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12 साल बाद वर्दी में घर लौट मां को किया सैल्यूट, रुला देगी होमगार्ड जवान किन्नर सानिया की कहानी

छपरा की होमगार्ड जवान सानिया किन्नर आज उन ट्रांसजेंडर के लिए मिसाल हैं जो अपने सपनों को सच में बदलकर सम्मान से जीना चाहती हैं-

SANIA KINNAR
होमगार्ड जवान सानिया किन्नर के संघर्षों की कहानी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 17, 2026 at 1:06 PM IST

6 Min Read
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सारण : समाज का एक ऐसा बहिष्कृत वर्ग जिसे कभी ट्रांसजेंडर, किन्नर, हिजड़ा या छक्का कहकर पुकारा जाता रहा. तिरस्कार और उपेक्षा जिनकी किस्मत मान ली गई, लेकिन दिल तो उनका भी धड़कता है. सपने उनके भी होते हैं. सम्मान और पहचान की चाह उनके मन में भी उतनी ही गहरी होती है. लेकिन अवसर न मिल पाने की वजह से ये वर्ग मुख्य धारा से टूट गया. लेकिन बिहार की धरती से एक ऐसी ही कहानी सामने आई है जिसने उम्मीद की नई लौ जलाई है.

बहिष्कार से सम्मान तक का सफर : भारतीय समाज में किन्नर समुदाय को लंबे समय तक मुख्यधारा से दूर रखा गया. शादी-ब्याह या बच्चे के जन्म पर मंगलगीत गाकर आशीर्वाद देना ही उनका प्रमुख पेशा बना दिया गया. रोज़ी-रोटी के लिए नाच-गाना ही एकमात्र सहारा रहा. समाज ने उन्हें देखा जरूर, लेकिन अपनाया नहीं.

"मैं पेट पालने के लिए आर्केस्ट्रा में नाच-गाकर काम करती थी. मेरा सपना था कि कुछ बनूं लेकिन ऐसा हो न पाया. लेकिन आज इसी सोच के कारण मुकाम पर पहुंची हूं. मेरी आपसे अपील है कि जहां भी मेरे जैसे लोग मुझे सुन रहे हैं वो भी कुछ ऐसा करें कि समाज उनपर फक्र करे. संघर्ष करें लेकिन घर से न भागें. अब बदलने का वक्त आ गया है."- सानिया किन्नर, होमगार्ड जवान

देखें यह स्पेशल रिपोर्ट (ETV Bharat)

नौकरी मिलने की खुशी : लेकिन अब समाज में किन्नरों की तस्वीर बदल रही है. बिहार सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय को नौकरी में अवसर देने के फैसले ने इस वर्ग के जीवन में नई रोशनी भर दी है. पुलिस और होमगार्ड में नियुक्ति मिलने से न सिर्फ रोजगार मिला है, बल्कि सम्मान भी मिला है. इस पहल के लिए समुदाय के लोग दिल से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद दे रहे हैं.

''जब सब हमें किन्नर, ट्रांसजेंडर, हिजड़ा कहता है तो ये सब सुनकर हमलोगों को अजीब लगता है. आप लोग हम जैसे लोगों को सपोर्ट कीजिए, विश्वास कीजिए और शक्ति दीजिए, हम ऐसा काम करना चाहते हैं जिससे समाज भी कहेगा, हमें भर्ती करने वाले सीएम नीतीश भी कहेंगे कि हां हमने इन लोगों को भर्ती कराकर सही किया.'' - सानिया किन्नर, होमगार्ड जवान

मां को वर्दी में किया सैल्यूट : सानिया घर से 12 साल पहले निकल गई थी. किन्नर गुरू के संपर्क में जीवन यापन कर रही थी. साथ ही अपने सपनों को लेकर भी वह काफी संजीदा थी. जब भर्ती हो गई तो वह अपने गांव लौटी और मां को वर्दी में सलामी दी. ये देखकर मां की आंखें भर आई. आज उनके जिगर का टुकड़ा न सिर्फ लौट आया था बल्कि मुख्य धारा में जुड़कर लोगों को संदेश भी दे रहा था.

