ETV Bharat / bharat

दिल्ली में भवनों की सुरक्षा के लिए कड़े अग्निशमन नियम अधिसूचित, फॉर्म 'जे' में हुआ बड़ा बदलाव

दिल्ली सरकार के गृह विभाग द्वारा 28 अगस्त, 2026 को 'दिल्ली अग्निशमन सेवा (संशोधन) नियम, 2026' को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया गया है.

सीएम रेखा गुप्ता के साथ मंत्री आशीष सूद
सीएम रेखा गुप्ता के साथ गृह विभाग के मंत्री आशीष सूद (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Delhi Team

Published : August 29, 2026 at 10:20 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आग की अप्रत्याशित दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और बहुमंजिला इमारतों में सुरक्षा मानकों को अभेद्य बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर गृह विभाग द्वारा जारी राजपत्रित अधिसूचना के तहत 'दिल्ली अग्निशमन सेवा (संशोधन) नियम, 2026' को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है. यह संशोधन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एकीकृत भवन उप-विधि (UBBL) के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किए गए हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य शहर में निर्मित होने वाले भवनों की संरचनात्मक और अग्रिम अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी व जवाबदेह बनाना है.

नए संशोधनों की मुख्य विशेषताएं

गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली अग्निशमन सेवा नियम, 2010 में व्यापक फेरबदल किए गए हैं. नए नियमों के तहत अब भवनों की ऊंचाई और उनके ऑक्यूपेंसी की श्रेणियों के आधार पर अग्नि-निवारण के न्यूनतम मानकों को सीधे तौर पर संशोधित 'भवन उप-विधि' से जोड़ दिया गया है.

दिल्ली के गृह विभाग के मंत्री आशीष सूद का कहना है कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राजधानी में खड़े होने वाले हर कमर्शियल और रिहायशी परिसर में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के पुख्ता इंतजाम हों. नियमों के प्रभावी होने की तिथि से पहले लंबित पड़े सभी आवेदनों का निस्तारण आवेदन के समय लागू पुराने प्रावधानों के तहत ही किया जाएगा, जिससे आम नागरिकों और बिल्डरों को किसी प्रकार की असमंजस का सामना न करना पड़े.

न्यूनतम अग्नि सुरक्षा मानकों का दायरा बढ़ा

नियम 33 के तहत अब भवनों में अग्नि रोकथाम के लिए 18 सूत्रीय कड़े मानक तय किए गए हैं. इनमें प्रमुख रूप से अग्निशमन वाहनों के परिसर के अंदर तक सुगम आवागमन के लिए कम से कम 6 मीटर चौड़ा मार्गाधिकार अनिवार्य किया गया है. निकास द्वारों को आग के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखने के लिए फायर चेक डोर्स और प्रेशराइज़ेशन सिस्टम का होना जरूरी है. परिसरों में आटोमेटिक फायर डिटेक्शन, अलार्म प्रणाली, एमओईएफए (MOEFA), स्वचालित स्प्रिंकलर और उन्नत जल भंडारण की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है. फायर पंप, स्मोक वेंटिंग, फायरमैन लिफ्ट, इमरजेंसी लाइटिंग और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए निर्बाध वैकल्पिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी.

इसके साथ ही, यदि किसी विशेष श्रेणी के भवन के लिए उप-विभिदों में मानक स्पष्ट नहीं हैं, तो दिल्ली अग्निशमन सेवा के निदेशक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दे सकेंगे. वहीं, सरकार के पास विशेष क्षेत्रों या पुराने निर्माणों के मामले में नियमों को शिथिल या रूपांतरित करने का अधिकार सुरक्षित रखा गया है.

निरीक्षण रिपोर्ट के लिए नया 'फॉर्म-जे' जारी

सुरक्षा ऑडिटर द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए सातवीं अनुसूची के अंतर्गत 'प्रारूप-जे' (Form J) को पूरी तरह से संशोधित कर दिया गया है. अब ऑडिट रिपोर्ट में भवन की यूआईडी संख्या, भूतल व भूमिगत तलों का विवरण, और सभी 18 सुरक्षा मानकों (जैसे पहुंच मार्ग, होज़ रील, पंपिंग व्यवस्था, और वाटर स्टोरेज क्षमता) की स्थिति को आवश्यकता पूरी करना या न करना के आधार पर दर्ज करना अनिवार्य होगा. इस कदम से इमारतों में सुरक्षा खामियों को तुरंत पकड़ने और उन पर नकेल कसने में मदद मिलेगी.

