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राजस्थान HC के कार्यवाहक CJ शर्मा को बदलने की अपील, जस्टिस मेहता ने CJI को लिखा पत्र

जस्टिस संदीप मेहता ने बताया कि राजस्थान के उनके दौरे के दौरान, उच्च न्यायालय के कई जजों ने जस्टिस शर्मा के आचरण की शिकायत की.

SC judge Justice Sandeep Mehta Urges CJI to replace Rajasthan High Court acting CJ SP Sharma
CJI सूर्यकांत और जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा (File/ ANI)
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By Sumit Saxena

Published : August 26, 2026 at 1:24 PM IST

3 Min Read
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता ने कई पत्रों के जरिये भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से तुरंत राजस्थान से बाहर का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा अपने प्रशासनिक अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं.

जस्टिस मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को तीन पत्र लिखे. पता चला है कि जस्टिस मेहता ने जस्टिस शर्मा पर कुप्रशासन का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि जस्टिस शर्मा मामलों को चुनिंदा तरीके से अपनी पीठ में भेजने के लिए 'रोस्टर के मास्टर' (मामलों का आवंटन करने वाले प्राधिकारी) के रूप में अपनी शक्तियों का उपयोग कर रहे हैं.

जस्टिस मेहता ने 2 अगस्त के अपने पत्र में कहा कि उन्होंने पहले भी CJI को ऐसे ही मामलों के बारे में बताया था, जिसमें में उन मामलों का जिक्र किया गया था जिन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के अन्य पीठों से अचानक वापस लेकर जस्टिस शर्मा की अदालत में भेज दिया गया था.

जस्टिस मेहता ने बताया कि राजस्थान के उनके दौरे के दौरान, उच्च न्यायालय के कई जजों ने जस्टिस शर्मा के व्यवहार पर अपनी पीड़ा साझा की थी.

जस्टिस मेहता ने याद दिलाया कि CJI ने शुरुआत में उन्हें ऐसे मामलों की सूची सौंपने के लिए कहा था, लेकिन बाद में आरोपों को लिखित रूप में न देने की सलाह दी और इसके बजाय आश्वासन दिया कि उचित कार्रवाई की जाएगी. फिर भी, उन्होंने कहा कि राजस्थान के बाहर से किसी मुख्य न्यायाधीश को नियुक्त करने के उनके अनुरोध पर अब तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

दूसरे पत्र में, जस्टिस मेहता ने 26 सितंबर को अपने रिटायरमेंट से ठीक पहले जस्टिस शर्मा द्वारा लंबे छक्के लगाने के प्रयास के जीते-जागते प्रमाण के रूप में दो विशिष्ट उदाहरणों का हवाला दिया.

10 अगस्त के पत्र में, उन्होंने जस्टिस शर्मा द्वारा कुछ वकीलों के साथ कथित पक्षपात और रोस्टर शक्तियों के दुरुपयोग के और अधिक विशिष्ट उदाहरणों का जिक्र किया.

17 अगस्त के अपने पत्र में, जस्टिस मेहता ने कहा कि उन्होंने अपने पहले के पत्रों में जस्टिस शर्मा के भारी कुप्रशासन और गंभीर रूप से संदेहास्पद गतिविधियों को पहले ही उजागर कर दिया था. जस्टिस मेहता ने पूछा कि उन्हें काम जारी रखने की अनुमति क्यों दी जा रही है.

17 अगस्त के पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि राजस्थान उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश ने साथी न्यायाधीशों से जस्टिस शर्मा के उस आचरण की शिकायत की जो उनकी पत्नी (जो एक वरिष्ठ जिला न्यायपालिका अधिकारी) के प्रति प्रतिशोध की भावना से प्रेरित था. इस पत्र में राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रशासन और अधीनस्थ न्यायपालिका के सदस्यों के साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर भी अन्य आरोप जोड़े गए थे.

नवंबर 2016 में जस्टिस शर्मा को राजस्थान उच्च न्यायालय में नियुक्त किया गया था. उन्हें जनवरी 2022 में पटना उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया. स्वास्थ्य के आधार पर राजस्थान वापस लौटने के उनके अनुरोध को मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने नामंजूर कर दिया था, और उन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय भेज दिया गया था. कॉलेजियम ने बाद में अपने फैसले में बदलाव किया और मई 2025 में उनके राजस्थान लौटने की सिफारिश की.

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