उत्तराखंड के रुद्रपुर में किसानों का आंदोलन स्थगित, मांगे पूरी नहीं होने पर दी बड़ी चेतावनी, जानिये क्या कहा
किसानों ने प्रभारी जिलाधिकारी को मांगों का ज्ञापन सौंपा. साथ ही किसानों ने मांगें पूरी नहीं होने पर देहरादून में अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 23, 2026 at 6:15 PM IST
रुद्रपुर: भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का जिला मुख्यालय पर चल रहा तीन दिवसीय धरना रविवार को समाप्त हो गया. प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह सहोता के नेतृत्व में किसानों ने प्रभारी जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय को ज्ञापन सौंपकर विभिन्न मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की. किसानों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो अगला आंदोलन देहरादून में होगा और इसे अनिश्चितकालीन किया जाएगा.
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की ओर से किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर चल रहा तीन दिवसीय धरना रविवार को समाप्त कर दिया गया. धरने के अंतिम दिन बड़ी संख्या में किसान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह सहोता के नेतृत्व में एकत्र हुए. किसानों ने अपनी मांगों से संबंधित मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन प्रभारी जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय को सौंपा। ज्ञापन सौंपते हुए किसानों ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की.
प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह सहोता ने कहा भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की ओर से प्रदेशभर में किसानों की समस्याओं को लेकर तीन दिवसीय धरने का आह्वान किया गया था. निर्धारित कार्यक्रम के तहत तीन दिन तक धरना देने के बाद रविवार को इसे फिलहाल स्थगित किया गया है. उन्होंने कहा कि धरना समाप्त हुआ है, लेकिन किसानों का संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है. यदि सरकार किसानों की मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं करती है तो संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत से वार्ता कर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी.
सहोता ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में किसानों का अगला पड़ाव देहरादून होगा. उन्होंने किसानों से अपील की कि जरूरत पड़ने पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ देहरादून पहुंचने के लिए तैयार रहें. उन्होंने कहा कि किसान अपने साथ राशन, भोजन और अन्य जरूरी सामान भी रखें, क्योंकि अगला आंदोलन अनिश्चितकालीन किया जा सकता है. उन्होंने सरकार से टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय किसानों की मांगों का समय रहते समाधान करने की अपील की.
किसानों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं. किसानों ने सभी ट्यूबवेलों के बिजली बिल माफ करने और घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की मांग की. इसके साथ ही किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ करने तथा पहाड़ी जिलों के किसानों को प्रतिमाह 20 हजार रुपये देने की मांग भी उठाई गई.
किसानों ने बाजपुर के 20 गांवों की भूमि से संबंधित खाद, लोन और क्रय-विक्रय पर लगी रोक हटाने की मांग की. उनका कहना है कि किसानों को भूमि पर पूर्ण अधिकार दिया जाना चाहिए. इसके अलावा काशीपुर बंद पड़ी चीनी मिल से संबंधित वर्ष 2007 के लगभग एक करोड़ रुपये और वर्ष 2011-12 के करीब 25 करोड़ रुपये के बकाये का तत्काल भुगतान कराने की मांग की गई.
ज्ञापन में स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाने तथा पूर्व में लगाए गए स्मार्ट मीटरों को हटाने की मांग भी शामिल रही. किसानों ने गन्ने का मूल्य 700 रुपये प्रति क्विंटल करने और सभी वर्गों के किसानों को भूमि का हक-कब्जा दिए जाने की मांग भी रखी.
प्रभारी जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने किसानों का ज्ञापन स्वीकार करते हुए कहा कि उनकी मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाया जा चुका है. उन्होंने बताया कि सोमवार को दोपहर तीन बजे किसानों के कुछ पदाधिकारियों की जिलाधिकारी के समक्ष वार्ता कराई जाएगी. वार्ता में किसानों की मांगों पर चर्चा की जाएगी. सामने आने वाले निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
पंकज उपाध्याय ने किसानों को बताया कि जिलाधिकारी के बेटे की तबीयत खराब होने के कारण वह स्वयं किसानों के बीच नहीं आ सके. इसी कारण उन्हें प्रभारी जिलाधिकारी के रूप में ज्ञापन लेने के लिए भेजा गया. किसानों ने भी मानवीय संवेदना दिखाते हुए जिलाधिकारी की स्थिति को समझा और कहा कि वे ऐसी परिस्थिति में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं देना चाहते.
इसके बाद किसानों ने निर्धारित तीन दिवसीय धरना पूरा होने पर आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया. हालांकि, संगठन ने स्पष्ट कर दिया कि यदि आगामी वार्ता और सरकार की कार्रवाई से किसानों को संतोषजनक समाधान नहीं मिला तो आंदोलन फिर तेज किया जाएगा.
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