दिल्ली राजपत्र: फॉर्म 'जे' और अग्नि सुरक्षा निरीक्षण रिपोर्ट के प्रमुख तकनीकी बिंदु

दिल्ली अग्निशमन सेवा (संशोधन) नियम, 2026 के तहत अधिसूचित नए फॉर्म 'जे' में सुरक्षा ऑडिटर्स के लिए एक विस्तृत और तकनीकी निरीक्षण प्रारूप निर्धारित किया गया है. इसके अंतर्गत भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच हेतु निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं और मानकों को शामिल किया गया है.

भवन पहुंच और निकास सुरक्षा

  • पहुंच मार्ग: भवन के चारों ओर आंतरिक पहुंच मार्ग और प्रवेश द्वार की चौड़ाई न्यूनतम 6 मीटर होना अनिवार्य है.
  • निकास द्वार और दाब-प्रणाली: आग के दुष्प्रभावों से सीढ़ियों, लिफ्ट वेल और लिफ्ट लॉबी को सुरक्षित रखने के लिए अग्नि-अवरोधक द्वार और प्रेशराइज़ेशन सिस्टम की स्थिति की जांच की जाती है.
  • धुआं प्रबंधन: बेसमेंट, भूतल और ऊपरी तलों पर धुआं प्रबंधन प्रणाली, डैम्पर्स और विद्युत शाफ्टों की सीलिंग की समीक्षा.

अग्निशमन उपकरण एवं प्रणालियां

  • अग्निशामक और होज़ रील: परिसरों में स्थापित अग्निशामक यंत्रों (आईएस मार्किंग सहित) और प्रत्येक मंजिल पर होज़ रील की संख्या व लंबाई की जांच.
  • डिटेक्शन और स्प्रिंकलर: स्वचालित फायर डिटेक्शन, अलार्म प्रणाली, एचूटर्स, एमओईएफए (MOEFA), पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम और स्वचालित स्प्रिंकलर प्रणाली की कार्यशीलता.
  • हाइड्रेंट व्यवस्था: आंतरिक हाइडेंट्स (राइज़र/डाउन-कॉमर) और यार्ड हाइडेंट्स (रिंगमेन) की उपलब्धता.

पंपिंग और जल भंडारण व्यवस्था

  • पंप हाउस: मुख्य पंप, जॉकी पंप और स्टैंडबाय पंप के डिस्चार्ज, हेड, ऑटोमैटिक स्टार्ट/मैन्युअल स्टॉप और पंप हाउस तक सुरक्षित पहुंच मार्ग.
  • जल भंडारण: भूमिगत टैंक (अंडरग्राउंड टैंक) और ओवरहेड टैंक की क्षमता, अग्निशमन सेवा प्रवेश द्वार तथा टैंक तक पहुंच की व्यवस्था.

आपातकालीन सुविधाएं और नियंत्रण कक्ष

  • संकेत-चिह्न: निकास संकेत, फ्लोर नंबरिंग और निकास मार्गों पर रिफ्लेक्टिव टेप मार्किंग.
  • फायर टावर और लिफ्ट: अग्निशमन टावर, फायरमैन ग्राउंडिंग स्विच और लिफ्ट कार में संचार व्यवस्था.
  • आपातकालीन बिजली: फायर पंप, प्रेशराइज़ेशन सिस्टम, सभी लिफ्टों, इमरजेंसी लाइटिंग और फायर कमांड सेंटर के लिए वैकल्पिक विद्युत आपूर्ति.
  • रिफ्यूज एरिया और कंट्रोल रूम: फायर चेक फ्लोर, रिफ्यूज एरिया का कुल क्षेत्रफल और स्वचालित सतत निगरानी प्रणाली के साथ अग्नि नियंत्रण कक्ष.

ये भी पढ़ें:

  1. DDA का रक्षाबंधन पर बड़ा तोहफा: 1,287 फ्लैटों की ऑनलाइन बुकिंग आज से शुरू, 25% तक की भारी छूट
  2. मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047 की रूपरेखा तैयार: अगले 3 महीनों में 20 से अधिक अहम बैठकें करेगा DDA
  3. 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' हुआ जारी: राजधानी के विकास का नया रोडमैप तैयार, जानें क्या बदलेगा