पृथ्वी के आज सबसे करीब होगा बृहस्पति, खुली आंखों से दिखेगा अद्भुत नजारा
भारत में दिखेगा खगोलीय नजारा, जानिए खगोल वैज्ञानिक ने इसके पीछे क्या वजह बताई?

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 10, 2026 at 9:55 AM IST
गोरखपुर: बृहस्पति ग्रह (Jupiter) आज पृथ्वी के सबसे करीब होगा. इसे खगोल विज्ञान में 'विरोध' (Opposition) की स्थिति कहा जाता है. वीर बहादुर सिंह नक्षत्र शाला गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जब पृथ्वी, सूर्य और बृहस्पति एक सीधी रेखा में होते हैं तो यह रात भर, वर्ष में सबसे अधिक और चमकीला होने के साथ बड़ा दिखाई देता है.
पूरी दुनिया में दिखेगा सुंदर नजारा: यह भारत सहित पूरी दुनिया से बिना दूरबीन (टेलीस्कोप) के भी आसानी से दिखाई देगा. खासकर आधी रात के आसपास जब यह आकाश में सबसे ऊंचा पर होगा, तब मिथुन राशि (Gemini constellation) में दिखेगा, जोकि एक शानदार खगोलीय घटना होगी. 10 जनवरी 2026 को सौरमंडल का यह सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति (Jupiter) पृथ्वी के ठीक सामने यानी 'अपोजिशन' (Opposition) की स्थिति में होगा.
खगोलविद ने इस दुर्लभ खगोलीय घटना की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि, यह साल 2026 का वह समय होगा, जब बृहस्पति न केवल पृथ्वी के सबसे करीब होगा, (विरोध/अपोजिशन लगभग 62.8 करोड़ किलोमीटर दूर होता है) बल्कि अपनी पूरी चमक के साथ पूरी रात आकाश में दिखाई देगा.
क्या है 'अपोजिशन' की घटना: खगोलविद के अनुसार, "विपक्ष या अपोजिशन (Opposition) वह स्थिति है जब पृथ्वी, सूर्य और बृहस्पति के बीच में आ जाती है. इस दौरान सूर्य पश्चिम में अस्त हो रहा होता है और ठीक उसी समय बृहस्पति पूर्व से उदय होता है. चूंकि इस समय पृथ्वी और बृहस्पति के बीच की दूरी न्यूनतम होती है, इसलिए यह ग्रह आकार में बड़ा और सामान्य से कई गुना अधिक चमकदार दिखाई देता है. यह खगोलीय घटना आमतौर पर हर 13 महीने में घटित होती है, लेकिन इसका प्रकाश इतना शानदार हर बार नहीं होता है. इसीलिए इस बार इस खगोलीय घटना को जरूर देखें.
भारत में कैसा होगा नजारा: खगोलविद ने बताया कि वैसे तो, माह जनवरी 2026 की रातों में भारत के अधिकांश स्थानों से बृहस्पति स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, लेकिन, विरोध/ विपरीत के दौरान, भारत के किसी भी कोने से लोग इस शानदार खगोलीय घटना का आनंद ले सकते हैं. इस विरोध के दौरान बृहस्पति ग्रह की चमक का स्तर काफी अनुकूल रहेगा एवं इस दौरान बृहस्पति ग्रह -2.7 मैग्नीट्यूड पर चमकेगा. इस दौरान यह इतना तेजस्वी होगा कि रात के आकाश में चंद्रमा और शुक्र ग्रह के बाद सबसे चमकदार पिंडों में यही बेमिसाल नजर आएगा.
कहां और किस दिशा में दिखाई देगा: खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दौरान बृहस्पति ग्रह, मिथुन राशि में मौजूद रहेगा. यूं कहें कि इस बार बृहस्पति मिथुन (Gemini) तारामंडल में स्थित होगा. इसे पहचानने के लिए आप पूर्व की दिशा में दो चमकदार सितारों (कास्टर) कस्तूरि और (पोलक्स) पुलह / पुलस्त्य के पास एक स्थिर रोशनी वाला पिंड देख सकते हैं.
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अपोजिशन (Opposition) जैसी घटनाएं वैश्विक होती हैं. जिसका अर्थ है कि पूरी पृथ्वी पर जहां भी रात होगी, वहां से बृहस्पति (Jupiter) इसी अद्भुत रूप में दिखाई देगा.
भारत के लिए समय और दृश्यता क्या होगी: खगोलविद ने बताया कि भारत के लिए समय और दृश्यता के हिसाब से तारीख 10 जनवरी, 2026 की पूरी रात रहेगी और लेकिन इसको देखने का सबसे अच्छा समय (पीक टाइम) रात के 11:00 बजे से रात के 1:00 बजे के बीच होगा. इस समय बृहस्पति आकाश में बिल्कुल बीचों-बीच (शीर्ष पर) होगा, जिससे वायुमंडल का हस्तक्षेप कम होगा और यह सबसे साफ दिखेगा, एवं शाम को पूर्व (East) दिशा में उगेगा, आधी रात को सिर के ऊपर होगा और सुबह पश्चिम (West) में अस्त होगा।
कैसे पहचानें: खगोलविद ने बताया कि बृहस्पति ग्रह को पहचानना बहुत आसान होगा, क्योंकि उस रात यह चंद्रमा और शुक्र ग्रह के बाद आकाश में सबसे चमकदार खगोलीय पिंड होगा. इस दौरान बृहस्पति 'मिथुन' तारामंडल में स्थित होगा. एक बहुत ही तेज, स्थिर रोशनी वाला "तारा" जैसा दिखाई देगा (लेकिन वह तारा नहीं है बल्कि बृहस्पति ग्रह है. वहीं बृहस्पति ग्रह होगा, लेकिन तारों की तरह, बृहस्पति टिमटिमाएगा।(Twinkle) नहीं, बल्कि इसकी चमक और रोशनी स्थिर और शांत होगी. इसकी चमक का मैग्नीट्यूड -2.7 होगा,जो इसे सामान्य से कहीं अधिक तेजस्वी बनाएगी.
देखने के लिए उपकरण: खगोलविद ने बताया कि वैसे तो इसको देखने के लिए आपको किसी भी खास या विशेष खगोलीय उपकरण की आवश्यकता नहीं है. क्योंकि आप इसे नग्न आंखों से (Naked Eye) भी देख सकते हैं, क्योंकि यह एक बेहद चमकदार सफेद बिंदु जैसा दिखाई देगा. लेकिन यदि आपके पास एक सामान्य दूरबीन (7x50 या 10x50) है, तो आप बृहस्पति के साथ उसके 4 सबसे बड़े चंद्रमाओं (आयो, यूरोपा, गेनीमीड और कैलिस्टो) को छोटे बिंदुओं के रूप में देख सकते हैं. वहीं एक अच्छे टेलीस्कोप की मदद से बृहस्पति की सतह पर मौजूद बादलों की धारियां और उसके प्रसिद्ध 'ग्रेट रेड स्पॉट' (Great Red Spot) को भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा.
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