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सानिया किन्नर, होमगार्ड जवान (ETV Bharat)

''सानिया पुलिस में हो गईं तो मुझे खुशी मिल रही है. मेरा पढ़ाया लिखाया आज सार्थक हो गया. मेरा बच्चा मेरे पास लौट आया. आज मैं बहुत खुश हूं.''- होमगार्ड जवान सानिया किन्नर की मां

सानिया की संघर्ष भरी कहानी : सारण जिले के रिवीलगंज प्रखंड के रामपुर सिरसिया गांव की रहने वाली सानिया किन्नर इस बदलाव की सजीव मिसाल हैं. बचपन से उनका सपना था कि वह पुलिस की वर्दी पहनें. लेकिन परिस्थितियां ऐसी रहीं कि पढ़ाई के दौरान ही उन्हें संघर्षों का सामना करना पड़ा. घर-परिवार से दूर होना पड़ा. गोपालगंज में अपने किन्नर गुरु के साथ रहकर नाच-गाकर जीवन चलाने लगीं.

बचपन का सपना हुआ साकार : सानिया किन्नर का बचपन से ही सपना रहा है कि यह पुलिस में नौकरी करें लेकिन परिस्थिति के अनुसार यह संभव नहीं हो सका. पर दिल में एक सपना लगातार धड़कता रहा. जब होमगार्ड की बहाली निकली तो वह सपना फिर जाग उठा. गुरु के आशीर्वाद से आवेदन किया, परीक्षा दी और साक्षात्कार हुआ. आखिरकार सानिया का चयन हो गया. यह पल सिर्फ सानिया के लिए नहीं, पूरे किन्नर समाज के लिए गर्व का था.

SANIA KINNAR
सानिया किन्नर की कहानी (ETV Bharat)

वर्दी में सम्मान की पहचान : ट्रेनिंग पूरी होने के बाद सानिया की पोस्टिंग सारण जिले के दाउदपुर थाना में हुई. आज वह पूरी मुस्तैदी के साथ ड्यूटी कर रही हैं. उनके सहकर्मी और थाना प्रभारी कुंदन कुमार समेत सभी लोग उनके व्यवहार और कार्यकुशलता की सराहना करते हैं. ड्यूटी के दौरान कोई यह महसूस नहीं करता कि उनके साथ किन्नर समुदाय की सदस्य काम कर रही हैं. वह सिर्फ एक जिम्मेदार जवान के रूप में पहचानी जाती हैं.

''जिस तरह से आज मैं बिहार में पुलिस होमगार्ड में आई हूं उसी तरह अन्य किन्नर सामुदाय से लोगों को भी मौका दिया जाए तो प्रत्येक 38 जिले से एक भी किन्नर समुदाय का कोई पुलिस में आता है, तो मुझे लेकर 39 व्यक्ति हो जाएंगे. मैं अपनी ड्यूटी पूरे मुस्तैदी के साथ करती हूं. हमारे सहकर्मी को इस बात का कोई ध्यान नहीं रहता है कि उनके साथ एक किन्नर समुदाय का कोई सदस्य ड्यूटी कर रहा है.''- सानिया किन्नर, होमगार्ड जवान

गांव की शान बनी सानिया : सानिया की सफलता से उनका गांव और परिवार गौरवान्वित है. मां, भाई-बहन और गुरु सभी की आंखों में खुशी के आंसू हैं. जिस समाज ने कभी उन्हें अलग नजर से देखा, आज वही लोग सम्मान से सिर झुकाते हैं. सानिया कहती हैं कि पुलिस फोर्स में नौकरी करना उनके लिए सुखद अनुभूति है. पहले जिन्हें नकारा समझा जाता था, आज वही लोग सम्मान दे रहे हैं.

आने वाले कल की उम्मीद : सानिया की भावनाएं छलक उठती हैं, जब वह कहती हैं कि अगर हर जिले से एक-एक किन्नर को भी पुलिस में मौका मिले तो पूरे बिहार में बदलाव की मिसाल कायम हो सकती है. उनका सपना है कि किन्नर समुदाय का हर सदस्य आत्मनिर्भर बने और समाज में बराबरी का स्थान पाए. यह कहानी सिर्फ एक नौकरी की नहीं है. यह कहानी है संघर्ष से सम्मान तक की, यह कहानी है उस बदलाव की, जहां वर्दी ने पहचान बदल दी और आत्मसम्मान को नया जीवन दे दिया.

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