Special: पुराने गढ़ में अंडरग्राउंड हुआ एक करोड़ का इनामी असीम मंडल, ग्रामीणों की शपथ - नहीं पनपने देंगे नक्सलवाद
एक करोड़ का इनामी माओवादी असीम मंडल अपने इलाके में वापस आ गया है. पुलिस लगातार अभियान चला रही है. रिपोर्ट- प्रशांत कुमार.

Published : September 2, 2026 at 8:14 PM IST
|Updated : September 3, 2026 at 4:12 PM IST
रांची: झारखंड में माओवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान अब उस मोड़ पर पहुंच गया है, जहां पुलिस की नजर आखिरी बड़े नेताओं में शामिल एक करोड़ के इनामी माओवादी असीम मंडल पर टिकी है. लंबे समय तक दलमा क्षेत्र में सक्रिय रहे असीम मंडल के दोबारा इस इलाके में लौटने की सूचना के बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी है.
जंगलों में अभियान चलाने के साथ-साथ अब पुलिस गांवों में भी पहुंच रही है. दलमा क्षेत्र में पुलिसकर्मी घर-घर जाकर ग्रामीणों को असीम मंडल और उसके साथियों की तस्वीरें दिखा रहे हैं और उनकी मौजूदगी तथा आवाजाही के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं. वहीं ग्रामीणों ने भी पुलिस को भरोसा दिलाया है कि वह अब दोबारा इस इलाके को नक्सलियों का घर नहीं बनने देंगे.
ग्रामीणों को दिखाई जा रही असीम और साथियों की तस्वीरें
दलमा के गांवों में पुलिस की यह कवायद काफी अहम मानी जा रही है. पुलिस ग्रामीणों को असीम मंडल की तस्वीर दिखाकर उसकी पहचान कराने की कोशिश कर रही है. तस्वीर में उसके सिर पर घोषित इनाम की राशि की जानकारी भी दी गई है. ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि अगर उनकी सूचना से असीम मंडल या उसके किसी साथी की गिरफ्तारी होती है तो नियमानुसार उन्हें इनाम मिल सकता है.
पुलिस ग्रामीणों को यह भरोसा भी दे रही है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी. पुलिस का उद्देश्य ग्रामीणों के बीच भरोसा कायम कर स्थानीय स्तर से ऐसी जानकारी जुटाना है, जिससे जंगल में छिपे माओवादियों तक पहुंचा जा सके.
ग्रामीणों ने ली शपथ
सबसे अहम बात यह है कि इस बार भले ही इलाके में असीम मंडल और उसके कुछ साथी छिपने में कामयाब हो गए हो, लेकिन वह इलाके में ज्यादा दिन तक ठहर नहीं पाएंगे. ग्रामीणों ने पुलिस के सामने यह शपथ लिया है कि वह अब दोबारा इस इलाके में नक्सलवाद को पनपने नहीं देंगे.

पुराने गढ़ में फिर लौटा असीम
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, असीम मंडल कभी दलमा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख चेहरा रहा है. करीब एक दशक पहले वह दलमा से निकलकर सारंडा क्षेत्र की ओर चला गया था. अब सुरक्षा बलों के लगातार अभियान और माओवादी संगठन पर बढ़ते दबाव के बीच उसके फिर अपने पुराने इलाके में लौटने की जानकारी सामने आई है.
पुलिस का मानना है कि असीम ने दलमा को इसलिए चुना होगा, क्योंकि उसे इस इलाके की भौगोलिक स्थिति, जंगल के रास्तों और पुराने संपर्कों की जानकारी है. झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा से लगे इलाकों की जटिल भौगोलिक परिस्थितियां भी भूमिगत रहने वाले माओवादियों के लिए चुनौती पैदा करने के साथ-साथ सुरक्षा बलों के लिए ऑपरेशन को कठिन बनाती हैं.

झारखंड-बंगाल बॉर्डर पर भूमिगत होने की सूचना
सुरक्षा एजेंसियों के लिए असीम की तलाश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके झारखंड-बंगाल सीमा क्षेत्र में भूमिगत होने की जानकारी है. पुलिस अब उसके संभावित ठिकानों के साथ-साथ उन पुराने संपर्कों को भी खंगाल रही है, जिनके जरिए उसे इलाके में मदद मिल सकती है.
असीम के दलमा लौटने की सूचना के बाद पुलिस ने सिर्फ जंगलों में ऑपरेशन तक अपनी रणनीति सीमित नहीं रखी है. गांवों में संपर्क अभियान, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर, पुराने नेटवर्क की पड़ताल और सर्विलांस को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है.
पांच इनामी माओवादी बताए जा रहे सुरक्षा कवच
पुलिस के मुताबिक, असीम मंडल अकेला नहीं है. उसके साथ उसके कुछ विश्वस्त माओवादी मौजूद हैं, जो उसके लिए सुरक्षा कवच की भूमिका निभा रहे हैं. इनमें माओवादी दंपती राम प्रसाद मार्डी और मीता, मंगल सिंह सरदार, मालती मुर्मू और बुलु महतो के नाम सामने आए हैं.

