान बिनवंत सिंह की कहानी आज देश के हजारों किसानों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है. उन्होंने आज से 23 साल पहले उस दौर में आइसबर्ग लेट्यूस की खेती शुरू की, जब शायद किसी किसान ने इसकी खेती के बारे में सोचा भी नहीं था. उन्होंने इसकी खेती से जो सफलता हासिल की, उसके बाद बिनवंत सिंह से प्रेरणा लेकर कई किसान आइसबर्ग लेट्यूस की खेती के लिए आगे आ रहे हैं.
18 लाख रुपए की नौकरी छोड़ खेती शुरू की : किसान बिनवंत सिंह ने बताया कि उन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद महाराष्ट्र में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल गई थी. वहां पर उनको अच्छा पैकेज भी मिला हुआ था. लेकिन गांव में अपनी पुश्तैनी जमीन पर कुछ करने का एक जुनून उनके अंदर था. उन्होंने इस जुनून के चलते 18 लाख रुपए सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी और साल 2003 में अपने गांव चले आए और यहां पर पुश्तैनी ज़मीन पर खेती करनी शुरू कर दी.

नौकरी छोड़ने पर पिता हुए नाराज : उन्होंने बताया कि जब वे इतने अच्छे पैकेज वाली नौकरी छोड़कर वापस अपने घर लौटे तो उनके पिता काफी नाराज़ हुए क्योंकि उनके पिता ने उनको बड़े अरमानों के साथ पढ़ाया-लिखाया और नौकरी करने लायक बनाया. उन्होंने कहा कि हम लोग भी अपनी कई पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं लेकिन खेती में कुछ नहीं बचता, इसलिए तुम नौकरी करो. लेकिन उन्होंने अपने पिता की बात नहीं मानी और खेती करने की ठान ली.

आइसबर्ग लेट्यूस की खेती शुरू की : उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने भी परंपरागत खेती को शुरू किया था लेकिन उसमें कुछ बच नहीं रहा था, ऐसे में उन्होंने फिर से कुछ अलग करने की सोची. उन दिनों मैकडॉनल्ड(McDonald's) कंपनी भारत में आई थी. उनको अपने फूड प्रॉडक्ट्स के लिए आइसबर्ग लेट्यूस चाहिए था, जिसके चलते उन्होंने उनसे संपर्क किया और कहा कि अगर वे उनके नॉर्म्स के मुताबिक अच्छी क्वालिटी के आइसबर्ग लेट्यूस तैयार करेंगे तो वे इसको खरीद लेंगे. तब भारत में बहुत कम लोग इसके बारे में जानते थे और उन्हें इसकी खेती के लिए काफी परेशानी हुई.

खेती के गुर सीखने विदेश गए : बिनवंत सिंह ने बताया कि जब इसकी खेती के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली तो वे आइसबर्ग लेट्यूस की खेती सीखने के लिए चीन गए. वहां पर अलग-अलग देश के काफी एक्सपर्ट लोग 11 दिन के एक सेमिनार में आए हुए थे, जहां पर इस खेती को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. उसके बाद वे जापान, ऑस्ट्रेलिया, मेक्सिको, थाईलैंड और यूरोप के कई देशों में गए जहां उन्होंने इस खेती की बारीकी को समझा

80 एकड़ में कर रहे खेती : कभी आइसबर्ग लेट्यूस की खेती की एबीसीडी भी वे नहीं जानते थे और आज बिनवंत सिंह 80 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके पास काफी किसान आते हैं और उनसे इस खेती के बारे में सीख कर जाते हैं और फिर इस खेती को कर रहे हैं.

बड़े होटल और दूसरे राज्यों में करते हैं सप्लाई : बिनवंत सिंह ने बताया कि उन्होंने इस खेती की शुरुआत मैकडॉनल्ड कंपनी के लिए की थी जिसके साथ उनका पिछले काफी सालों से कॉन्ट्रैक्ट है. मैकडॉनल्ड अपने फूड प्रोडक्ट्स में उनके खेत में उगाए गए आइसबर्ग लेट्यूस का इस्तेमाल करता है क्योंकि उनकी क्वालिटी काफी ज्यादा बेहतर होती है. वे प्रोडक्शन से ज्यादा क्वालिटी पर विश्वास करते हैं क्योंकि क्वालिटी की वजह से उनके प्रोडक्ट की डिमांड है. आज वे मैकडॉनल्ड के अलावा कई होटल और देश के कई राज्यों में इसकी सप्लाई कर रहे हैं.

