सद्गुरु सेवा ट्रस्ट के संस्थापक पद्मश्री डॉ.बी.के जैन के निधन से देशभर में शोक की लहर
चित्रकूट स्थित देश के सबसे बड़े नेत्र चिकित्सालय सद्गुरु सेवा ट्रस्ट की नींव रखने वाले डॉ.बी.के. जैन नहीं रहे. अंतिम संस्कार कल.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 28, 2026 at 7:54 PM IST
रिपोर्ट : प्रदीप कश्यप
सतना : जाने माने चिकित्सक पद्मश्री डॉ. बी.के.जैन के निधन से देशभर में शोक की लहर फैली. मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव समेत कई राजनीतिक हस्तियों ने शोक जताया है. रविवार को अंतिम संस्कार होगा. उनका पार्थिव शरीर के दर्शन के लिए रखा गया है, बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं. डॉ. बीके जैन को सेवा कार्यों के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.
रविवार सुबह 10 बजे अंतिम संस्कार
चित्रकूट स्थित देश के सबसे बड़े नेत्र चिकित्सालय सद्गुरु सेवा ट्रस्ट के संस्थापक पद्मश्री डॉ. बुधेंद्र कुमार जैन ने 77 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के चलते शुक्रवार की शाम अंतिम सांस ली. जैसे ही लोगों को खबर मिली तो शोक की लहर दौड़ गई. डॉ. बीके जैन ने नेत्र की दुनिया में अपनी अलग अमिट छाप बनाई है. इस नेत्र चिकित्सालय से लाखों लोगों को आंखों की रोशनी मिल चुकी है. रविवार सुबह 10 बजे नेत्र चिकित्सालय परिसर में डॉ. बीके जैन का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन होगा.
पद्मश्री से सम्मानित, नेत्र चिकित्सक, समाजसेवी, सद्गुरु सेवा संघ, चित्रकूट के निदेशक, डॉ. बीके जैन जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
— Office of Dr. Mohan Yadav (@drmohanoffice51) February 27, 2026
उन्होंने लोक कल्याण और पीड़ित जनों के लिए समर्पण की अनुकरणीय मिसाल पेश की। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत… pic.twitter.com/NTjsuM0Tv5
बीते 3 माह से बीमार थे डॉ. बीके जैन
डॉ. बीके जैन पिछले 3 माह से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. उनका इलाज मुंबई के सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में चल रहा था. डॉ.जैन ऐसी शख्सियत थे, जिन्होंने नेत्र चिकित्सक के रूप अपनी सेवा और समर्पण के जरिए देश ही नहीं, अपितु विदेशों में भी अपनी और सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय के नाम की एक अलग पहचान बनाई.
52 साल तक जरूरतमंदों को आंखों की रोशनी दी
सन् 1974 में 12 बेड के क्लीनिक से डॉ. बीके जैन ने सदगुरु नेत्र चिकित्सालय की शुरुआत की थी. उन्होंने करीब 52 वर्षों तक गरीबों और जरूरतमंद लोगों की आंखों की रोशनी लौटाने का काम किया. सन् 1948 में जन्मे डॉ. जैन की प्रारंभिक शिक्षा शासकीय विद्यालय व्यंकट सतना में हुई. इसके बाद 1968 से 1973 तक एसएस मेडिकल कॉलेज रीवा से हुई. इसके बाद 1977 से 1979 तक पीजी की शिक्षा उन्होंने मुंबई से प्राप्त की.
लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी मिला
डॉ. जैन AIIMS रायपुर के अध्यक्ष भी थे. विगत 5 दशकों में वह पद्मश्री से लेकर कई राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय एवं राजकीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं. वर्ष 1996 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सामुदायिक नेत्र चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए ‘ढान्ढा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया. इसके बाद वर्ष 2003 में उन्हें ‘फिरदौसी अवार्ड’ मिला. वर्ष 2004 में मुंबई में आयोजित आई एडवांस सम्मेलन में उन्हें सामुदायिक नेत्र चिकित्सा में उत्कृष्ट कार्य हेतु ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ प्रदान किया गया.
सेवा कार्यों के लिए कई पुरस्कार मिले
वर्ष 2007 में उन्हें आर.के.सेठ मेमोरियल अवार्ड, वर्ष 2008 में ग्लोरी ऑफ इंडिया अवार्ड प्राप्त हुआ. वर्ष 2010 में अखिल भारतीय नेत्र विज्ञान सम्मेलन (AIOS) में उन्हें ‘सामुदायिक सामाजिक पुरस्कार’ और ग्रामीण समुदाय में उत्कृष्ट नेत्र सेवा के लिए ‘के.आर. दत्ता पुरस्कार’ से नवाजा गया. वर्ष 2020 में ‘श्री धर्मसी नेनसी ओमान अवार्ड’, डॉ. एम.सी. नाहटा - राष्ट्रीय नेत्र सुरक्षा पुरस्कार’ एशिया पैसिफिक एकेडमी ऑफ ऑप्थाल्मोलॉजी (APAO) द्वारा अंधत्व निवारण में उत्कृष्ट कार्य हेतु पुरस्कार मिला.
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पिछले साल पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित
डॉ. बीके जैन को चिकित्सा के क्षेत्र में पद्मश्री 27 मई 2025 महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया. डॉ. जैन दो पुत्रों के पिता थे. बड़े पुत्र जिनेश जैन हैं और छोटे डॉ. इलेश जैन हैं. डॉ. इलेश जैन सद्गुरु सेवा संघ के ट्रस्टी एवं वर्तमान में सदगुरु नेत्र चिकित्सालय जानकीकुंड चित्रकूट के सीईओ हैं.

