सामरिक रूप से अहम टनकपुर–जौलजीवी मार्ग पर तेज होगा कार्य, SSB ने दी एलाइनमेंट को लेकर स्वीकृति
टनकपुर जौलजीबी मार्ग को लेकर SSB ने एलाइनमेंट पर स्वीकृति दे दी है. पीडब्ल्यूडी ने मार्ग के सर्वे का काम शुरू कर दिया है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : December 28, 2025 at 9:44 AM IST
देहरादून: उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों के लिए सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण टनकपुर–जौलजीबी सड़क परियोजना एक बार फिर चर्चा में है. यह बहुप्रतीक्षित सड़क परियोजना फिलहाल केंद्रीय गृह मंत्रालय की औपचारिक हरी झंडी का इंतजार कर रही है. हालांकि SSB ने सड़क के एलाइनमेंट पर स्वीकृति दे दी है. जिसके बाद इसका काम तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है. दरअसल इस मार्ग के एलाइनमेंट को लेकर लंबे समय से मंथन चल रहा था, क्योंकि सड़क के एक हिस्से का एलाइनमेंट सशस्त्र सीमा बल (SSB) की रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप तय किया जाना है.
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रोड: खास बात यह है कि उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस सड़क परियोजना को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रखा है. विभाग लगातार SSB के स्तर पर समन्वय बनाए हुए है ताकि एलाइनमेंट से जुड़ी सभी औपचारिकताओं को समय रहते पूरा किया जा सके. परियोजना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि PWD हर सप्ताह इस सड़क पर हो रही प्रगति की समीक्षा कर रहा है, जिससे किसी भी स्तर पर देरी न हो.
पहले हो चुका रोड का कुछ निर्माण: टनकपुर से जौलजीबी तक लगभग 155 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण प्रस्तावित है. इनमें से करीब 55 किलोमीटर सड़क का निर्माण पहले ही किया जा चुका है. हालांकि, शेष हिस्से में एलाइनमेंट को लेकर सहमति नहीं बन पाने के कारण पूर्व में इस परियोजना पर काम आगे नहीं बढ़ सका. अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं और लगभग 66 किलोमीटर सड़क के हिस्से के लिए सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है, जिससे परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है.
एलाइनमेंट को अंतिम रूप देने की कोशिश: टनकपुर–जौलजीबी मार्ग को लेकर पूर्व में सुरंग निर्माण का विकल्प भी विचाराधीन रहा है, लेकिन केंद्रीय एजेंसियों ने रणनीतिक और तकनीकी कारणों से टनल की बजाय नदी के किनारे सड़क निर्माण को अधिक उपयुक्त माना. इसी आधार पर सड़क के एलाइनमेंट को अंतिम रूप देने की कोशिशें की जा रही हैं.
SSB की ओर से जिस एलाइनमेंट को मंजूरी दी गई है, उसकी जानकारी कंसलटेंट को उपलब्ध करा दी गई है. उसी के अनुरूप आगे की कार्ययोजना तैयार की जा रही है और फिलहाल सर्वे का काम तेजी से चल रहा है. अब उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की अंतिम स्वीकृति मिलते ही यह महत्वाकांक्षी परियोजना जमीन पर तेजी से आकार लेगी.
राजेश शर्मा, प्रमुख अभियंता (ENC), लोक निर्माण विभाग
लंबे समय से रोड की कवायद: इस परियोजना को लेकर प्रयास नए नहीं हैं. साल 2014 से ही इस सड़क के निर्माण से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करने की कवायद शुरू हो गई थी और 2015 तक केंद्र सरकार की ओर से सैद्धांतिक स्वीकृति भी मिल चुकी थी. इसके बावजूद एलाइनमेंट से जुड़ी जटिलताओं के चलते यह परियोजना लंबे समय तक अटकी रही. अब एक बार फिर इसके धरातल पर उतरने की संभावनाएं मजबूत होती दिख रही है.
सीमावर्ती क्षेत्रों को मिलेगा लाभ: टनकपुर–जौलजीबी सड़क न केवल सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके बनने से कुमाऊं क्षेत्र के कई दूरस्थ और सीमांत इलाके सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे. इस सड़क के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों को जिला और मंडल मुख्यालयों से जोड़ना आसान होगा, जिससे प्रशासनिक पहुंच के साथ-साथ आम लोगों की आवाजाही भी सुगम बनेगी.
आदि कैलाश पर्यटन को लगेंगे पंख: पर्यटन के लिहाज से भी यह मार्ग बेहद अहम माना जा रहा है. इस सड़क के बनने से धारचूला और आगे आदि कैलाश तक पर्यटकों की पहुंच कम समय में संभव हो सकेगी. साथ ही पिथौरागढ़ और चंपावत जैसे महत्वपूर्ण जिलों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति मिलेगी.
एलाइनमेंट पर सर्वे कार्य शुरू: लोक निर्माण विभाग के अनुसार अभी करीब 100 किलोमीटर सड़क का निर्माण शेष है. इसके लिए PWD ने SSB को एलाइनमेंट के तीन विकल्प भेजे थे, जिनमें से एक को SSB ने स्वीकृति दे दी है. स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित एलाइनमेंट पर सर्वे कार्य भी शुरू कर दिया गया है.
पढ़ें-

