श्मशान घाट से अस्थियां चोरी होने का मामला, पुलिस जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
श्मशान घाट में अस्थियां चोरी होने का मामला सामने आया था. पुलिस जांच में इस मामले का पूरा खुलासा हो गया है.


By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 29, 2025 at 1:00 PM IST
सोलन: हिमाचल प्रदेश में सोलन जिले के चंबाघाट में बने श्मशान घाट में बीते दिनों अस्थियां चोरी होने का मामला सामने आया था. अस्थियां चोरी होने को लेकर परिवार ने पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई थी. पुलिस ने जब मामले की जांच की तो चौकाने वाला खुलासा हुआ. जांच में पता चला कि एक बड़ी लापरवाही या चूक के कारण एक परिवार को अपनी मां की अस्थियां विसर्जित करने का मौका नहीं मिल पाया.
गंगा में अस्थि विसर्जन अंतिम संस्कार कि क्रिया का अहम हिस्सा है. दरअसल शिकायतकर्ता ने 25 दिसंबर 2025 को पुलिस में शिकायत दी थी कि उनकी मां का अंतिम संस्कार चंबाघाट में हुआ था. इसके 10 दिन बाद अस्थियां लॉकर में रख दी गई थीं, लेकिन जब बाद में अस्थियां लेने गए थे तो लॉकर खाली. इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी छानबीन शुरू की.
अस्थियां निकालते हुई थी गलती
एसपी सोलन गौरव सिंह ने बताया कि 'पुलिस ने श्मशान घाट में लगे सीसीटीवी को चेक करने के बाद जांच को आगे बढ़ाया. श्मशान घाट के रजिस्टर में हुई एंट्री को भी पुलिस ने खंगाला. जांच में तथ्य सामने आया कि प्रणव घोष के चाचा विजय घोष का अंतिम संस्कार भी चंबाघाट के श्मशान में हुआ था. उनकी अस्थियां श्मशानघाट में बने लॉकर में ताला लगाकर रखी गई थीं. एक जैसे लॉकर एक जैसे ताला और चाबी होने के कारण गलती से 19 दिसंबर को प्रणव घोष अपने चाचा की अस्थियों की जगह शिकायतकर्ता की मां अस्थियां निकाल लाए. सुबह अंधेरा होने के कारण प्रणव घोष को अपनी गलती का एहसास नहीं हुआ. पुलिस जांच के बाद प्रणव को ये पता चला कि उनकी चाचा की अस्थियां लॉकर में ही रह गई थीं और वो गलती से किसी और कि अस्थियां लेकर आ गए थे. जांच में ये भी सामने आया कि शिकायतकर्ता की माता की अस्थियां हरिद्वार में गंगा में प्रवाहित कर दी गईं.'
शिकायतकर्ता ने कार्रवाई से किया इनकार
जांच के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने ये साफ किया कि उक्त घटना गलती के कारण हुई थी. ये कोई जानबूझकर किया गया काम नहीं था. इसमें चोरी या अन्य दुर्भावनापूर्ण मंशा नहीं थी. प्रणव घोष और उनके परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए शिकायतकर्ता पक्ष से माफी मांगी है, जिसे शिकायतकर्ता ने स्वीकार कर लिया है. वहीं, शिकायतकर्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि वो इस संबंध में पुलिस से किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं करवाना चाहते हैं.
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