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'HUDA हटाओ जमीन बचाओ', भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना के विरोध में साबरकांठा के किसानों का प्रदर्शन

साबरकांठा के किसान भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना के विरोध में बारिश की परवाह न करते हुए सड़कों पर उतर आए.

protest against HUDA
अपनी जमीन के लिए किसानों का प्रदर्शन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : October 30, 2025 at 9:41 PM IST

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साबरकांठा: गुजरात के साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर तालुका के कंकनोल गांव में गुरुवार को भारी बारिश के बीच किसानों ने हिम्मतनगर शहरी विकास प्राधिकरण के खिलाफ प्रदर्शन किया. यहां के किसान शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) द्वारा शहरी विकास के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना के विरोध में खेडुत महापंचायत में भाग लिया.

इस विरोध प्रदर्शन में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं. प्रदर्शन के क्रम में महिलाएं बारिश की परवाह किए बिना "हुडा हटाओ-जमीन बचाओ" के नारे लगा रही थीं. हाथों में बैनर और सिर पर गांधी टोपी पहने, उन्होंने अपने अधिकारों की रक्षा का संकल्प व्यक्त किया.

यह स्पष्ट करते हुए कि यह आंदोलन पूरी तरह से गैर-राजनीतिक है, किसानों ने अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा को अपना एकमात्र उद्देश्य बताया. हुड्डा हटाओ समन्वय समिति ने बताया कि अब तक 130 से ज्यादा गांवों ने इस विरोध प्रदर्शन का खुलकर समर्थन किया है, और आने वाले दिनों में और भी गांवों के शामिल होने की उम्मीद है.

किसानों का कहना है कि, वे शहरी विकास के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि गुजरात नगर नियोजन एवं शहरी विकास अधिनियम, 1976 के उन प्रावधानों का विरोध करते हैं, जो बिना किसी वित्तीय मुआवजे के सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए किसानों की 40 फीसदी तक भूमि अधिग्रहण की अनुमति देते हैं.

किसानों को आशंका है कि इतनी बड़ी जमीन खोने से उनकी आजीविका, जो मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर निर्भर है, प्रभावित होगी. इसी आशंका ने विरोध को और भड़का दिया है.

यह विरोध प्रदर्शन मूल रूप से 11 गांवों में शुरू हुआ था, लेकिन अब पूरे जिले में फैल गया है. समिति ने चेतावनी दी है कि अगर 15 दिनों के भीतर अधिसूचना वापस नहीं ली गई, तो किसान नेताओं का घेराव करेंगे. उन्होंने घोषणा की, "जमीन हमारी जान है और हम इसकी रक्षा के लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं."

महापंचायत के अंत में, समन्वय समिति ने घोषणा की कि अब आंदोलन को और अधिक संगठित और अनुशासित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा. नेताओं ने कहा, "अब हम यह लड़ाई भगत सिंह के तरीके से लड़ेंगे." हिम्मतनगर आंदोलन से प्रेरित होकर, कई तालुकाओं के किसानों ने भी विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन देने का वादा किया है.

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