सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान, भारत में 1901 के बाद से अगस्त सबसे गर्म रहा: IMD
मौसम विभाग ने सितंबर में देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान लगाया है. पढ़ें सुरभि गुप्ता की रिपोर्ट ...

Published : September 1, 2026 at 7:55 AM IST
|Updated : September 1, 2026 at 9:24 AM IST
नई दिल्ली: मौसम विभाग (IMD) ने सोमवार को अपनी मासिक भविष्यवाणी में कहा कि सितंबर में भारत में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. बारिश की मात्रा दीर्घकालिक औसत (लॉन्ग-पीरियड एवरेज) के 91 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान है. इससे देश के कई हिस्सों में लगातार बारिश की कमी को लेकर चिंता बढ़ गई है.
मौसम विभाग के मौसम विज्ञान महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि सितंबर के दौरान पूरे देश में मासिक बारिश सामान्य से कम रहने की सबसे अधिक संभावना है. 1971-2020 की अवधि के बारिश के आंकड़ों के आधार पर इस महीने के लिए दीर्घकालिक औसत लगभग 167.9 मिमी है.
महापात्रा ने कहा कि देश के ज़्यादातर हिस्सों में कम बारिश होने की संभावना है, हालांकि पूर्वी, पूर्वोत्तर और मध्य भारत के कुछ इलाकों में तुलनात्मक रूप से बेहतर बारिश हो सकती है. आईएमडी ने यह भी अनुमान लगाया है कि सितंबर में महीने का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से ज़्यादा रहने की संभावना है.

यह अनुमान अगस्त में कम बारिश के बाद आया है. उस महीने भारत में 213.3 एमएम बारिश हुई थी, जो सामान्य से 16.3 प्रतिशत कम थी और 2001 के बाद से अगस्त में हुई सातवीं सबसे कम बारिश थी.
1901 के बाद सबसे गर्म अगस्त
मौसम विभाग के अनुसार भारत में भी 1901 के बाद से सबसे गर्म अगस्त दर्ज किया गया. यहाँ औसत तापमान 28.01 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि सामान्य तापमान 27.34 डिग्री सेल्सियस होता है. अगस्त के महीने में औसत न्यूनतम तापमान भी 1901 के बाद से सबसे ज़्यादा यानी 24.36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सामान्य न्यूनतम तापमान 23.68 डिग्री सेल्सियस होता है.
महापात्रा के अनुसार अगस्त में सामान्य से कम बारिश की एक मुख्य वजह इक्वेटोरियल पैसिफिक (भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र) में मध्यम से लेकर तेज अल-नीनो की स्थिति थी. मध्य और पूर्वी इक्वेटोरियल पैसिफिक में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज़्यादा रहा और आने वाले महीनों में इन स्थितियों के और मजबूत होने की उम्मीद है.
हालांकि अगस्त के दौरान कम दबाव वाले चार सिस्टम बने और कुल मिलाकर 26 दिनों तक सक्रिय रहे, लेकिन इनसे होने वाली बारिश मुख्य रूप से सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों तक ही सीमित रही, जिससे कई अन्य क्षेत्रों में बारिश की कमी रह गई.
बारिश की कमी से फसल को लेकर बढ़ी चिंता
बारिश की कमी से फसलों को लेकर चिंता बढ़ रही है. मॉनसून की बारिश का असमान वितरण खेती के लिए, खासकर मुख्य फसल उगाने वाले इलाकों में एक बढ़ती हुई चिंता का विषय बनता जा रहा है. पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में धान उगाने वाले इलाके, पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में गन्ने के बेल्ट और सोयाबीन पैदा करने वाले इलाकों में नमी की कमी की समस्या देखी जा रही है.
सोमवार को जारी कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि 28 अगस्त तक धान और मक्के की बुआई पिछले साल की तुलना में धीमी रही, जबकि तिलहन और गन्ने की बुआई भी थोड़ी कम रही. सितंबर के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी फसल के विकास और सर्दियों की बुवाई के मौसम की तैयारियों के लिए जरूरी है.
इसलिए, लंबे समय तक बारिश की कमी मौजूदा फसल और अगली फसल की प्रक्रिया, दोनों पर असर डाल सकती है. इससे सप्लाई और खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है.
निष्कर्ष: मानसून की शुरुआत ही कमजोर रही थी. भारत में पिछले 12 सालों में जून का महीना सबसे सूखा रहा. जुलाई में बारिश में सुधार हुआ, लेकिन अगस्त में यह फिर से कमजोर पड़ गई, जिससे सितंबर में भी बारिश की कमी की आशंका बन गई है.

