IMA से पास आउट हुई पहली महिला ऑफिसर, सई जाधव ने रचा इतिहास, पढ़िए सक्सेस जर्नी
भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होकर पहली महिला अफसर बनीं महाराष्ट्र की सई जाधव.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : December 13, 2025 at 4:56 PM IST
|Updated : December 13, 2025 at 5:06 PM IST
देहरादून: भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून के 93 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है. देश की प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्था से पहली बार किसी महिला अधिकारी ने प्रशिक्षण पूरा कर सेना में कदम रखा है. महाराष्ट्र की रहने वाली सई जाधव ने भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होकर इतिहास रच दिया है और वह आईएमए से पास आउट होने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी बन गई हैं.
महाराष्ट्र की कोल्हापुर की रहने वाली सई जाधव ने अकादमी के इतिहास में अपनी एक अलग जगह बना ली है. दरअसल, सई जाधव भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होकर सेना में अफसर बनने वाली पहली महिला बन गई है.
साल 1932 में स्थापित भारतीय सैन्य अकादमी अब तक करीब 67 हजार ऑफिसर्स कैडेट्स को प्रशिक्षण देकर भारतीय सेना को मजबूत कर चुकी है. लेकिन इतने लंबे इतिहास में यह पहला अवसर है जब अकादमी से कोई महिला अधिकारी सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर सेना का हिस्सा बनी है. यह न सिर्फ अकादमी के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और गौरव का क्षण है.
2026 जून में महिला का होगा पूरा बैच: हालांकि, आगामी जून महीने में होने वाली पासिंग आउट परेड में पहली बार महिला ऑफिसर्स कैडेट्स परेड करते हुए नजर आएंगी और यह अकादमी का पहला महिला अधिकारियों का बैच होगा. लेकिन उससे पहले ही सई जाधव ने अकेले पास आउट होकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है. चूंकि, वह इस समय अकेली महिला ऑफिसर कैडेट के रूप में पास आउट हुई हैं, इसलिए वह औपचारिक पासिंग आउट परेड का हिस्सा नहीं बनीं. हालांकि, पीपिंग सेरेमनी के दौरान उनके परिजनों ने उनके कंधों पर सितारे लगाकर इस ऐतिहासिक पल को और भी भावुक और यादगार बना दिया.

परिवार की चौथी पीढ़ी: सई जाधव का सेना से जुड़ाव सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक परंपरा का भी हिस्सा है. वह अपने परिवार में भारतीय सेना में सेवा देने वाली चौथी पीढ़ी हैं. उनके परदादा ब्रिटिश आर्मी में थे. जबकि उनके दादा और पिता भारतीय सेना में अधिकारी रह चुके हैं. वर्तमान में उनके पिता संदीप जाधव भी भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं.
एसएसबी के जरिए हुई चयनित: सई जाधव मूल रूप से महाराष्ट्र की रहने वाली हैं. लेकिन उनके पिता की सैन्य सेवाओं के चलते उनकी पढ़ाई देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने ऑल इंडिया लेवल की परीक्षा पास की और फिर एसएसबी के जरिए चयनित होकर भारतीय सैन्य अकादमी तक का सफर तय किया. सई ने अकादमी में करीब छह महीने का कठोर सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया है.
सई जाधव का कहना है कि अकादमी से पहली महिला अधिकारी के रूप में पास आउट होना, अपने आप में गर्व की बात है. अब जेंटलमैन कैडेट्स की जगह ऑफिसर कैडेट्स के रूप में संबोधन किया जाना भी इस ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है. यह पल न सिर्फ उनके परिवार बल्कि हर उस परिवार के लिए गौरवमयी है, जिनके बच्चे आज सेना में कमीशन्ड हो रहे हैं.

टेरिटोरियल आर्मी में बतौर अफसर ज्वाइनिंग: सई के पिता संदीप जाधव कहते हैं कि वो सेना में एक अधिकारी के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं. हालांकि, टेरिटोरियल आर्मी में पहले भी महिला अफसर मौजूद है. लेकिन भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होकर टेरिटोरियल आर्मी में बतौर अफसर ज्वाइन करने वाली उनकी बेटी पहली महिला अफसर है. उन्हें इस बात पर गर्व है.
उधर, सई जाधव की बात करें तो उन्होंने टेरिटोरियल आर्मी में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा को पास किया था और इसके बाद SSB क्लियर करने के बाद वो अकादमी में विशेष अनुमति के साथ 6 महीने के प्रशिक्षण के लिए आई थी. जाहिर है कि सई जाधव महिला ऑफिसर्स कैडेट के पहले बैच में से एक नहीं हैं. लेकिन टेरिटोरियल आर्मी में अधिकारी के रूप में उन्होंने अकादमी से प्रशिक्षण लेकर नया रिकॉर्ड बनाया है. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने एसएसबी एग्जाम क्लियर किया.
सई जाधव टेरिटोरियल आर्मी में अकादमी से पास आउट होने के बाद लेफ्टिनेंट के तौर पर जिम्मेदारी संभालेगी. यह पहली बार है जब किसी महिला कैडेट ने एसएसपी क्लियर करने के बाद आईएमए में प्रवेश पाया है.
भारतीय सैन्य अकादमी में भले ही अब तक पुरुष कैडेट प्रशिक्षण लेते रहे हो, लेकिन अब अकादमी में महिलाओं को भी बराबर का मौका मिल रहा है. फिलहाल भारतीय सैन्य अकादमी में महिला ऑफिसर्स का पहला बैच प्रशिक्षण ले रहा है और जून में होने वाली पासिंग आउट परेड के दौरान चेटवुड भवन के सामने ड्रिल स्क्वायर पर ये महिला ऑफिसर्स कैडेट कदम ताल करती हुई दिखाई देंगी.
फिलहाल अकादमी में कुल 8 महिला ऑफिसर्स कैडेट प्रशिक्षण ले रही हैं. जाहिर है कि पहले बैच आने से पहले अकादमी ने भी खुद को इसके लिए तैयार किया. दरअसल, साल 2022 में पहला बैच एनडीए में शामिल हुआ था, जिसमें से 8 महिला कैडेट भारतीय सैन्य अकादमी में 1 साल का प्रशिक्षण लेने के लिए शामिल हुई हैं.
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