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NEET की तरह इंजीनियरिंग की परीक्षा भी एक करने की जरूरत, अलग सिलेबस, पेपर-पैटर्न बढ़ा रहे परेशनी !

इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए अलग-अलग परीक्षा होने से विद्यार्थियों को शैक्षणिक व अभिभावकों को आर्थिक के साथ असुविधाओं का सामना करना पड़ता है.

एग्जाम सेंटर के बाहर छात्र
एग्जाम सेंटर के बाहर छात्र (ETV Bharat Kota)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 6, 2026 at 10:48 AM IST

5 Min Read
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कोटा : देश के इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए कई परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं. इनसे संस्थानों के बी-टेक, इंटीग्रेटेड एम-टेक व डुएल-डिग्री कोर्स में प्रवेश मिल रहा है. एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा के मुताबिक विभिन्न इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के एकीकरण की अब सख्त जरूरत है. कारण यह है कि इन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के सिलेबस, पेपर-पेटर्न, मार्किंग स्कीम व टाइ-ब्रेकिंग के नियम अलग हैं. इनमें शामिल विद्यार्थियों को अलग-अलग परीक्षा के लिए अलग-अलग आवेदन करना पड़ता. इससे स्टूडेंट और पेरेंट्स को खासी परेशानी भी उठानी पड़ती है.

विद्यार्थियों को शैक्षणिक व अभिभावकों को आर्थिक के साथ असुविधाओं का सामना करना पड़ता है. वहीं, बायोलॉजी विषय के कैंडिडेट के लिए सरकारी व निजी मेडिकल संस्थानों के एमबीबीएस व अन्य कोर्सेज में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक ही प्रवेश परीक्षा नीट यूजी का आयोजन किया जाता है. इसकी ऑल इंडिया रैंक के आधार पर ही एम्स, जिपमेर, आईएमएस बीएचयू व अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश मिल जाता है.

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12वीं के छात्रों के लिए समस्या : साथ ही देश के सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सभी राजकीय व निजी मेडिकल संस्थानों की प्रत्येक एमबीबीएस सीट पर प्रवेश मिलता है. प्रवेश परीक्षाओं के एकीकरण का यह एक अच्छा उदाहरण है. इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं का भी इसी तर्ज पर एक किया जाना जरूरी है. 12वीं बोर्ड में अध्यनरत स्टूडेंट्स की तो स्थिति बड़ी विकट हो जाती है, क्योंकि उन्हें इसी दौरान बोर्ड की प्रायोगिक व मेन परीक्षा देनी होती है.

NEET UG से मिलता है इन कोर्सेज में एडमिशन

  1. मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी (MBBS)
  2. बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS)
  3. बैचलर ऑफ साइंस इन नर्सिंग (BSc Nursing)
  4. बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS)
  5. बैचलर ऑफ होम्योपैथीक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS)
  6. बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (BUMS)
  7. बैचलर ऑफ सिद्धा मेडिसिन एंड सर्जरी (BSMS)
  8. इसके साथ ही कई राज्यों के मेडिकल और पैरामेडिकल के यूजी कोर्सेज में एडमिशन नीट यूजी के जरिए दिया जा रहा है. साल 2026 में राजस्थान सरकार भी ऐसा ही करने जा रही है.

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करीब 20 लाख बच्चे देते हैं इंजीनियरिंग एंट्रेंस की परीक्षाएं : देव शर्मा ने बताया कि नीट यूजी परीक्षा में बीते 5 सालों की बात की जाए तो 16 लाख से लेकर 24 लाख तक रजिस्ट्रेशन हुए हैं. यह संख्या लगभग बढ़ती ही रही है. इसके लिए पेन पेपर मोड पर एक दिन में ऑफलाइन एग्जाम आयोजित किए जाते हैं. विद्यार्थियों को कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्र पर यह एग्जाम देना होता है. हालांकि, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम मेन व अन्य सभी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) मोड पर आयोजित होती है, जिनके लिए विद्यार्थियों को अलग-अलग परीक्षा केंद्र पर जाना होता है. दूसरी तरफ इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम मेन में 12 से 15 लाख विद्यार्थी बीते तीन सालों में बैठे हैं. अधिकांश विद्यार्थी अपने-अपने स्टेट की परीक्षाएं भी देते हैं और कुछ विद्यार्थी निजी कॉलेजों की एंट्रेंस एग्जाम भी देते हैं. हालांकि, इन परीक्षाओं को देने वाले विद्यार्थियों में से अधिकांश यानी करीब 70 फीसदी जेईई मेन देते ही हैं.

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फीस, समय और परेशानी से बचाव : बड़ी संख्या में स्टूडेंट और पेरेंट्स का मानना है कि परीक्षा का आयोजन एक ही होना चाहिए. इससे सिलेबस भी एक ही पढ़ने को मिलेगा. रिवीजन भी कर सकेंगे. साथ ही बच्चों की एक ही दिन में परीक्षा पूरी हो जाएगी. इस परीक्षा के परिणाम के आधार पर कई सारे ऑप्शन मिल जाएंगे, जबकि वर्तमान में ऐसा नहीं होता है. परीक्षाएं अलग-अलग समय पर होती हैं, जिनमें लंबा समय खिंच जाता है. बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी स्टूडेंट माधव का कहना है कि परीक्षा एक होने से उन्हें कई फॉर्म नहीं भरने पड़ेंगे. साथ ही फीस भी कम देनी पड़ेगी. इसी तरह से उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर निवासी विकास कोटा से इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. उनके पिता लालमन यादव का कहना है कि परीक्षा एक होने से काफी फायदा रहेगा. मेडिकल की तरह ही यहां भी परीक्षा एक हो जानी चाहिए. अभी बच्चों को कोई अलग-अलग एग्जाम दिलाने की जिम्मेदारी भी पेरेंट्स की होती है.

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कंपटीशन बढ़ने का खतरा भी : उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी स्टूडेंट कबीर का कहना है कि परीक्षा को एक कर देने से कंपटीशन बढ़ जाएगा. स्टूडेंट को सीट मिलने में भी परेशानी होगी, इसीलिए ऐसा नहीं होना चाहिए. उनका मानना है कि एक एग्जाम होने से विद्यार्थियों को नुकसान भी होता है. अगर उस दिन उनकी परीक्षा सही नहीं गई तो काफी समस्या का सामना करना पड़ जाता है. दो साल किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और एक दिन की तबीयत बिगड़ने पर यह नुकसान हो जाता है.