पुलिस के अनुसार, राम प्रसाद मार्डी और उसकी पत्नी मीता को दलमा क्षेत्र की अच्छी जानकारी है. दोनों असीम को सुरक्षित ठिकाने तलाशने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में मदद कर सकते हैं.
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, राम प्रसाद मार्डी पर 15 लाख रुपये, मीता पर 10 लाख रुपये, मंगल सिंह सरदार पर पांच लाख रुपये, मालती मुर्मू पर दो लाख रुपये और बुलु महतो पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित है. इन सभी की मौजूदगी पुलिस के लिए इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि असीम तक पहुंचने के लिए उसके सहयोगियों और स्थानीय नेटवर्क को समझना जरूरी है.
जंगल के साथ गांवों में भी पुलिस का अभियान
असीम की तलाश में पुलिस अब दो स्तर पर काम कर रही है. एक तरफ जंगलों में सुरक्षा बल संभावित ठिकानों को खंगाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गांवों में पुलिस की पहुंच बढ़ाई जा रही है. घर-घर जाकर तस्वीर दिखाने का मकसद यही है कि अगर असीम या उसका कोई साथी ग्रामीणों के संपर्क में आया हो तो उसकी जानकारी पुलिस तक पहुंच सके.
ग्रामीणों से माओवादियों की गतिविधियों, संदिग्ध लोगों की आवाजाही और जंगल की ओर आने-जाने वाले लोगों के बारे में जानकारी मांगी जा रही है. पुलिस का कहना है कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और पात्र मामलों में इनाम भी दिया जाएगा.
पुराने संपर्कों की तलाश, सर्विलांस पर भी जोर
आईजी अभियान नरेंद्र सिंह के अनुसार, असीम मंडल के झारखंड में दो-तीन माओवादियों से संपर्क होने की जानकारी है. इनमें कुछ लोगों के घर दलमा क्षेत्र के आसपास बताए जाते हैं. पुलिस इन संपर्कों और उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है. आईजी अभियान के मुताबिक, सर्विलांस के साथ-साथ इलाके में अभियान भी चलाया जा रहा है. यानी पुलिस असीम के संभावित ठिकाने तक पहुंचने के लिए स्थानीय नेटवर्क और तकनीकी निगरानी, दोनों स्तर पर काम कर रही है.

झारखंड में करीब नौ माओवादी सक्रिय
आईजी अभियान के अनुसार, झारखंड में अब माओवादी गतिविधियां काफी सीमित रह गई हैं और करीब नौ माओवादी ही सक्रिय बचे हैं. इनमें असीम मंडल को प्रमुख और सबसे महत्वपूर्ण चेहरा माना जा रहा है. यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति में असीम की तलाश को विशेष महत्व दिया जा रहा है.
पुलिस का मानना है कि राज्य में माओवादी संगठन के खिलाफ चल रहे अभियान के अंतिम चरण में बचे प्रमुख नेताओं तक पहुंचना जरूरी है. असीम की गिरफ्तारी को इसी व्यापक अभियान की एक बड़ी कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है.
कौन है असीम मंडल?
पश्चिम मेदिनीपुर निवासी असीम मंडल भाकपा माओवादी की केंद्रीय कमेटी का सदस्य और पश्चिम बंगाल स्टेट कमेटी का सचिव है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ 100 से अधिक मामले दर्ज हैं. इनमें सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़, आईईडी विस्फोट और जवानों पर हमले जैसे गंभीर मामले शामिल हैं.

असीम लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है. झारखंड में उसके खिलाफ अभियान के साथ-साथ दूसरे राज्यों की सुरक्षा एजेंसियां भी उसकी गतिविधियों पर नजर रखत रही हैं.
झारखंड में एक करोड़, ओडिशा में 1.20 करोड़ का इनाम
असीम मंडल की तलाश का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस पर कई राज्यों ने इनाम घोषित कर रखा है. झारखंड सरकार ने असीम मंडल पर एक करोड़ रुपये, जबकि ओडिशा सरकार ने एक करोड़ 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है. दलमा में लगाए जा रहे पोस्टरों और ग्रामीणों को दिखाई जा रही तस्वीरों में इनाम की राशि का उल्लेख भी किया जा रहा है.
पुलिस ग्रामीणों को समझा रही है कि किसी विश्वसनीय सूचना के जरिए अगर इनामी माओवादी पकड़े जाते हैं तो नियमानुसार इनाम मिल सकता है और सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी.

असीम की गिरफ्तारी से नक्सल अभियान को मिलेगा विराम
झारखंड पुलिस के लिए असीम मंडल की गिरफ्तारी सिर्फ एक इनामी माओवादी की गिरफ्तारी नहीं है. इसे राज्य में माओवादी संगठन के खिलाफ चल रहे लंबे अभियान के अंतिम चरण से जोड़कर देखा जा रहा है.
पुलिस के अनुसार, राज्य में सक्रिय माओवादियों की संख्या अब काफी कम रह गई है और ऐसे में बचे एक मात्र प्रमुख नेता तक पहुंचना अभियान की बड़ी प्राथमिकता है. यही वजह है कि असीम की तलाश में पुलिस जंगलों से लेकर गांवों तक अपनी रणनीति बदल-बदलकर काम कर रही है. पुराने गढ़ दलमा में पोस्टर अभियान और घर-घर जाकर तस्वीर दिखाने की कार्रवाई इसी रणनीति का हिस्सा है.
पुलिस की कोशिश है कि स्थानीय स्तर से मिलने वाली छोटी से छोटी सूचना को जोड़कर असीम और उसके सहयोगियों के ठिकाने तक पहुंचा जाए. दलमा में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब एक दशक बाद अपने पुराने इलाके में लौटा एक करोड़ का यह इनामी माओवादी आखिर किस जंगल या किस सुरक्षित ठिकाने में भूमिगत है? पुलिस उसकी तलाश में जंगल की खाक छानने के साथ अब ग्रामीणों की आंखों और स्थानीय सूचनाओं को भी अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है.
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