'RLM में टूट हो चुकी है, बस ऐलान बाकी है', बोले विधायक माधव आनंद- उपेंद्र कुशवाहा ने आत्मघाती कदम उठाया
बिहार में विधानसभा चुनाव भले ही खत्म हो गया हो, पर पिक्चर अभी बाकी है. ऐसा हम क्यों कह रहे हैं पढ़ें पूरी खबर

Published : December 26, 2025 at 8:28 PM IST
रिपोर्ट : अविनाश
पटना : पिछले कुछ वर्षों का इतिहास देखें तो पता चलता है कि बिहार में खरमास के बाद राजनीतिक हलचल होती है. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा में जिस प्रकार से 'खटास' है, कहीं उसका पटाक्षेप खरमास बाद तो नहीं होगा?
'ये आत्मघाती कदम' : उपेंद्र कुशवाहा बिहार की राजनीति में सबसे चर्चित राजनेताओं में से एक हैं. कभी पार्टी टूट के कारण, तो कभी गठबंधन बदलने के कारण चर्चा में रहते हैं. हाल फिलहाल में बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाना उनके लिए गले का फांस दिख रहा है. पार्टी के विधायक उसे सुसाइडल स्टेप यानी आत्मघाती कदम बता रहे हैं.
माधव आनंद ने इशारों-इशारों में बहुत कुछ कह दिया : मधुबनी से चुनाव जीतने वाले माधव आनंद तो खुलकर अपनी नाराजगी भी जता रहे हैं. माधव आनंद दिल्ली में हैं और ईटीवी भारत से फोन पर हुई बातचीत में खुलकर कह रहे हैं कि उपेंद्र कुशवाहा खुद राज्यसभा में हैं. उनकी पत्नी विधायक बन गईं. बेटे को मंत्री बना दिये हैं जबकि किसी सदन के सदस्य भी नहीं हैं. बहू को भी राजनीति में लाने की बात हो रही है, तो ऐसे में पार्टी के कार्यकर्ता क्या करेंगे?

''हम पार्टी में हैं पर आप ही बताइये हम कार्यकर्ताओं को क्या जवाब देंगे? उपेंद्र कुशवाहा ने सुसाइडल स्टेप उठाया है.''- माधव आनंद, आरएलएम विधायक
माधव आनंद उपेंद्र कुशवाहा के साथ लंबे समय से हैं. हालांकि पार्टी में हो रही उपेक्षा और उपेंद्र कुशवाहा का परिवार प्रेम उनकी नाराजगी वजह है. उन्होंने बातचीत के दौरान कई मौके का जिक्र किया जब उन्हें अवसर प्रदान नहीं किया गया.
कुशवाहा के भोज से गायब, नितिन नबीन के साथ : उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा में मधुबनी से चुनाव जीतने वाले माधव आनंद, बाजपट्टी से चुनाव जीतने वाले रामेश्वर महतो और दिनारा से चुनाव जीतने वाले आलोक सिंह विशेष रूप से चर्चा में है. दरअसल, जिस दिन उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में सरकारी आवास पर लिट्टी मटन का भोज दिया था उस दिन तीनों उस भोज से गायब रहे. हालांकि उसी दिन बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ दिखाई दिए. तीनों की तरफ से सोशल मीडिया पर पोस्ट भी डाला गया.

दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने के बाद बाजपट्टी के विधायक रामेश्वर महतो ने तो खुलकर सोशल मीडिया के माध्यम से निशाना साधा था. रामेश्वर महतो ने फेसबुक पर लिखा था, राजनीति में सफलता केवल भाषणों से नहीं, बल्कि सच्ची नीयत और दृढ़ नीति से मिलती है. जब पार्टी नेतृत्व की नीयत धुंधली हो जाए और नीतियां जनहित से अधिक स्वार्थ की दिशा में मुड़ने लगें, तब जनता को ज्यादा दिनों तक भ्रमित नहीं रखा जा सकता. आज का नागरिक जागरूक है, वह हर कदम, हर निर्णय और हर इरादे को बारीकी से परखता है.
