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पोटका में ब्रेन मलेरिया का कहर, 72 घंटे में चार बच्चों की मौत, एक ही परिवार ने खोई दो बेटियां

पोटका में ब्रेन मलेरिया से 4 बच्चों की मौत हो गई. स्वास्थ्य विभाग ने लोगों की स्क्रीनिंग शुरू की है.

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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : June 29, 2026 at 1:54 PM IST

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Updated : June 29, 2026 at 7:00 PM IST

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पूर्वी सिंहभूम: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया ने खतरनाक रूप धारण कर लिया है. लगातार बढ़ रहे संक्रमण और बच्चों की हो रही मौतों ने पूरे क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है. बीते 72 घंटों के भीतर चार बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं. इनमें कई बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है. हालांकि, जिला चिकित्सा पदाधिकारी का कहना है कि सरकारी अस्पताल में दो की ही मौत हुई है.

स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन जिस तेजी से मरीज सामने आ रहे हैं, उसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है.

जानकारी देते उपायुक्त (Etv Bharat)

72 घंटे में चार बच्चों की मौत से दहशत

ब्रेन मलेरिया के कारण जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्रा लखी सरदार, आठ वर्षीय राहुल सरदार, आठ वर्षीय सुबोला सरदार और सुबोली सरदार की छोटी बहन 1 साल की खुशबू सरदार शामिल हैं. इन बच्चों की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक और भय का माहौल है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में लगातार बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं. कई लोग समय पर इलाज नहीं मिलने और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की शिकायत भी कर रहे हैं.

कस्तूरबा विद्यालय की छात्राएं भी संक्रमित

स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई जांच में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की तीन छात्राओं समेत नौ नए मरीजों की पहचान की गई है. विद्यालय में एक साथ कई छात्राओं के बीमार होने से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है. प्रशासन ने विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू कर दिया है. साथ ही छात्राओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है.

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गंभीर मरीजों को एमजीएम अस्पताल रेफर

ब्रेन मलेरिया से संक्रमित कई बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया है. इनमें एक साल की मासूम बच्ची भी शामिल थी, जिसकी बाद में मौत हो गई.

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कई मरीजों को तेज बुखार, उल्टी, बेहोशी और दौरे पड़ने जैसी गंभीर समस्याओं के साथ भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों के इलाज में जुटी हुई है.

घर-घर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में विशेष अभियान शुरू किया है. स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं तथा संभावित मरीजों की पहचान की जा रही है. अब तक 600 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है. टीम ग्रामीणों को मलेरिया से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक भी कर रही है.

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि संक्रमित मरीजों की पहचान कर उनका तत्काल इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.

"ग्रामीण इलाकों में अब तक 900 से ज्यादा मरीजों की जांच की गई है, जिनमें से 43 से ज्यादा की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. उन सभी का इलाज सदर अस्पताल और MGM अस्पताल में चल रहा है. उन्होंने बताया कि मौसम बदलने के कारण लोग मलेरिया की चपेट में आ रहे हैं और इसकी मुख्य वजह मच्छर हैं. इससे बचने के लिए साफ-सफाई रखना जरूरी है. ब्रेन मलेरिया से हुई मौतों की पुष्टि करते हुए, जिला चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि इस बीमारी से अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है." - साहिर पॉल, जिला चिकित्सा अधिकारी

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इलाज में लापरवाही, निजी क्लिनिक सील

प्रशासन ने कस्तूरबा विद्यालय की एक छात्रा के इलाज में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में एक निजी क्लिनिक को सील कर दिया है. जिला प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

एमजीएम अस्पताल पहुंचे जिला उपायुक्त

रविवार को जमशेदपुर के जिला उपायुक्त ने डिमना स्थित एमजीएम अस्पताल का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने अस्पताल की तीसरी से लेकर छठी मंजिल तक विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया. उपायुक्त ने ब्रेन मलेरिया और अन्य मलेरिया मरीजों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली. साथ ही मरीजों के परिजनों से भी बातचीत कर अस्पताल में मिल रही सुविधाओं और उपचार व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की. निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार और अस्पताल अधीक्षक डॉ. बलराम झा भी मौजूद रहे.

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दो बच्चों की हालत अब भी गंभीर

निरीक्षण के बाद उपायुक्त ने बताया कि अस्पताल में भर्ती दो बच्चों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य मरीजों की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को सभी मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और इलाज में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहने देने का निर्देश दिया.

दवाओं और पेयजल व्यवस्था की समीक्षा

अस्पताल निरीक्षण के दौरान दवाओं की उपलब्धता तथा पेयजल व्यवस्था की भी समीक्षा की गई. अस्पताल प्रशासन ने जानकारी दी कि दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की परेशानी नहीं है. साथ ही अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल परिसर में 15 जुलाई तक नियमित जलापूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह बहाल कर दिया जाएगा.

एक पिता से चार दिनों में छिन गईं दो बेटियां

हरिणा पंचायत के कंदर गांव से सामने आई घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले महावीर सरदार की दो मासूम बेटियों की मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है. एक वर्षीय खुशबू सरदार ने चार दिनों तक एमजीएम अस्पताल में जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद सोमवार सुबह दम तोड़ दिया. इससे पहले उसकी बड़ी बहन आठ वर्षीय सुबोला सरदार की भी ब्रेन मलेरिया से मौत हो चुकी थी. सिर्फ चार दिनों के भीतर दो बेटियों को खोने के बाद पिता महावीर सरदार पूरी तरह टूट चुके हैं. परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि अब उनकी तीसरी बेटी भी तेज बुखार से पीड़ित बताई जा रही है.

पोटका में फैले ब्रेन मलेरिया के इस प्रकोप ने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और जागरूकता की आवश्यकता को उजागर कर दिया है. फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नियंत्रण पाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन लोगों की सतर्कता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार साबित हो सकती है.

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Last Updated : June 29, 2026 at 7:00 PM IST