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कहानी बसंत पंडो की: देश के पहले राष्ट्रपति ने लिया था इनको गोद, डॉ राजेंद्र प्रसाद ने किया था नामकरण

1952 में डॉ राजेंद्र प्रसाद सरगुजा आए थे. 73 साल बाद अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 नवंबर को अंबिकापुर आ रहीं हैं.

DR RAJENDRA PRASAD
कहानी बंसत पंडो की (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : November 10, 2025 at 6:51 PM IST

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Updated : November 10, 2025 at 6:59 PM IST

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सरगुजा: देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 नवंबर को अंबिकापुर का दौरा करेंगी. राष्ट्रपति अपने दौरे के दौरान जनजातीय समाज के भव्य आयोजन में शामिल होंगी. राष्ट्रपति के दौरे को लेकर सारी तैयारियां पूरी की जा रही हैं. छत्तीसगढ़ का सरगुजा संभाग आदिवासी बहुल क्षेत्र है. सरगुजा संभाग में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग रहते हैं.

देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद आए थे सरगुजा: साल 1952 में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने सरगुजा का दौरा किया था. उस वक्त डॉ राजेंद्र प्रसाद ने सरगुजा महाराज से रघुनाथ पैलेस में मुलाकात की थी. सरगुजा पैलेस से निकलकर डॉ राजेंद्र प्रसाद जंगल में रहने वाले पंडो समाज के लोगों से मिलने पहुंचे. डॉ राजेंद्र प्रसाद ने तब जंगल में रह रहे पंडो जनजाति के लोगों से मुलाकात एक पेड़ के नीचे बनी झोपड़ी में की.

कहानी बंसत पंडो की (ETV Bharat)


बसंत पंडो को लिया था गोद: सरगुजा दौरे पर राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने सूरजपुर में एक बच्चे को गोद लिया था. डॉ राजेंद्र प्रसाद ने उस बच्चे का नामकरण भी किया था. आज उस शख्स की उम्र 80 साल हो चुकी है. बसंत पंडो कहते हैं कि जब डॉ राजेंद्र प्रसाद यहां आए थे तब उनकी उम्र महज 8 साल की थी. आज उनकी उम्र 80 साल की हो चुकी है. बसंत पंडो बताते हैं कि तब राष्ट्रपति ने उनको गोद लेकर उनका नामकरण खुद किया था.

DR RAJENDRA PRASAD
डॉ राजेंद्र प्रसाद ने किया था नामकरण (ETV Bharat)

पंडो जनजाति के लोगों को 13 जगहों पर बसाया गया: बसंत पंडो को गोद लिए जाने के बाद पंडो जनजाति के लोगों को राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहलाने का दर्जा मिला. तब से इस जनजाति के लोगों को राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र माना जाता है. 1952 में जब डॉ राजेंद्र प्रसाद ने बसंत पंडो को गोद लिया तब पंडो जनजाति के उत्थान के लिए उनको बैल, बीज और बैलगाड़ी शासन की ओर से दी गई. पंडो जनजाति के लोगों को बसाने कि लिए बकायदा 13 कालोनियां बसाई गई. इन कालोनियों में पंडो जनजाति के लोग रहने लगे.

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कहानी बंसत पंडो की (ETV Bharat)



मुझे जानकारी मिली है कि वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यहां आ रहीं हैं. मैं भी उनसे मिलना चाहता हूं. इससे पहले जब देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद यहां आए थे तो उन्होने मुझे गोद लिया और मेरा नाकरण किया था. उस वक्त जंगल में रहने वाले सभी पंडो जनजाति के लोगों को यहां बुलाया गया था. मैं भी अपने परिवार के साथ यहां पहुंचा था. तब मुझे उनकी गोद में बिठाया गया. मुझे नया शर्ट पैंट पहनाया और मेरा नामकरण किया. मेरा नाम रखा बसंत लाल. इससे पहले लोग मुझे गोलू बुलाया करते थे. उस वक्त हम सभी को खेती के लिए बैल, बैलगाड़ी और 10 एकड़ जमीन दिए गए. मुझे राष्ट्रपति जी अपने साथ ले जा रहे थे. अधिकारियों से बोला भी लेकिन अधिकारी नहीं ले गए. अगर मैं चला गया होता तो मेरी जीवन संवर गया होता: बसंत पंडो

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कहानी बंसत पंडो की (ETV Bharat)



राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलना चाहते हैं बसंत पंडो: पंडो समाज के नेता और बसंत पंडो के रिश्तेदार उदय कहते हैं कि ज्यादातर पंडो समाज के लोग जंगलों में खानाबदोश जीवन जीते हैं. बसंत पंडो जी को जब से खबर मिली है कि वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यहां रही हैं वो बहुत खुश नजर आ रहे हैं. उनकी इच्छा है कि जिला प्रशासन की टीम उनको राष्ट्रपति से मिलवाए. बसंत पंडो जी का कहना है कि देश के पहले राष्ट्रपति ने उनको गोद लिया था और उनका नामकरण किया था इस लिहाज से उनकी मुलाकात जरुर कराई जानी चाहिए.



73 साल बाद राष्ट्रपति का हो रहा दौरा: देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के बाद दूसरी बार राष्ट्रपति का सरगुजा दौरा होने जा रहा है. 80 साल के बसंत पंडो के साथ पूरा पंडो समाज इसको लेकर काफी खुश है. पंडो समाज के लोग चाहते हैं कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उनसी मुलाकात कराई जाए. पंडो समाज ने प्रशासन से निवेदन भी किया है की उनकी मुलाक़ात राष्ट्रपति से कराई जाए.

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Last Updated : November 10, 2025 at 6:59 PM IST