राजनीति में सफलता केवल भाषणों से नहीं, बल्कि सच्ची नीयत और दृढ़ नीति से मिलती है। जब नेतृत्व की नीयत धुंधली हो जाए और नीतियाँ जनहित से अधिक स्वार्थ की दिशा में मुड़ने लगें, तब जनता को ज्यादा दिनों तक भ्रमित नहीं रखा जा सकता। आज का नागरिक जागरूक है—वह हर कदम, हर निर्णय और हर इरादे…
— Rameshwar kumar Mehto (@Rameshwar_Mehto) December 12, 2025
कुशवाहा ने सवाल से किया किनारा : रोहतास में जब राष्ट्रीय लोक मोर्चा में टूट की अटकलों पर उपेंद्र कुशवाहा से सवाल किया गया तो, वह पत्रकारों पर ही भड़क गए. उन्होंने पत्रकारों को नसीहत देते हुए कहा कि आपके पास वाजिब सवाल ही नहीं है, जिसका जवाब दिया जाए. आपलोगों के ऐसे सवालों का मेरे पास कोई जवाब नहीं क्योंकि यह वाजिब सवाल ही नहीं है. मतलब उन्होंने सवाल से किनारा कर लिया.
"सूत उठकर चले आए हैं. क्या फालतू-फालतू सवाल कर रहे हैं. आप लोगों के पास कोई सवाल नहीं है. अरे भाई यह कैसा सवाल है. कोई सवाल हो तो उसका जवाब दिया जाता है. चलिए ठीक है हो गया."- उपेंद्र कुशवाहा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय लोक मोर्चा
'उपेंद्र कुशवाहा स्थिति के लिए वह खुद जिम्मेदार' : राजनीतिक विशेषज्ञ अरुण पांडे कहते हैं कि जिस प्रकार की स्थिति दिखाई पड़ रही है, उससे तो साफ है कि पार्टी लगभग टूट चुकी है. बस औपचारिक ऐलान बाकी है. वैसे उपेंद्र कुशवाहा ने जो स्थिति पैदा की है उसके लिए वह खुद जिम्मेदार है.
''बिहार की राजनीति में उपेंद्र कुशवाहा को नीतीश कुमार ने ही लाया था. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए, राज्यसभा भेजा, पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी दी, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार से ही भिर गए. उन्हें पार्टी से बाहर जाना पड़ा. केंद्र सरकार में जब मंत्री थे तो बीजेपी से भिर गए. इस कारण अरुण कुमार और रामकुमार शर्मा जो उनके सांसद थे साथ छोड़ दिया.''- अरुण पांडे, राजनीतिक विशेषज्ञ
'अलग गुट बना सकते हैं विधायक' : अरुण पांडे आगे कहते हैं कि इस बार विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी विधायक बन गई हैं. खुद सांसद हैं और बेटे को उन्होंने मंत्री बना दिया है. बेटा एमएलसी भी बन जाएगा. इसी को लेकर विधायकों में नाराजगी है, क्योंकि विधायक खुद मंत्री बनना चाह रहे थे. अब तीन विधायक किसके साथ जाएंगे यह बड़ा सवाल है. चूंकि उपेंद्र कुशवाहा एनडीए में ही हैं ऐसे में तीनों विधायक अलग गुट बनाने की मांग विधानसभा में कर सकते हैं. उसके बाद सरकार का समर्थन कर देंगे.
'RLM का अंदरूनी मामला' : बीजेपी और जदयू के लोग फिलहाल इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. जदयू प्रवक्ता डॉक्टर मधुरेंद्र पांडे का कहना है कि यह उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का अंदरूनी मामला है. हम लोग अपने सहयोगी दलों के विधायकों को तोड़ने में विश्वास नहीं रखते हैं. हालांकि विपक्ष को एनडीए के अंदर मचे घमासान के कारण हमला करने का मौका मिल गया है.
''सब कुछ बीजेपी के इशारे पर हो रहा है. उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार और जदयू की राजनीति करते हैं, लेकिन बीजेपी को यह पसंद नहीं है.''- एजाज अहमद, प्रवक्ता, आरजेडी

दो दशक से हमेशा चर्चा में रहे हैं कुशवाहा : उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी बिहार में पहले कई बार टूट चुकी है. 1985 से बिहार की राजनीति में उपेंद्र कुशवाहा सक्रिय हैं, लेकिन 2009 में जदयू से निकल जाने के बाद पहली बार अपनी पार्टी बनाई, जिसका नाम रखा राष्ट्रीय समता पार्टी. लेकिन 2009 में ही नीतीश कुमार से फिर बेहतर संबंध होने के बाद अपनी पार्टी को जदयू में विलय करा दिया.
