शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हरकी पैड़ी पर धरना, बोले- प्रयागराज प्रशासन मांगें माफी
नहीं थम रहा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर बवाल, हरिद्वार में सांकेतिक धरना, प्रयागराज प्रशासन से माफी मांगने की मांग उठाई

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : January 20, 2026 at 7:12 PM IST
हरिद्वार: प्रयागराज में गंगा स्नान करने से रोके जाने को लेकर प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. मामले को लेकर हरिद्वार के हरकी पैड़ी पर भारत साधु समाज और श्री अखंड परशुराम अखाड़े के कार्यकर्ताओं ने सांकेतिक धरना दिया. इस दौरान उन्होंने प्रशासन की ओर से किए गए दुर्व्यवहार और उनके शिष्यों से बर्बरता को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया.
श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि प्रयागराज की घटना सनातन प्रेमियों के लिए चिंता का विषय है. एक ब्रह्मचारी का तप बहुत कठिनाइयों से भरा होता है. प्रयागराज के प्रशासन ने सम्मानित पीठ के शंकराचार्य का अपमान किया है. उनके ब्रह्मचारी शिष्यों की शिखा पकड़कर खींचा गया, जिनके वीडियो भी सामने आए हैं. उन्होंने मांग की है कि ऐसा करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए. उन्होंने मांग पूरी न होने पर शिखा कटवाने की चेतावनी भी दी.
"शंकराचार्य को शंकराचार्य, प्रशासन तय नहीं कर सकता है. यह पद साधु संतों की ओर से चुना जाता है, जो कि सरकार का विषय नहीं है. प्रयागराज में जिस तरह से कृत्य यूपी सरकार और उनके प्रशासन की ओर से किए गए हैं, वो बेहद निंदनीय है, लेकिन इसके बावजूद भी अब तक शंकराचार्य से माफी नहीं मांगी गई, यह कहीं न कहीं गंभीर सवाल खड़े करते हैं."- स्वामी प्रबोधानंद गिरि, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, भारत साधु समाज
योगी सरकार का प्रतिनिधिमंडल मिलकर मांगें माफी: इसके साथ स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने कहा कि उनकी मांग है कि 'जल्द से जल्द योगी सरकार का कोई प्रतिनिधिमंडल या फिर कोई प्रतिनिधि उनसे जाकर भेंट करें और उनसे माफी मांगे. संत हमेशा से ही सरल स्वभाव के होते हैं, वो गुस्सा भी जल्दी हो जाते हैं और मान भी जल्दी जाते हैं. इसलिए उनसे जल्द से जल्द माफी मांगनी चाहिए.'

"उत्तर प्रदेश में सनातन प्रेमी सरकार है, लेकिन उस सरकार में अमानवीय कृत्य किया गया है. उस सरकार से मांग है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल बर्खास्त किया जाए. जब तक मांग पूरी नहीं होती, तब तक शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे."- विनोद मिश्रा, समाजसेवी
बता दें कि प्रयागराज में ज्योतिर्मठ या ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से रोकने और उनके शिष्यों के साथ कथित मारपीट के बाद मामले को लेकर देशभर में विरोध किया जा रहा है. एक दिन पहले ही हरिद्वार के कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में (जो शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का मठ है), वहां भी राम नाम कीर्तन किया गया था.
रात के अंधेरे में प्रशासन ने चुपचाप शिविर के बाहर यह नोटिस चस्पा किया। #प्रयागराज #माघमेला #ShankaracharyaJyotirmath #shankaracharyaavimukteshwaranandSaraswatijimaharaj #badrivishal #himalaya #SiddharthSamwat pic.twitter.com/zzJu6In05K
— 1008.Guru (@jyotirmathah) January 20, 2026
क्या था मामला? गौर हो कि बीती 18 जनवरी को प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को पुलिस ने संगम तट पर जाने से रोक दिया था, जिससे मेला क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी. काफिले को रोकने पर समर्थकों और पुलिस के बीच बहस भी हुई और देखते ही देखते धक्का-मुक्की तक होने लगी. जिससे मामला गरमा गया.
उधर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर शिष्यों के साथ मौनी अमावस्या के दिन बैरिकेडिंग तोड़ने का आरोप लगाया गया है. इसके बाद शंकराचार्य माघ मेला के सेक्टर 4 स्थित शिविर के बाहर अपने अनुयायियों के साथ पिछले तीन दिनों से पालकी पर ही बैठे हैं. वहीं, प्रयागराज माघ मेला विकास प्राधिकरण उनके शिविर के बाहर उनकी पदवी को लेकर नोटिस चस्पा किया गया है. जिसमे 24 घंटे के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है.
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