क्या आपने खाए हैं झंगोरे की लड्डू और बर्फी? फायदे जानकर हो जाएंगे हैरान, बनाने में लगे तीन महीने
झंगोरा को माना जाता है सेहत का खजाना, सिद्ध बाबा कृषक उत्पादक संगठन सहकारी समिति ने बनाई झंगोरे की लड्डू-बर्फी, खूब मिल रही डिमांड

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : December 27, 2025 at 6:28 AM IST
|Updated : December 27, 2025 at 10:35 AM IST
रोहित कुमार सोनी
देहरादून: उत्तराखंड की पारंपरिक मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार तमाम तरह के काम कर रही है. जिसके तहत साल 2023 में सरकार ने 'उत्तराखंड मिलेट्स मिशन' की शुरुआत की थी. ताकि, पारंपरिक मिलेट्स यानी मंडुवा, झंगोरा, रामदाना के जरिए पर्वतीय कृषि को मजबूत करने के साथ ही किसानों की आय को बढ़ावा दिया जा सके.
झंगोरे की लड्डू और बर्फी है खास: यही वजह है कि अब पारंपरिक मिलेट्स यानी मोटे अनाज की डिमांड न सिर्फ बढ़ रही है, बल्कि उसके जरिए तमाम उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं. उत्तराखंड के झंगोरे की खीर और बिस्किट्स तो सभी ने खाई होगी, लेकिन उत्तराखंड का एक समूह ऐसा भी है, जिसने झंगोरा से लड्डू और बर्फी तैयार की है. जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं.
केमिकल मुक्त है झंगोरे की लड्डू और बर्फी: खास बात ये है कि झंगोरा से लड्डू और बर्फी पूरी तरह केमिकल मुक्त यानी ऑर्गेनिक है. जिससे न सिर्फ लोगों को एक नया प्रोडक्ट मिल गया है, बल्कि इससे किसानों को भी बड़ा फायदा पहुंच रहा है. सिद्ध बाबा कृषक उत्पादक संगठन सहकारी समिति लिमिटेड की ओर से तैयार किया गए झंगोरा से बनी लड्डू और बर्फी की डिमांड दिल्ली से लेकर देश के कई राज्यों में बढ़ती जा रही है.

उत्तराखंड मिलेट मिशन ने बढ़ाई मंडुवा और झंगोरा की डिमांड: हालांकि, उत्तराखंड सरकार ने जब पारंपरिक मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड मिलेट मिशन की शुरुआत की थी, उसके बाद से ही खासकर मंडुवा और झंगोरा की न सिर्फ डिमांड बढ़ी, बल्कि इसके जरिए बिस्किट भी तैयार किए गए, जो लोगों को काफी पसंद आए.

आसान नहीं है झंगोरा से लड्डू बनाना: इसके बाद तमाम समूहों एवं संगठनों की ओर से मंडुवा का लड्डू भी बनाया गया, लेकिन झंगोरा सिर्फ बिस्किट तक ही सीमित था, क्योंकि झंगोरा से लड्डू बनाना इतना आसान नहीं है. इसकी वजह ये है कि यह चावल की तरह ही होता है. ऐसे में इसको लड्डू फॉर्मेट में लाना एक बड़ी चुनौती है.

झंगोरा का लड्डू हुआ फेमस: बावजूद इसके सिद्ध बाबा कृषक उत्पादक ने इस चुनौती को पार करते हुए न सिर्फ झंगोरा से लड्डू बनाया, बल्कि इससे बर्फी भी तैयार की है. झंगोरा का लड्डू आज सिद्ध बाबा कृषक उत्पादक संगठन का स्टार प्रोडक्ट बन गया है. जिसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है.

ईटीवी भारत से बातचीत में सिद्ध बाबा कृषक उत्पादक संगठन के सदस्य कमल ने कहा कि उनका उद्देश्य है कि किसानों के आए को दोगुना किया जाए. इसके लिए सबसे जरूरी था कि अपने संगठन का कोई स्टार प्रोडक्ट तैयार किया. ऐसे में किसानों का भरोसा जीतने के लिए सबसे पहले किसानों से झंगोरा खरीदा गया. उसके बाद इसे उत्पाद बनाने की रणनीति तैयार की गई. ऐसे में उनके बोर्ड मेंबर ने ये निर्णय लिया कि झंगोरा से लड्डू बनाया जाएगा.

"जब झंगोरा से लड्डू बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई तो काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. झंगोरा से लड्डू बनाने में 3 महीने का समय लग गया. इसकी मुख्य वजह यही है कि इस लड्डू को केमिकल मुक्त यानी पूरी तरह ऑर्गेनिक बनाना था."- कमल, सदस्य, सिद्ध बाबा कृषक उत्पादक संगठन सहकारी समिति लिमिटेड
गाय के घी का किया गया इस्तेमाल: कमल ने बताया कि बोर्ड मेंबर ने पहले ही ये निर्णय लिया था कि अपने उत्पाद में किसी भी तरह का केमिकल इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. ऐसे में झंगोरा से लड्डू तैयार करने के लिए सबसे पहले झंगोरा को देसी गाय के घी में भुना गया. यह देसी गाय का घी भी किसानों से ही लिया गया, फिर झंगोरा को लड्डू फॉर्मेट में लाने के लिए ड्राई फ्रूट्स के साथ गुड़ के खांड का इस्तेमाल किया गया.