2013 में उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार से नाराजगी होने के बाद फिर से अपनी नई पार्टी का गठन किया और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी बनाया. 2014 में एनडीए के साथ लोकसभा चुनाव में गठबंधन भी हो गया. उनके साथ पार्टी के दो और सांसद 2014 में चुने गए. केंद्र में उपेंद्र कुशवाहा मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री भी बनाए गए, लेकिन 2018 में कुशवाहा मंत्रिमंडल से इस्तीफा देते हुए एनडीए को छोड़ दिया.
2019 के लोकसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा का महागठबंधन से समझौता हुआ हुआ, लेकिन खुद दो जगह से चुनाव लड़ने के बाद भी उपेंद्र कुशवाहा और उनकी पार्टी के नेता चुनाव नहीं जीत पाए. 2020 में महागठबंधन से भी उपेंद्र कुशवाहा अलग हो गये और बीएसपी के साथ ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फंड बनाया. 243 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद एक भी सीट पर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी जीत नहीं पाई.
JDU में विलय : उपेंद्र कुशवाहा फिर से जदयू में अपनी पार्टी का विलय करवा दिया लेकिन बहुत दिनों तक उपेंद्र कुशवाहा जदयू में फिर नहीं रहे और फिर से अलग होकर अपनी नई पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा बना ली. पिछले दो चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के साथ चुनाव लड़ रहे हैं. 2024 में उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के बैनर तले राष्ट्रीय लोक मोर्चा से काराकाट से चुनाव लड़े थे पवन सिंह के कारण विवाद भी हुआ और चर्चा में भी रहे लेकिन चुनाव हार गये बाद में बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा भेजा.
2025 विधानसभा चुनाव में एनडीए के बैनर तले राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 6 सीट मिली, जिसमें से चार पर जीत मिली है. सासाराम से उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी भी चुनाव जीती हैं. जब मंत्रिमंडल का गठन हुआ तो कुशवाहा ने अपने बेटे को जो किसी सदन का सदस्य नहीं है मंत्री बना दिया. पार्टी के विधायकों में नाराजगी इसी को लेकर है.
सांसदों ने छोड़ा साथ : एक तो गठबंधन बदलने और पार्टी बनाने के कारण उपेंद्र कुशवाहा चर्चा में रहे इस दौरान उपेंद्र कुशवाहा के विधायक और सांसद भी साथ छोड़ते रहे. 2014 में जीते दो सांसदों ने उपेंद्र कुशवाहा का साथ छोड़ दिया. 2014 में जीते अरुण कुमार और रामकुमार शर्मा उपेंद्र कुशवाहा का साथ छोड़कर जदयू में शामिल हो गए.
विधायक भी हुए अलग : उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के तीन विधायक भी 2018 में उन्हें छोड़कर जदयू में शामिल हुए थे. जिसमें से भगवान सिंह कुशवाहा और ललन पासवान भी थे. उपेंद्र कुशवाहा के एमएलसी से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक दूसरे दलों में शामिल होते रहे हैं. 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रमेश कुशवाहा जदयू में शामिल हो गये. उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी सिवान से चुनाव लड़ी जीती भी.
'बेटा को मंत्री बनाए तो..' : विधानसभा चुनाव के बाद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा से बड़े पैमाने पर नेता दूसरे दलों में जा रहे हैं. इसीलिए उपेंद्र कुशवाहा को अपनी पार्टी की सभी इकाइयों को भंग करना पड़ा. अब तीन विधायकों को लेकर उपेंद्र कुशवाहा की मुश्किल बढ़ी हुई है. उपेंद्र कुशवाहा ने जिस प्रकार से अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया और उसके बाद कई बयान दिया उन सब को लेकर तीनों विधायकों में नाराजगी है और खुलकर अपनी बात कह रहे हैं.
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