सर्दियों में होती है खेती : उन्होंने बताया कि आइसबर्ग लेट्यूस की खेती सर्दियों के मौसम में होती है और इसके लिए अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान -5 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए. सर्दियों के सीज़न में वे इसे अपने फार्म पर लगा देते हैं लेकिन उनके कस्टमर साल के 12 महीने उनसे इसकी डिमांड करते हैं जिसके चलते वे सोलन समेत हिमाचल के कई क्षेत्रों में इसकी खेती कर रहे हैं और कस्टमर्स की डिमांड पूरी कर रहे हैं.

1 एकड़ से करीब 9 टन प्रोडक्शन : बिनवंत सिंह के मुताबिक वे इसकी नर्सरी खुद तैयार करते हैं जिसमें करीब 1 महीने का वक्त लगता है. 1 एकड़ में आइसबर्ग लेट्यूस के 25 से 26 हजार पौधे लगाए जाते हैं. दो महीने की फसल से वे 9 टन तक उत्पादन लेते हैं. एक एकड़ में फसल लगाने से लेकर पूरी तरह से तैयार होने तक एक लाख 20 हजार रुपए का खर्च आता है, जबकि एक एकड़ से सवा दो लाख रुपए से लेकर ढाई लाख तक सब्जी निकल जाती है.

वैक्यूम प्रीकुलर सिस्टम : उन्होंने बताया कि सब्जी लगाने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि उनकी सब्जी बहुत ही जल्दी खराब हो जाती है. सरकारी रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक भारत में किसानों की 35 प्रतिशत सब्जी खराब हो जाती है. सब्जी को खराब होने से बचाने के लिए उन्होंने नॉर्थ इंडिया का सबसे पहले वैक्यूम प्रीकूलर सिस्टम अपने फार्म पर लगाया हुआ है. सब्जियों को खेत से निकालने के बाद यहां उसके अंदर रखा जाता है और 20 मिनट में ही सब्जी का टेंपरेचर चार डिग्री सेल्सियस तक आ जाता है. इसके बाद सब्जी को कोल्ड स्टोरेज में भेजा जाता है और फिर फ्रीजर वाले व्हीकल पर ट्रांसपोर्ट के जरिए भेजा जाता है जिससे सब्जी के जल्द खराब होने की आशंका काफी कम हो जाती है और शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है.

30 से 40 लोगों को दिया रोजगार : बिनवंत सिंह के फार्म पर परमानेंट 10 लोगों की टीम काम करती है. वहीं करीब 30 से 40 महिलाएं मजदूरी करती हैं. उनके फार्म पर काम करने वाली मजदूर महिला सीमा और उर्मिला ने बताया कि वे इसी गांव की रहने वाली है और बिनवंत सिंह के खेतों में मजदूरी का काम करती हैं. काम बिल्कुल आसान होता है. सब्जियों को काटकर उनकी पैकिंग करनी होती है. इससे उनके परिवारों की रोजी-रोटी चल रही है. जब सीज़न पूरे पीक पर होता है, तब करीब 50 से 60 लोग यहां काम करते हैं.

करोड़ों रुपए कमा रहे बिनवंत सिंह : बिनवंत सिंह की कहानी आज बाकी युवाओं और किसानों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है. उन्होंने लाखों रुपए तनख्वाह वाली अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ी. पिता के समझाने के बावजूद खेती को चुना और जोखिम उठाते हुए आज करोड़ों रुपए कमा रहे हैं. साथ ही दूसरे किसानों को आइसबर्ग लेट्यूस उगाने की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं.

आइसबर्ग लेट्यूस की खूबियां जानिए : आइसबर्ग लेट्यूस गोभी के समान गेंद के आकार में बढ़ता है. इसके पत्ते हल्के हरे और अंदर से लगभग सफेद होते हैं. सलाद, सैंडविच और बर्गर में इसका इस्तेमाल किया जाता है. इसमें विटामिन K, विटामिन A, फोलेट और फाइबर होता है.



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