जेएमएम की विस्तारित केंद्रीय समिति की बैठक, एमएमडीआर संशोधन विधेयक-2026 के खिलाफ व्यापक आंदोलन की रणनीति बनी
रांची में जेएमएम की विस्तारित केंद्रीय समिति की बैठक हुई. इसमें एमएमडीआर संशोधन विधेयक के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनी. उपेंद्र कुमार की रिपोर्ट.


Published : August 20, 2026 at 8:40 PM IST
|Updated : August 20, 2026 at 8:46 PM IST
रांची: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा मानसून सत्र के दौरान खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 (एमएमडीआर संशोधन विधेयक) पास कराया गया. अब इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए राज्य की सत्तारूढ़ और सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने कमर कस ली है. इसके लिए रांची के सोहराय भवन में अपनी केंद्रीय समिति की विस्तारित बैठक हुई.
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आज हुई बैठक में झारखंड मुक्ति मोर्चा के सभी पदाधिकारी, सभी विधायक, झामुमो कोटे से सरकार में शामिल सभी मंत्री, सांसद के साथ-साथ सभी जिलों के जिलाध्यक्ष-जिला सचिव, महानगर अध्यक्ष, महानगर सचिव और जिला संयोजक शामिल हुए.
बैठक में एमएमडीआर संशोधन पर विस्तृत चर्चा और सर्वसम्मति
राज्य के मुख्यमंत्री और झामुमो सुप्रीमो हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झामुमो की विस्तारित केंद्रीय समिति की बैठक हुई. इसमें संसद से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 से झारखंड को होने वाले नुकसान को लेकर मुख्यमंत्री ने विस्तार से जानकारी दी. इस दौरान सभी केंद्रीय समिति के सदस्यों की राय ली. बैठक के दौरान सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में केंद्र के इस संशोधन को काला कानून बताते हुए जोरदार आंदोलन करने की इच्छा जताई.
'झारखंड के विकास पर लगेगी ब्रेक, राज्यों से सलाह-मशविरा तक नहीं'
झारखंड मुक्ति मोर्चा की केंद्रीय समिति की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री और झामुमो सुप्रीमो हेमंत सोरेन ने कहा कि कई ज्वलंत मुद्दों पर आज की बैठक में चर्चा हुई, जिसमें से एक है “खान-खनिज संशोधन कानून-2026”. इससे झारखंड को बहुत बड़ा नुकसान होने वाला है. उन्होंने कहा कि झारखंड हाल के वर्षों में बड़ी तेजी से अपने आपको विकसित राज्यों की ओर ले जाने की ओर अग्रसर हो रहा था. दुनिया के बड़े इकनॉमिक फोरम से लेकर नवाचार, अपनी नीतियों के माध्यम से राज्य की शिक्षा, स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, रोजगार के अवसर पैदा करने, ग्रामीण और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कार्यक्रम चल रहा है, लेकिन इस काले कानून से राज्य को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा, जिसका असर राज्य के विकास कार्यों पर पड़ेगा.

मुख्यमंत्री और झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि एमएमडीआर कानून में संशोधन का बड़ा और प्रतिकूल असर राज्यों पर पड़ेगा, बावजूद इसके राज्यों के साथ चर्चा तक नहीं करना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के इस निर्णय का प्रतिकूल असर राज्य के आदिवासी, मूलवासी, दलित, पिछड़े, मजदूरों की जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा और तो और एक कानून में संशोधन के बाद हमारा केंद्र पर बकाया 1,36,000 करोड़ भी हाशिये पर चला जाएगा. यह केंद्र की सरकार ने इसलिए किया है ताकि झारखंड अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सके और कमजोर राज्य बना रहे.
लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे: हेमंत सोरेन
मुख्यमंत्री और झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि हम अपने हक और अधिकार की लड़ाई लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानूनी तरीके से लड़ेंगे क्योंकि हमें ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार विकसित राज्यों के प्रति और सक्षम लोगों के प्रति ज्यादा संवेदनशील है. आदिवासी, दलित, पिछड़े के प्रति इनकी कोई संवेदना नहीं है. हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड देश के विभिन्न सेक्टर के विकास को लेकर अहम भूमिका निभाता है, उसी राज्य का हक और अधिकार छीनकर अपनी जेबें भरने की कोशिश की गई है.

आनन-फानन में पास कराया गया संशोधन: महुआ माजी
झामुमो की राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि आज की बैठक में सर्वसम्मति से सभी ने खान-खनिज संशोधन कानून के खिलाफ व्यापक जनांदोलन करने के विचार प्रकट किए. उन्होंने कहा कि आनन-फानन में संसद से केंद्र की मोदी सरकार ने इस कानून में संशोधन विधेयक लाया और बिना विस्तृत चर्चा के इसे पास करा लिया. राज्यसभा सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास खान-खनिज संशोधन अधिनियम कानून को लेकर केंद्रीय मंत्रियों का भी फोन आया था.
जेपीएससी-जेएसएससी मामले पर महुआ माजी की प्रतिक्रिया
सरकार द्वारा जेपीएससी-जेएसएससी के मामले में सरकार के निर्णय के बाद आज झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए महुआ माजी ने कहा कि इस तरह के फैसले आने की संभावना पार्टी को थी. यही वजह है कि आंदोलित छात्रों की ज्यादातर मांगें सरकार ने मान ली थीं, लेकिन जो नौकरी कर रहे हैं उनकी सेवा समाप्त करने की बात नहीं मानी जा रही थी. लेकिन आंदोलित छात्रों के दबाव में यह फैसला सरकार को लेना पड़ा था. झामुमो की राज्यसभा सांसद ने माना कि सेवा समाप्त करने वाले सरकार के फैसले से कई लोगों के साथ नाइंसाफी हो रही थी.

राज्य में लागू नहीं होने देंगे संशोधित एमएमडीआर कानून: विनोद पांडेय
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि राज्य में झामुमो एमएमडीआर कानून लागू नहीं होने देंगे. झामुमो इस मामले को लेकर संवैधानिक, कानूनी और जमीनी लड़ाई लड़ेगा. एक-दो दिन में आंदोलन की रूपरेखा तय हो जाएगी. जब तक गांव-गांव जाकर हमारे कार्यकर्ता लोगों के बीच जागरूकता लाएंगे कि कैसे केंद्र ने झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार करते हुए यह काला कानून पास कराया है. विनोद पांडेय ने कहा कि इसके अलावा बैठक में एसआईआर और परिसीमन को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई.
बैठक में लोकसभा सांसद जोबा मांझी, विजय हांसदा, नलिन सोरेन, राज्यसभा सांसद महुआ माजी, बैद्यनाथ राम, हेमंत सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, हफीजुल हसन अंसारी, विधायक कल्पना सोरेन, बसंत सोरेन, केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय, सुप्रियो भट्टाचार्या सहित कई नेता और विधायक शामिल हुए.
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