आर्थिक तंगी अब नहीं बनेगी मातृत्व में बाधा, पुणे में 'सखी सुखदा' संस्था मुफ्त करा रही डिलीवरी
'सखी सुखदा वुमन वेलफेयर फाउंडेशन' झुग्गी-बस्तियों में रहने वाली महिलाओं को पूरी चिकित्सा सहायता मुफ्त प्रदान करती है.


Published : March 2, 2026 at 4:54 PM IST
पुणे: समाज में महिलाओं के मुद्दों पर कई लोग काम कर रहे हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याएं आज भी गंभीर स्थिति में है. खास तौर पर झुग्गी-बस्तियों में रहने वाली और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को गर्भावस्था से लेकर डिलीवरी तक जांच और इलाज के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है. इसे ध्यान में रखते हुए, पुणे की सामाजिक कार्यकर्ता स्मिता पाटिल ने गरीब गर्भवती महिलाओं के लिए काम करना शुरू किया.
संस्था उठाती है सारा खर्च
स्मिता पाटिल की संस्था 'सखी सुखदा वुमन वेलफेयर फाउंडेशन' कोथरुड इलाके की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाली महिलाओं को गर्भावस्था के पहले महीने से लेकर बच्चे के 6 महीने का होने तक पूरी चिकित्सा सहायता मुफ्त प्रदान करती है. डिलीवरी सहित अस्पताल का सारा खर्च संस्था खुद उठाती है.
अब तक एक हजार महिलाओं की हुई डिलीवरी
इस पहल के तहत पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में डिलीवरी की सुविधा दी जाती है. पिछले दो वर्षों में, लगभग दो हजार गर्भवती महिलाओं ने पंजीकरण कराया है और उनमें से एक हजार महिलाओं की सफल डिलीवरी हो चुकी है. संस्था का यह काम कई जरूरतमंद महिलाओं के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है.

संस्था की शुरुआत कैसे हुई?
इस बारे में 'सखी सुखदा वुमन वेलफेयर फाउंडेशन' की अध्यक्ष स्मिता पाटिल ने बताया कि उन्होंने साल 2024 में इस संस्था की स्थापना कर काम शुरू किया था. उन्हें कोथरुड क्षेत्र की गरीब बस्तियों में काम करने वाले अपने डॉक्टर दोस्तों से पता चला कि कई महिलाओं को तो चौथे या पांचवें महीने तक अपनी प्रेग्नेंसी का पता ही नहीं चलता. गर्भावस्था का पता चलने के बाद भी जरूरी जांचों को नजरअंदाज कर दिया जाता है. इस गंभीर समस्या को देखते हुए संस्था ने इस दिशा में कदम बढ़ाया.
स्मिता पाटिल ने कहा कि शुरुआत में लोगों को भरोसा नहीं हुआ कि कोई संस्था प्रेग्नेंसी से लेकर डिलीवरी तक के सभी टेस्ट और खर्च खुद उठाएगी. हालांकि, धीरे-धीरे विश्वास बढ़ा और महिलाएं संस्था से जुड़ने लगीं. पिछले दो वर्षों में लगभग दो हजार महिलाओं ने अपना पंजीकरण कराया है.
पंजीकरण से पहले दस्तावेजों की जांच
संस्था में रजिस्ट्रेशन से पहले संबंधित महिला का आय प्रमाण पत्र (Income Certificate) और जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाती है. कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद, गर्भावस्था के शुरुआती महीनों से ही सभी जांच, दवाइयां और अच्छे अस्पतालों में मुफ्त डिलीवरी की सुविधा दी जाती है. स्मिता पाटिल ने यह उम्मीद भी जताई कि यह पहल केवल कोथरुड तक सीमित न रहकर पूरे पुणे शहर में लागू की जानी चाहिए.

लाभार्थी महिलाओं ने जताया आभार
संस्था का लाभ ले रही एक महिला ने बताया कि वह पिछले चार महीनों से यहां आ रही हैं और उनकी सभी जांचें और सोनोग्राफी बिल्कुल मुफ्त हुई हैं. उन्होंने कहा कि संस्था के सभी लोग बहुत मददगार हैं और इलाज अच्छे से चल रहा है.
वहीं, बर्तन मांजकर अपना गुजारा करने वाली एक अन्य महिला ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी और बहू का पंजीकरण इस संस्था में कराया है. वह लगातार इस चिंता में रहती थीं कि आर्थिक तंगी के कारण बड़े अस्पताल का खर्च कैसे उठाएंगी। लेकिन संस्था से जुड़ने के बाद उनकी सारी चिंताएं दूर हो गई हैं.
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