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सावरकर कभी मुस्लिम विरोधी नहीं थे, राहुल गांधी ने गलत छवि बनाई, परिवार का कोर्ट में दावा

वी.डी. सावरकर के प्रपौत्र सत्यकी सावरकर ने कहा कि राहुल गांधी ने ऐसे बयान दिए जिनसे उन्हें 'मुसलमानों का कट्टर विरोधी' दिखाया गया.

COURT DEFAMATION SAVARKAR
कांग्रेस नेता राहुल गांधी (फाइल फोटो) (ANI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : September 2, 2026 at 8:31 AM IST

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पुणे: वी.डी. सावरकर के प्रपौत्र सत्यकी सावरकर ने मंगलवार को यहां एक विशेष अदालत को बताया कि हिंदुत्व विचारक 'कभी भी मुसलमानों से नफरत नहीं करते थे' और उनकी रचनाओं में मुसलमानों की तरक्की के रास्ते बताए गए थे, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ऐसे बयान दिए जिनसे उन्हें 'मुसलमानों का कट्टर विरोधी' दिखाया गया.

सत्यकी सावरकर ने यह बयान तब दिया जब वकील मिलिंद पवार उनसे मानहानि के मामले में जिरह कर रहे थे. यह मामला 2023 में लंदन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कथित बयानों से जुड़ा है. जिरह के दौरान वकील पवार ने सत्यकी सावरकर से राहुल गांधी के उस कथित भाषण के वे सटीक शब्द बताने को कहा, जिनसे 'स्वातंत्र्यवीर सावरकर की प्रतिष्ठा कम होती है'.

सत्यकी सावरकर ने राहुल गांधी का वह बयान दोहराया जिसमें कहा गया था कि 'सावरकर ने एक किताब में लिखा था कि उन्होंने और उनके पांच-छह दोस्तों ने एक मुस्लिम युवक के साथ मारपीट की थी और ऐसा करने में उन्हें मजा आया था'.

उन्होंने कहा, 'इन बातों से सावरकर को मुसलमानों से बहुत नफरत करने वाले और भीड़ द्वारा हत्या (मॉब लिंचिंग) करने वाले व्यक्ति के तौर पर दिखाया गया. सावरकर कभी मुसलमानों से नफरत नहीं करते थे. बल्कि, उन्होंने अपनी लेखनी में उनकी तरक्की के रास्ते और उपाय बताए थे.'

वकील पवार ने सत्यकी के दादा गोपाल गोडसे का 2004 का वीडियो इंटरव्यू और उसके ट्रांसक्रिप्ट भी पेश किए, जिनमें गोडसे कथित तौर पर यह स्वीकार कर रहे हैं कि उनके भाई नाथूराम गोडसे आरएसएस के सदस्य थे.

महात्मा गांधी की हत्या की साजिश में नाथूराम के छोटे भाई गोपाल गोडसे भी शामिल थे. राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला सत्यकी ने दायर किया था. उनका आरोप था कि कांग्रेस नेता ने झूठा दावा किया था कि वी.डी. सावरकर ने अपनी एक किताब में लिखा है कि कैसे उन्होंने और उनके दोस्तों ने एक मुस्लिम युवक पर हमला किया था और उस काम से उन्हें मजा आया था. शिकायतकर्ता का कहना है कि सावरकर की लिखी किसी भी चीज में ऐसी कोई घटना नहीं मिलती है.

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