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क्या ED को हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का हक है? सुप्रीम कोर्ट करेगा इस कानूनी सवाल की जांच

केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गयी, जिसने अनुच्छेद 226 के तहत रिट दायर करने के ED के अधिकार को बरकरार रखा था.

Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट. (ANI)
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By Sumit Saxena

Published : January 20, 2026 at 3:43 PM IST

3 Min Read
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट मंगलवार, 20 जनवरी को इस कानूनी सवाल पर विचार करने के लिए तैयार हो गया कि क्या प्रवर्तन निदेशालय (ED) एक 'कानूनी इकाई' (juristic person) के तौर पर सीधे हाईकोर्ट में याचिका (रिट पिटीशन) दायर कर सकता है. संविधान का अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट को नागरिकों और संस्थाओं की शिकायतों पर आदेश या निर्देश जारी करने का अधिकार देता है.

यह मामला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया. पीठ ने केरल और तमिलनाडु सरकारों द्वारा दायर अपीलों पर एजेंसी (ED) को नोटिस जारी किया. राज्य सरकारों ने केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर करने के ED के अधिकार को बरकरार रखा था.

सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा मामला

पिछले साल सितंबर में, केरल उच्च न्यायालय ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें 2020 के राजनयिक माध्यम से हुई सोना तस्करी मामले की ईडी (ED) जांच के खिलाफ न्यायिक जांच पर रोक लगा दी गई थी. सोना तस्करी मामले में ED अधिकारियों द्वारा आरोपियों पर मुख्यमंत्री सहित अन्य राजनीतिक नेताओं को फंसाने के लिए दबाव डालने के आरोपों के बाद न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था.

उच्च न्यायालय ने केरल सरकार द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें एकल पीठ के अंतरिम रोक के आदेश को चुनौती दी गई थी. एकल पीठ ने माना था कि इस मामले में ईडी का पक्ष रखने का अधिकार बनता है और 11 अगस्त 2021 को जांच संबंधी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने अपील दायर की थी.

सोना तस्करी का क्या है मामला

यह मामला 7 मई, 2021 को राज्य सरकार की उस अधिसूचना से शुरू हुआ, जिसमें 'जांच आयोग अधिनियम, 1952' के तहत न्यायिक जांच का आदेश दिया गया था. यह जांच उन ईडी अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई थी, जिन पर आरोपियों को राजनीतिक नेताओं को फंसाने के लिए मजबूर करने का आरोप था.

हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस वी.के. मोहनन को इस जांच आयोग का प्रमुख नियुक्त किया गया था. आयोग को सबूतों की जांच करने का काम सौंपा गया था, जिसमें आरोपी स्वप्ना सुरेश का बताया गया एक ऑडियो क्लिप और आरोपी संदीप नायर का एक पत्र शामिल था, जिनमें ईडी अधिकारियों द्वारा दबाव डालने का आरोप लगाया गया था. इसके बाद, ईडी के डिप्टी डायरेक्टर ने एजेंसी के खिलाफ जांच का आदेश देने के राज्य के अधिकार पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.

न्यायिक व्यक्ति (Juristic Person) क्या है? यह एक ऐसी कानूनी इकाई (जैसे कंपनी या संस्था) होती है जिसे कानून द्वारा इंसानों की तरह ही अधिकार और कर्तव्य प्राप्त होते हैं, जिसमें मुकदमा करने या मुकदमा झेलने की क्षमता शामिल है.

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