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जो किताब दुनिया में छप सकती है, वो भारत में क्यों नहीं? सोनिया की आत्मकथा रुकने पर फूटा कांग्रेस का गुस्सा

पार्टी नेताओं ने केंद्र पर आरोप लगाया कि उसने पब्लिशर पर सरकार की आलोचना करने वाले कुछ हिस्से हटाने के लिए दबाव डाला.

Sonia Gandhi Autobiography Controversy
सोनिया गांधी ने गुरुवार, 20 अगस्त, 2026 को नई दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 82वीं जयंती पर वीर भूमि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. (IANS/X/@INCIndia)
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By Amit Agnihotri

Published : August 29, 2026 at 8:14 PM IST

4 Min Read
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नई दिल्लीः कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर देश के सियासी गलियारों में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आरोप लगाया जा रहा है कि केंद्र सरकार के इशारे पर पब्लिशर ने इस किताब के उन खास हिस्सों पर रोक लगा दी है, जिनमें मोदी सरकार की नीतियों और आरएसएस की तीखी आलोचना की गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर पब्लिशिंग हाउस और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है.

कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के सदस्य बी.के. हरिप्रसाद ने ईटीवी भारत से बात करते हुए कहा, "यह निश्चित रूप से पेंग्विन इंडिया का एक अलोकतांत्रिक रुख है. हम समझते हैं कि किताब को रोकने के लिए सरकार की तरफ से दबाव है. ऐसा कोई तरीका नहीं है कि एक प्रकाशक किसी लेखक से उसकी आत्मकथा के हिस्सों को बदलने या हटाने के लिए कहे. केवल उत्तर कोरिया के प्रकाशक ही इस तरह का व्यवहार कर सकते हैं."

उन्होंने कहा, "हमारी नेता सरकार की नीतियों की आलोचना करती रही हैं. सरकार की कमियों को उजागर करना हमारी जिम्मेदारी है. हम मुख्य विपक्षी दल हैं, हमारा काम सरकार की तारीफ करना नहीं है. अगर सरकार कभी कुछ अच्छा करेगी, तो हम तारीफ भी करेंगे." वहीं कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के एक अन्य सदस्य के. राजू ने इस बात पर हैरानी जताई कि जो किताब पूरी दुनिया में पब्लिश हो सकती है, उसे देश के भीतर क्यों नहीं छापा जा सकता.

के. राजू ने ईटीवी भारत से कहा, "जो किताब पूरी दुनिया में छप सकती है, वह अचानक भारत में छपने लायक नहीं रही. ऐसा लगता है कि पेंग्विन इंडिया मोदी सरकार के दबाव के आगे घुटने टेक रहा है. सोनिया गांधी के संस्मरण के हिस्सों को एडिट करना पब्लिशिंग इंडस्ट्री की ईमानदारी और साख पर एक बड़ा और दुखद आघात है. सच को किसी सेंसरशिप की जरूरत नहीं होती."

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के पदाधिकारी बी.एम. संदीप ने ईटीवी भारत से कहा, "वह कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को सत्ता में लेकर आईं और 2004 से 2014 तक इस गठबंधन का नेतृत्व किया. इसके बाद भी वह लगातार पार्टी का मार्गदर्शन करती रहीं. भाजपा ने हमेशा उन्हें विदेशी मूल के मुद्दे पर निशाना बनाया, जिसे देश के मतदाताओं ने पूरी तरह खारिज कर दिया. सार्वजनिक जीवन में उनका आचरण हमेशा से कई लोगों के लिए प्रेरणा रहा है. उन्होंने देश के मूल्यों और संस्कृति को पूरी तरह अपनाया. बीजेपी उनके बारे में चाहे जो भी कहे, लेकिन देश के पूरे राजनीतिक हलके में उनका सम्मान किया जाता है."

बता दें कि यह किताब इटली में उनके बचपन, 1965 में कैंब्रिज में राजीव गांधी से हुई मुलाकात, उनके भारत आने और उनके जीवन को आकार देने वाले व्यक्तिगत व राजनीतिक अनुभवों पर आधारित है. शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' (Belonging: A Journey of Love) नाम की इस आत्मकथा को 10 नवंबर, 2026 को रिलीज किया जाना था. पेंग्विन रैंडम हाउस के ही एक पब्लिशिंग हाउस 'अल्फ्रेड ए. नॉपफ' ने इसकी घोषणा की थी.

अब ऐसी खबरें सामने आईं कि प्रकाशक इस किताब को भारत में इसलिए पब्लिश नहीं कर रहा है क्योंकि सोनिया गांधी ने मोदी सरकार की आलोचना करने वाले कुछ हिस्सों को हटाने या डिलीट करने से साफ मना कर दिया था.

इसके बाद 'पेंग्विन इंडिया' ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि वह इस आत्मकथा को पब्लिश नहीं कर रही है, हालांकि उसने यह भी कहा कि वह इसे छापने के लिए बेहद उत्सुक थी. प्रकाशक ने आगे कहा कि यह उसका विशेषाधिकार और जिम्मेदारी दोनों है कि वह 'तथ्यों की जांच' करे और लेखकों को ऐसे 'सुझाव' दे जो उनकी किताबों के 'सर्वोत्तम हित' में हों.

कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, प्रकाशक कथित तौर पर चाहते थे कि सोनिया गांधी किताब से उन हिस्सों को हटा दें जिनमें मोदी सरकार की नीतियों, विशेष रूप से चीन के साथ संबंधों और भाजपा के वैचारिक मार्गदर्शक आरएसएस की भूमिका की तीखी आलोचना की गई है. जब 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तब सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थीं. तब से, सोनिया गांधी विभिन्न नीतिगत मुद्दों पर मोदी सरकार पर लगातार हमले बोल रही हैं.

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