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सुप्रीम कोर्ट पूजा स्थल अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई तय करेगा

पूजा स्थल अधिनियम मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि 9 जजों की पीठ के मामले के बाद हम सुनवाई की तारीखें फाइनल करेंगे.

SC to fix final hearing on pleas challenging validity of certain provisions of Places Of Worship Act
सुप्रीम कोर्ट पूजा स्थल अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई तय करेगा (IANS)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 18, 2026 at 8:09 PM IST

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट बुधवार को 1991 के एक कानून के कुछ नियमों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमत हो गया. ये नियम किसी पूजा की जगह पर फिर से दावा करने या 15 अगस्त, 1947 को जो था, उससे उसकी स्थिति (character) में बदलाव की मांग करने के लिए केस फाइल करने पर रोक लगाते हैं.

12 अक्टूबर, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि वह पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के कुछ प्रावधानों की वैध को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में 31 अक्टूबर तक अपना हलफनामा दे.

बुधवार को यह मामला भारता के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया. पीआईएल दायर करने वाले अश्विनी उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने पीठ से अनुरोध किया कि अंतिम सुनवाई दी जाए, क्योंकि सवाल 12 अक्टूबर, 2022 को ही तैयार कर लिए गए थे. द्विवेदी ने कहा कि केंद्र को 31 अक्टूबर, 2022 तक याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया था, लेकिन उसने अभी तक अपना जवाब नहीं दिया है.

पीठ ने कहा कि वह आखिरी सुनवाई की तारीख तय करेगी और कहा कि नौ जजों की पीठ के दो मामले पहले ही मार्च और अप्रैल के लिए तय हो चुके हैं. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "देखते हैं. 9 जजों की पीठ के मामले के बाद हम सुनवाई की तारीखें फाइनल करेंगे."

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर विचार करने से मना कर दिया कि राजस्थान की एक सिविल कोर्ट को अजमेर दरगाह मामले में प्रभावी आदेश देने से रोका जाए. सीजेआई ने कहा, "अगर वे ऐसे ऑर्डर पास करते हैं, तो हम देखेंगे कि क्या करना है. हमने एक ऑर्डर पास किया है और वह सभी पर लागू होता है. अगर कोई इसका उल्लंघन करते हुए आदेश पास करता है, तो हमें उसकी जांच करनी होगी और देखना होगा... नतीजे सामने आएंगे."

हालांकि, पीठ ने कहा कि अगर नोटिस जारी किए जाते हैं और जवाब मांगा जाता है, तो प्रक्रियात्मक आदेश में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर, 2024 को देश की अदालतों को अगले निर्देश तक नए केस सुनने और धार्मिक जगहों, खासकर मस्जिदों और दरगाहों को वापस लेने के लिए लंबित केस में कोई भी प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश देने से रोक दिया था.

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