पंजाब में आवारा कुत्तों ने UP के आठ वर्षीय बच्चे की ले ली जान, पिता को खाना देने गया था खेत पर
सुल्तानपुर लोधी में 6 से 7 आवारा कुत्तों ने एक 8 साल के मासूम बच्चे पर हमला कर उसे बुरी तरह नोच डाला.


Published : February 27, 2026 at 10:22 PM IST
|Updated : February 27, 2026 at 10:55 PM IST
सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला): पंजाब में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा मामला सुल्तानपुर लोधी से सामने आया है, जहां 6 से 7 आवारा कुत्तों ने एक 8 साल के मासूम बच्चे पर हमला कर उसे बुरी तरह नोच डाला. गंभीर हालत में माता-पिता ने बच्चे को पहले सिविल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
उत्तर प्रदेश के बहराइच के रहने वाले मृतक बच्चे के पिता, मुनेजर ने बताया कि वे खेतों में काम कर रहे थे. दोपहर के समय उनका बेटा उन्हें खाना देने आया था. इसके बाद बेटा दूसरे खेत में चला गया, जहां 6 से 7 कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया. इस दौरान कुत्तों ने उसे बुरी तरह काट लिया. बेटे की चीखें सुनकर वह भागे और उसे कुत्तों से छुड़ाया.
गंभीर हालत में माता-पिता ने बच्चे को पहले सिविल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से डॉक्टरों ने उसकी हालत देखते हुए उसे जालंधर रेफर कर दिया. डॉ. आकाशदीप शर्मा ने बताया कि यह आवारा कुत्तों द्वारा बच्चे को बुरी तरह काट लेने और घायल करने का मामला था. कुत्तों के काटने से बच्चे की हालत बहुत नाजुक थी. उसकी जांघों, पैरों और हाथों पर कुत्तों के काटने के गहरे निशान थे.
पंजाब म्युनिसिपल एक्ट, 1911 के अनुसार खतरनाक जानवरों को नियंत्रित करना और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना स्थानीय प्रशासन (नगर निकाय) का कर्तव्य है. एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2001 के तहत, आवारा कुत्तों की नसबंदी करना, उनका टीकाकरण करना और यदि कुत्ता खतरनाक हो तो उसे अलग (क्वारंटाइन) रखना अनिवार्य है.
सुप्रीम कोर्ट ने भी यह साफ किया है कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और सुरक्षा हर नागरिक का मौलिक अधिकार है. अदालतों ने यह भी कहा है कि यदि किसी क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही के कारण आवारा कुत्तों के हमले से गंभीर चोट लगती है या मौत होती है, तो संबंधित स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार की जिम्मेदारी तय की जा सकती है और मुआवजा दिया जा सकता है.
इसे भी पढ़ेंः

