इंजीनियर ने छत पर तैयार किया अमेरिका-यूरोप में मिलने वाली ब्लूबेरी का बगीचा, 3 हजार KG तक है कीमत
शिमला के उपनगर बड़श में रहने वाले मनन शर्मा पेश से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. उनकी छत को ब्लूबेरी ऑर्चर्ड में बदल दिया.


By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : April 12, 2026 at 3:14 PM IST
शिमला: आज के दौर में युवा खेती-किसानी से दूर भाग रहे हैं, वहीं एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी दूरदर्शिता और तकनीक के तालमेल से मिसाल कायम की है. युवा इंजीनियर ने एक असंभव से विचार को बागवानी उद्यम में बदल दिया. पेशे से इंजीनियर मनन शर्मा की सोच घर की छत पर फलफूल रही है. उन्होंने ये साबित किया कि इराद पक्का हो तो पानी की धार को विपरीत दिशा में मोड़ा जा सकता है.
शिमला के उपनगर बड़श में रहने वाले मनन शर्मा पेश से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. उनकी छत को ब्लूबेरी ऑर्चर्ड में बदल दिया. ब्लूबैरी की खेती से हिमाचल अभी इतना परिचित नहीं है. अच्छी संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने इसमें हाथ आजमाया. उन्होंने ये साबित कर दिया कि कंक्रीट की छत पर भी बागवानी क्षेत्र में सफलता की कहानी लिखी जा सकती है. मनन शर्मा पेशे से इंजीनियर है. वर्क फ्रॉम होम के बाद घर पर बचे हुए समय का सदुपयोग करते हुए उन्होंने घर की छत पर ब्लूबेरी की खेती शुरू की.
पिता से मनन ने ली प्रेरणा
मनन शर्मा का परिवार पहले से ही मिट्टी से जुड़ा रहा है. उनके पिता, सेवानिवृत्त तहसीलदार पीयूष शर्मा ने खेतों में स्ट्रॉबेरी की खेती कर बागवानी की नींव रखी थी. पिता के इसी जुनून को मनन ने आधुनिक रूप दिया. जमीन की उपलब्धता कम होने पर उन्होंने हार नहीं मानी और 'रुफटॉप कल्टीवेशन' (छत पर खेती) को अपनाया. मनन बताते हैं, "इंजीनियरिंग की पढ़ाई ने मुझे डेटा और सटीक प्रबंधन सिखाया, जबकि नौणी विश्वविद्यालय और द ग्रोवर्स फ्रूट प्लांट नर्सरी के विशेषज्ञों से मिले तकनीकी ज्ञान ने मुझे यह हौसला दिया कि ब्लूबेरी जैसी विदेशी फसल को हम अपनी छतों पर भी उगा सकते हैं."
गौर हो कि ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका सहित यूरोपीय देशों में ब्लूबेरी का काफी प्रचलन है. ब्लूबेरी की ड्यूक किस्म ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों में बेहतर फसल देने वाली है, जबकि एमराल्ड किस्म गर्म क्षेत्रों के बागवानों को बेहतर फसल देने वाली किस्म है. भारत के बाजार में ब्लूबेरी की कीमत ग्रेड के हिसाब से है. इसे तीन ग्रेड में बांटा गया है. बाजार में इसकी कीमत 1200 से 1500 रुपये प्रति किलोग्राम तक है. हालांकि अभी भारतीय बाजार में ब्लूबेरी बहुत कम उपलब्ध है.
मनन शर्मा ने बताया कि 'हमारी छत पर ब्लूबेरी के मिस्टी और ब्लूरॉबिन नाम की किस्मों के पौधे छत पर लगे हैं. जोगिंद्रनगर में स्थित नर्सरी से 500 पौधे लेकर आए थे. इनकी कीमत 400 से 800 रुपये प्रति पौधा वैरायटी के हिसाब से होती है. अच्छा रिस्पॉन्स मिलने पर 500 पौधे और लगाए आज 1000 ब्लूबेरी पौधों की देखभाल कर रहे हैं.'
स्वाद और स्वास्थ्य लाभों के लिए प्रसिद्ध ब्लूबेरी
ब्लूबेरी एक सुपरफूड है. ये अपने स्वाद और स्वास्थ्य लाभों के लिए प्रसिद्ध है. ब्लूबेरी मूल रूप से उत्तरी अमेरिका से आया है. खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और कनाडा इसके जन्मस्थान माने जाते हैं. वहीं से यह यूरोप और फिर एशिया में फैल गया. ये ठंडी जलवायु वाले क्षेत्रों में ही उग सकता है. सीमित मात्रा में इसकी खेती होती है. हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नागालैंड, सिक्किम, नीलगिरी हिल्स (तमिलनाडु) में प्रयोग के तौर पर इसे उगाया जा रहा है, लेकिन इसे भारत में कम ही उगाया जाता है, अधिकांश ब्लूबेरी आयात की जाती है.