मार्च 2025 में तैयार हो पाया झंगोरा का लड्डू: इसके बाद झंगोरा से लड्डू का प्रोडक्ट बनकर तैयार हुआ. साथ ही बताया कि झंगोरा से लड्डू बनाने की कवायद इसी साल जनवरी महीने में शुरू हुई थी और मार्च महीने में झंगोरा का लड्डू बनकर तैयार हुआ. उनका ये प्रोडक्ट लोगों को काफी ज्यादा पसंद भी आया.

कोटद्वार सिद्धबली हनुमान मंदिर से बिक्री की हुई शुरुआत: कमल ने बताया कि यह प्रोडक्ट जनता तक पहुंचे, इसके लिए उन्होंने कोटद्वार स्थित सिद्धबली हनुमान मंदिर के महंत दिलीप रावत से मुलाकात की. इसके बाद मंदिर के पास ही इस प्रोडक्ट की बिक्री के लिए आउटलेट उपलब्ध कराया गया. ऐसे में 12 अप्रैल को हनुमान जयंती के दिन 51 हजार रुपए की बिक्री की.

झंगोरा लड्डू को लेकर उत्सुक नजर आ रहे लोग: उन्होंने बताया कि इस प्रोडक्ट के सक्सेस होने के बाद तमाम जगहों पर लगने वाले ट्रेड फेयर में उनको आने का निमंत्रण मिल चुका है. तमाम ट्रेड फेयर में वो शामिल हुए और इस दौरान लोगों में झंगोरा लड्डू को लेकर काफी ज्यादा उत्सुकता और डिमांड देखी गई.

किसानों से 150 रुपए प्रति किलो खरीदा जा रहा झंगोरा: कमल ने बताया कि पहले किसान झंगोरा को 80 से 90 रुपए किलो बेचते थे, जबकि आज ये संगठन किसानों से 150 रुपए प्रति किलो झंगोरा खरीद रहा है. इससे मोटे अनाज खासकर झंगोरा उगाने वाले किसानों की आय भी बढ़ी है.
क्या होता है झंगोरा? झंगोरा उत्तराखंड का पारंपरिक अनाज है. जिसे बार्नयार्ड मिलेट (Barnyard Millet) कहा जाता है. जो मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया और खाया जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम ईचीनोक्लोआ फ्रुमेंटेसिया (Echinochloa Frumentacea) है. झंगोरा पोषक तत्वों से भरपूर होता है. क्योंकि, झंगोरा में उच्च फाइबर, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम मौजूद होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. |
झंगोरा खाने के कई फायदे: मुख्य रूप से झंगोरा, पाचन दुरुस्त करने, मधुमेह नियंत्रण, हृदय स्वास्थ्य, वजन कंट्रोल के साथ ही हड्डियों को मजबूत करता है. दरअसल, झंगोरा में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो कब्ज, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. झंगोरा में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने के चलते ये ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखता है.
ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को करता है कंट्रोल: झंगोरा में मैग्नीशियम और पोटेशियम मौजूद होता है, जो ब्लड प्रेशर एवं कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है. साथ ही इसके एंटीऑक्सीडेंट होता है. इसके अलावा दिल की बीमारी से बचाता है. झंगोरा में ज्यादा फाइबर होने की वजह से भूख ज्यादा नहीं लगती है, जिससे वजन नहीं बढ़ता है.
हड्डियां होती है मजबूत: इसके अलावा झंगोरा में कैल्शियम-फास्फोरस होने से हड्डियां मजबूत होती है. साथ ही झंगोरा में मौजूद आयरन से एनीमिया दूर होती है. यही वजह है कि झंगोरा को सेहत का खजाना माना जाता है. यह छोटे-छोटे गोल दानों वाला अनाज होता है, जो दिखने में बाजरे जैसा ही नजर आता है.
पहाड़ी इलाकों का लोकप्रिय अनाज है झंगोरा: झंगोरा कम पानी और कम देखभाल में उग जाता है. यही वजह है कि पहाड़ी इलाकों में झंगोरा काफी लोकप्रिय अनाज है. इसे ऑर्गेनिक तरीके से उगाया जाता है. यानी यह पूरी तरह से ऑर्गेनिक होता है. झंगोरे को लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है.
झंगोरा से बनाए जाते हैं कई स्वादिष्ट व्यंजन: पहाड़ों में झंगोरा से कई स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं. जिसमें झंगोरे की खीर, दूध और चीनी या फिर गुड़ से मीठी डिश, चावल की तरह पकाकर सब्जी के साथ, खिचड़ी के रूप में आदि खाया जाता है. इसे व्रत यानी उपवास के दौरान भी खाया जाता है.
ये भी पढ़ें-
- जिस 'मिलेट्स' के पीछे आज भाग रही पूरी दुनिया, कभी उत्तराखंड का मुख्य भोजन था वो 'मोटा अनाज'
- क्या आपने खाया मंडुवे का स्वादिष्ट पिज्जा और मोमो, सेहत का है खजाना
- अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेगा मंडुवा व झंगोरा, बाजार में बढ़ी पहाड़ी उत्पादों की मांग
- उत्तराखंड के मंडुवा, झंगोरा समेत 18 उत्पादों को भी मिला GI टैग, सीएम धामी ने दिया सर्टिफिकेट
- 12 साल बाद कौणी देख भावुक हो गईं ये मां, हरियाली वैली में लहलहाई विलुप्त होती फसल
- गनेरा की खेती से हो जाएंगे मालामाल, 60 दिनों में होगी फसल तैयार, गेहूं से तीन गुना होगा फायदा
- अब चखिए मंडुवे के लड्डु, बिस्किट और नमकीन, बढ़ाएगा लोगों का जायका