वैज्ञानिक पद्धति का लिया सहारा
मनन शर्मा बताते हैं कि शिमला की परिस्थतियां ब्लूबेरी के लिए अनुकूल हैं. यहां गर्मियों में भी तापमान कम रहता है. इसे 800 से 1000 घंटों के चिलिंग आवर्स की जरूरत होती है, लेकिन छत पर ब्लूबेरी के पौधे लगाना आसान नहीं था. आखिर में मनन ने वैज्ञानिक पद्धति का सहारा लिया उन्होंने वजन कम करने के लिए मिट्टी के बजाय कोकोपीट, वर्मीकम्पोस्ट और विशेष पोषक तत्वों के मिश्रण का उपयोग किया गया. छत पर पानी का जमाव न हो और पौधों को सटीक नमी मिले, इसके लिए आधुनिक ड्रेनेज और सिंचाई प्रणाली ड्रिप इरिगेशन स्थापित की गई. शिमला की 'ड्राई कोल्ड' और 'डैम्प कोल्ड' की परिस्थितियों को समझते हुए पौधों की वैराइटी का चयन किया गया.

हिमालय के क्षेत्र ब्लूबेरी की खेती के लिए उपयुक्त
बागवानी विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में ब्लूबेरी की खेती के लिए ठंडी जलवायु सबसे अच्छी है. हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू और कश्मीर जैसे राज्य ब्लूबेरी की खेती के लिए एकदम सही जगह है. बागवान को ब्लूबेरी की खेती के लिए ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन जैसे आधुनिक तरीकों का उपयोग कर सकते हैं, ताकि पौधे को पानी की कमी न हो सके. इसकी खेती के लिए मिट्टी अम्लीय होनी चाहिए और पीएच मान 4.5 से 5.5 के बीच होना चाहिए. इसके अलावा मिट्टी में पर्याप्त नमी की मात्रा का होना जरूरी है. ब्लूबेरी के पौधे को लगाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर के मध्य में या बसंत के शुरुआत में होता है.
हिमाचल में दिया जा रहा ब्लूबेरी की खेती को बढ़ावा
हिमाचल बागवानी विभाग भी ब्लूबेरी की खेती को बढ़ावा दे रहा है. पिछले साल ही किसानों को इसके पौधे भी बांटे गए थे. तीन वर्ष पूर्व डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा में ब्लूबेरी के 300 पौधे लगाए गए. वैज्ञानिकों ने दो वर्षों तक इन पौधों पर शोध किया और शोध के बाद ये पौधे तीन जगहों पर लगाए गए. जहां पर इन पौधों में फल आए थे. इसके बाद उन्नत किस्म के पौधे प्रदेश में तैयार कर प्रदेश के साथ-साथ देशभर के बागवानों को उपलब्ध करवाने का प्रयास है.

3000 रुपये प्रति किलो तक मिलते हैं दाम
मनन शर्मा ने बताया कि हमने 'नर्सरी से डेढ़ साल के पौधे खरीदे थे. अभी तक उनके पौधों में फल नहीं लगा है, लेकिन अगले साल तक ये फल देने लगेंगे. हिमाचल में पारंपरिक सेब बागवानी के बीच ब्लूबेरी एक 'हाई-वैल्यू' कैश क्रॉप के रूप में उभर रही है. बाजार में प्रीमियम क्वालिटी की ब्लूबेरी 2500 से 3000 रुपये प्रति किलो तक बिकती है.' अगर एक युवा अपने घर की खाली छत का सही इस्तेमाल करें, तो वह किसी भी बड़े शहर की कॉर्पोरेट नौकरी से अधिक आय अपने घर बैठे अर्जित कर सकता है, मनन का यह संदेश प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के लिए एक नई दिशा है.
इस नवाचार के स्वास्थ्य पहलुओं पर KNH के मेडिकल फिजिशियन डॉ. कपिल शर्मा ने कहा कि ब्लूबेरी केवल एक फल नहीं, बल्कि एक 'औषधीय खजाना' है. 'आधुनिक जीवनशैली में होने वाली बीमारियों (Lifestyle Diseases) के लिए ब्लूबेरी एक रामबाण इलाज की तरह काम करती है. ब्लूबेरी के कई फायदे हैं जैसे:
1. एंटीऑक्सीडेंट का पावरहाउस
ब्लूबेरी में 'एंथोसायनिन' (Anthocyanin) नामक तत्व प्रचुर मात्रा में होता है, जो इसे गहरा नीला रंग देता है। यह शरीर में फ्री रेडिकल्स से लड़ता है, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया (Anti-aging) धीमी होती है.
2. मधुमेह (Diabetes) प्रबंधन
डॉ. कपिल के अनुसार, "ब्लूबेरी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसमें मौजूद फाइबर और बायोएक्टिव कंपाउंड रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। यह इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करता है."
3. हृदय स्वास्थ्य और रक्तचाप
नियमित सेवन से 'खराब' एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का ऑक्सीकरण रुकता है, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज की संभावना कम होती है। यह उच्च रक्तचाप (Hypertension) के मरीजों के लिए प्राकृतिक उपचार जैसा है.
4. दिमागी सेहत (Cognitive Function)
डॉक्टर का कहना है कि इसके सेवन से याददाश्त तेज होती है और न्यूरोनल सिग्नलिंग बेहतर होती है, जो बुजुर्गों में अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियों से बचाव में सहायक है।
5. वजन घटाने और पाचन में सहायक
इसमें कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है।
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